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कोरोना के तीसरे चरण को नहीं झेल पाएगा आगरा, जिले में सिर्फ एक कोविड-19 अस्पताल

Smart News Team, Last updated: 11/06/2020 09:59 AM IST
  • आगरा में कोरोना वायरस के तीसरे चरण शुरू होने की प्रबल आशंका तो है लेकिन जिले में तैयारियां बिल्कुल नहीं हैं। जिले में जून मिड से लेकर जुलाई तक मरीजों का आंकड़ा कल्पना से भी अधिक हो सकता है।
आगरा में कोरोना के तीसरे चरण आने के आसार तो हैं लेकिन तैयारी कहीं नजर नहीं आ रही।

आगरा. ताजनगरी आगरा में कोरोना वायरस के तीसरे चरण शुरू होने की प्रबल आशंका है। बताया जा रहा है कि जून मिड से लेकर जुलाई तक मरीजों का आंकड़ा कल्पना से भी अधिक हो सकता है। इसी आशंका की वजह से राजधानी दिल्ली में तो तैयारियां चल रही हैं लेकिन ऐसी तैयारियां आगरा में दिखाई नहीं दे रहीं। वो भी ऐसे समय पर जब उत्तर प्रदेश में आगरा कोरोना की राजधानी बन गया हो क्योंकि पूरे प्रदेश में यहां सबसे अधिक संक्रमित मामले हैं। साथ ही मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि आगरा जिले की आबादी करीब 45 लाख है जिसमें शहरी आबादी लगभग 20 लाख मानी गई है। कोविड-19 का पहला चरण खत्म हो चुका है। पहले चरण ने जिले को हिलाकर रख दिया था। वर्तमान में दूसरा चरण अब चल रहा है जिसमें औसतन प्रतिदिन आठ से 10 मरीज निकल रहे हैं। अब लॉकडाउन खुल चुका है। अनलॉक-1 में तमाम राहत दी गई हैं। लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। बाजार और मॉल खुल चुके हैं। सब्जी मंडियां भी सजने लगी हैं।

कोविड प्रोटोकाल के मुताबिक सरकारी और निजी दफ्तरों में भी कार्य शुरू हो गया है। यानि लोगों का मूवमेंट अचानक बढ़ गया है। इसी के चलते डब्ल्यूएचओ और आईसीएमआर ने जून और जुलाई में संक्रमण के तीसरे दौर में मरीजों की बड़ी तादाद निकलने की आशंका जताई है। कहने का अर्थ है किलोगों का जितना अधिक मूवमेंट होगा, उतनी गलतियां होंगी और नए मरीज सामने आएंगे। लिहाजा संक्रमण का अधिक प्रकोप झेल रहे राज्यों और शहरों में तैयारियां की जा रही हैं। अधिक से अधिक बेड और वेंटीलेटरों का प्रबंध किया जा रहा है। आगरा में ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा। आबादी के मुताबिक बेड, वेंटीलेटर, तीनों स्तर के अस्पतालों का प्रबंध नहीं है।

जून अंत तक बनेगी कोविड यूनिट-2

कोविड यूनिट-2 की तैयारियां एसएन मेडिकल कॉलेज में चल रही हैं। यहां एल-3 श्रेणी के 100 बेड की सुविधा विकसित की जा रही है। लॉकडाउन के दौरान सामान नहीं मिलने के कारण इसका काम पिछड़ता चला गया। यहां मरीजों के लिए लिफ्ट भी लगनी हैं। जून के अंतिम सप्ताह में यह काम होगा। लिफ्ट एडीए लगवा रहा है। जबकि शहर के दानदाताओं ने यहां के लिए 22 विंडो एसी पहले ही दान कर दिए हैं। यानि यूनिट नंबर दो में कोविड मरीजों को जुलाई से ही इलाज मिल पाएगा। तब तक मरीज बढ़ें या घटें, 100 बेडों से ही काम चलाना पड़ेगा।

एल-2 और एल-3 की सुविधा अपर्याप्त

बिना लक्षणों वाले एल-1 श्रेणी के मरीज घर में ही आइसोलेट किए जा सकते हैं। जिनके घरों में एकांतवास की सुविधा नहीं है, उनके लिए क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास 10 क्वारंटाइन सेंटर हैं। ऐसे मरीजों के शत-प्रतिशत ठीक होने की उम्मीद की जा सकती है। दिक्कत सिर्फ लक्षण वाले और पुरानी बीमारियों वाले मरीजों के साथ हैं। कोरोना के साथ इनकी बीमारी बिगड़ सकती है। हालत गंभीर हो सकती है। लिहाजा एल-2 और एल-3 श्रेणी के अस्पतालों की जरूरत अधिक पड़ सकती है। विभाग के पास ऐसे अस्पताल नहीं हैं।

सिर्फ 3 प्रतिशत जांच करके ठोंक रहे पीठ

जिले की आबादी है करीब 45 लाख। मंगलवार शाम तक संक्रमितों की संख्या का आंकड़ा 991 पहुंच गया था। जबकि 53 मौत हो चुकी हैं और इस समय कुल 116 एक्टिव केस हैं, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। अब जरा स्वास्थ्य विभाग की हालत देखिए। इन आंकड़ों के बीच अभी तक की कुल जांच संख्या 15498 है। यह सरकारी आंकड़ा है और कुल आबादी का सिर्फ 3 प्रतिशत है। इतने कम लोगों की जांच का मतलब है कि लोग रोग को पाले बैठे हैं। जांच होगी तो अधिक केस सामने आएंगे। इस पर भी स्वास्थ्य विभाग अपनी पीठ ठोंक रहा है।

लौटाए जा रहे हैं जांच कराने आ रहे लोग

दुनिया के तमाम देशों में लोगों के घरों पर जाकर नमूने लिए जा रहे हैं। कई देशों में पूल सैंपलिंग की जा रही है। देश में भी कुछ राज्यों में नमूनों की तादाद बढ़ाई जा रही है। ताकि कोविड मरीजों का जल्द इलाज करके उन्हें स्वस्थ किया जा सके। आगरा में ठीक उल्टा किया जा रहा है। यहां लोग खुद अपनी जांच कराने आ रहे हैं। इन लोगों को लौटाया जा रहा है। आइसोलेट करने का डर दिखाया जा रहा है। ऐसे लोग निजी लैब में जा रहे हैं। यहां उन्हें प्रति जांच 4500 रुपये देने पड़ रहे हैं। बीते सप्ताह से निजी प्रयोगशालाओं ने भी नमूने और जांच को सीमित कर दिया है।

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