बाढ़ ने छीनी ग्रामीणों की मूलभूत सुविधाएं, गांवों में हुआ जीवन बेहाल

Smart News Team, Last updated: Tue, 10th Aug 2021, 11:19 AM IST
  • चंबल नदी खतरे के निशान से नीचे उतर आई है. लेकिन बाढ़ प्रभावित 14 गांवों में ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. ग्रामीण राशन के लिए परेशान है. हैंडपंप से भी गंदा पानी आ रहा है. बाढ़ के पानी से गांव घिरा हुआ है. फसलें भी चौपट हो गई हैं. ग्रामीण प्रशासन से मदद मिलने का इंतजार कर रहे हैं.
बाढ़ के पानी से घिरा गांव (फाइल फोटो)

आगरा. मानसून की बारिश से चंबल में आया उफान सोमवार को थम गया है. नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे उतर गया है. लेकिन बाढ़ प्रभावित 14 गांव में ग्रामीणों का जीवन बेहाल हो गया है. बाढ़ के पानी में बिजली के पोल डूबे हुए है. जिस कारण बिजली व्यवस्था ठप पड़ी है. बाढ़ के पानी में डूबने के कारण दर्जनों मकानों में दरारे आ गई हैं. घरों में रखा राशन भी सड़ गया है. साथ ही किसानों की फसलें भी चौपट हो गई हैं. बाढ़ से बचने के लिए ऊंचे टीलों पर विस्थापित हुए ग्रामीणों के रहने की भी कोई व्यवस्था नहीं है. गांव के मुख्य मार्गों पर पानी भरा हुआ है. वहीं बाढ़ का पानी कम होते ही गांव वालों को बीमारियों ने जकड़ लिया है. ऐसे में ग्रामीण प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं.

गौरतलब है कि बारिश से चंबल का जलस्तर काफी बढ़ गया था. पिनाहट पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान 130 मीटर से 5.80 मीटर ऊपर था. जिस कारण करीब 36 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे. बाढ़ के पानी में नदी के तटवर्ती गांव गुढ़ा, गोहरा, रानी पुरा, भटपुरा, मऊ की मढ़ेया, भगवान पुरा, झरना पुरा, पुरा शिवलाल, उमरैठा पुरा, कछियारा, रेहा पानी में डूब गए थे. जिस कारण गांव के लोगों को ऊंचे टीले पर विस्थापित होना पड़ा था. हालांकि सोमवार को नदी का जलस्तर घटकर 129.60 मीटर रह गया. लेकिन बाढ़ से प्रभावित गांव में ग्रामीणों के सामने अब संकट खड़ा हो गया है. वे मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. ग्रामीण राशन के लिए परेशान है और पशुओं के लिए भी चारा नहीं है.

बाढ़ के कारण ग्रामीणों का जीवन हुआ बेहाल (फाइल फोटो)

गांव रेहा के प्रधान अजय कौशिक ने बताया कि गांव के आठ-आठ किलोमीटर तक चारों ओर बाढ़ का पानी भरा हुआ है. ग्रामीणों के घरों में सांप निकल रहे हैं. बाढ़ के बाद अब ग्रामीण बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. गांव में दवा का छिड़काव भी नहीं हुआ है और न ही स्वास्थ्य विभाग की टीम उनका हाल जानने आई. ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में रोशनी के लिए उन्होंने प्रशासन से दो सौ लीटर मिट्टी के तेल की मांग की थी. लेकिन अब तक वह भेजा नहीं गया. बाढ़ की चपेट में आए ग्रामीण तबाही के नुकसान से उभर नहीं पा रहे हैं. गांव की गलियां और खेत अभी भी डूबे हुए हैं. उमरैठा पुरा गांव में घरों में दलदल के नीचे ग्रामीणों का समान दबा हुआा है.

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जानकारी के मुताबिक उमरैठापुरा, गुढ़ा और झरनापुरा में प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई है. वहीं पुरा डाल, पुरा शिवलाल, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, भगवानपुरा, क्योरी बीच का पुरा, रेहा, डगोरा आदि गांव में ग्रामीण राहत सामग्री के लिए प्रशासन का मुंह ताक रहे हैं. एसडीएम बाह अब्दुल बासित ने बताया कि नदी का जलस्तर घट रहा है. जल्द ही बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत सामग्री पहुंचाई जाएगी.

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