आगरा

कोरोना मरीज को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे निजी अस्पताल, जमकर वसूल रहे पैसा

Smart News Team, Last updated: 25/07/2020 05:58 PM IST
  • आगरा के प्राइवेट अस्पताल कोरोना मरीजों से अपने अनुसार पैसा वसूल कर रहे हैं जबकि सरकार ने कोविड-19 के इलाज की दरें तय की है. 
कोरोना मरीज को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे निजी अस्पताल, जमकर वसूल रहे पैसा

आगरा. शासन की सख्ती और कोरोना इलाज की तय रकम होने के बावजूद जिले के प्राइवेट अस्पताल लोगों को लूटने का कोई मौका भी नहीं छोड़ रहे हैं. सरकार के आदेश के बाद भी अस्पताल कोविड-19 मरीज से मर्जी अनुसार पैसा ले रहे हैं. 

जिले के कमला नगर के व्यवसायी कोमल ने बताया कि सास और ससुर कोरोना संक्रमित होने वजह से एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हैं जहां फोन भी नहीं रखने दिया गया है. भर्ती होने के छह दिन में करीब चार लाख रुपये खर्च हो चुके हैं. जो टेस्ट बाहर की लैबों में एक हजार रुपये में होता है वह अस्पताल में चार हजार रुपये में कराया जा रहा है.

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वहीं दो-फुलट्टी निवासी एक महिला बिना लक्षण के संक्रमित पाए जाने पर एक निजी अस्पताल में भर्ती हुईं. उनका बिल सवाल लाख रुपये बना दिया गया जबकि कोविड का इलाज भी शामिल नहीं था. यह बिल एंबुलेंस से लाने, डॉक्टरों की विजिट, रूम चार्ज, कार्डियोलॉजी सर्विस आदि के पैसे लगाकर दे दिया गया. इस पर कितना खर्चा होगा किसी को मालूम नहीं.

आगरा में ही केंद्रीय सरकार के अधीन शिक्षण संस्थान के डी ग्रेड कर्मचारी करोना संक्रमित होने के बाद प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराए गए. उनसे अस्पताल में तीन लाख रुपये पैकेज की मांगी गई. पैसे ना दिए जाने पर भर्ती करने से मना कर दिया गया. बाद में उच्चाधिकारियों ने सिफारिश लगाकर किसी तरह एसएनएमसी में कर्मचारी को इलाज के लिए भर्ती कराया.

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जो आपने पढ़े ये तो सिर्फ 3 मामले हैं. इसके अलावा भारी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. मरीजों के परिजन शिकायत भी कर रहे हैं लेकिन कोई नियंत्रण नहीं है.

 कुछ मरीजों की शिकायत है कि उनके स्वास्थ्य बीमा के सीमा से अधिक की बिलिंग की गई जिसका पैसा उन्हें जेब से भरना पड़ा. ‌‌शुरुआती समय में जिला प्रशासन ने प्राइवेट अस्पतालों पर सख्ती की लेकिन सहयोग न मिलने पर प्रशासन ने भी हस्तक्षेप करना बंद कर दिया है.

जिले में हालात ये है कि मरीज और अस्पताल के बीच ही पूरा मामला रहता है. अस्पताल जितने पैसे बता रहा है उतने मरीज के परिवारीजनों को जमा करना होते हैं. आला-अधिकारी भी इस संबंध में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं.े

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