आगरा

सौ दिन से तालों में ‘कैद’ है शहंशाह की मोहब्बत, गाइड हुए बेरोजगार, अरबों का घाटा

Smart News Team, Last updated: 05/07/2020 09:31 AM IST
  • बादशाह शाहजहां और उसकी बेगम मुमताज की असली कब्रें तो वैसे ही ताले में बंद रहती हैं, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के प्रतिकृति के रूप में ऊपर की ओर बनाई गई कब्रें भी अब तालों में बंद हैं।
ताजमहल के बंद होने से हो रहा बड़ा नुकसान।

सौ दिन से ज्यादा का समय हो चुका है। इतने लंबे समय से एक शहंशाह की मोहब्बत तालों में कैद होकर रह गई है। यही नहीं, ताजमहल की लाखें की प्रतिकृति तालों में कैद है। कोरोना काल में एंपोरियमों में ताले जड़े हुए हैं। आगरा से अमेरिका, ब्रिटेन से लेकर दुनिया के हर कोने तक ये सामान जाता है। अब फिलहाल पूरी तरह से सामान का जाना बंद हो गया है।

बादशाह शाहजहां और उसकी बेगम मुमताज की असली कब्रें तो वैसे ही ताले में बंद रहती हैं, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के प्रतिकृति के रूप में ऊपर की ओर बनाई गई कब्रें भी अब तालों में बंद हैं। उसने सपने में भी न सोचा होगा कि जिसे निहारने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं, वह इस महामारी के चलते उनसे दूर हो जाएंगे। यही हाल एंपोरियमों का भी है। यहां रखी शाहजहां-मुमताज की हस्त शिल्प की पेंटिंग और अन्य संगमरमर के पत्थरों का सामान भी शो केस में बंद है। एंपोरियम बंद होने से लगभग 300 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। जबकि इससे जुड़े लगभग 70 हजार लोग घरों पर बैठने को मजबूर हैं।

एंपोरियम के व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अभी लगभग दो साल तक गाड़ी पटरी पर लौटने की उम्मीद भी नहीं दिख रही है। माल मिलने में भी दिक्कत होगी। कर्मचारी घर चले गए हैं। वह भी मुश्किल से ही वपस लौटेंगे। सराकार कुछ राहत देगी तो फिर से काम ढर्रे पर लौटेगा नहीं तो सब कुछ बर्बाद ही हो जाएगा।

शिल्पियों का हुनर भी तालों में बंद

आगरा के शिल्पकार दुनियाभर में मशहूर हैं। यहां की कला के कद्रदान विदेशों तक में हैहं, लेकिन कोरोना काल में इनका हुनर बेमतलब हो गया है। नए और नए मिले नहीं हैं और पुराने कैंसल हो गए हैं। यही हाल शिल्पकारों का है। आगरा में इस व्यवसाय से लगभग 25 हजार लोग प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इन शिल्पकारों को कोई नया आर्डर ही नहीं मिल रहा है। शिल्पियों का कहना है कि एक आयटम बनाने में एक से दो माह का समय लग जाता है। अब न आर्डर ही मिल रहा है और न ही उनके पास सामान ही है। ऐसे में घर बैंने की मजबूरी है। करें भी तो क्या करें। उनका कहना है कि आगरा में लगभग 1600 शिल्पी इस कला से जुड़े हैं, लेकिन किसी के पास काम ही नहीं है। बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। 

उनकी मानें तो उनकी तैयार माल के न बिक पाने के कारण लगभग 12 करोड़ का नुकसान हो गया है। जबकि इतने के ही आर्डर न मिलने के कारण नुकसान हुआ है। कई राष्ट्राध्यक्षों के परिवार भी आगरा की शिल्पकला के मुरीद रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और उनकी पत्नी हिलेरी तो आगरा की कला देखने गांवों में तक देखने गए थे। उन्हें यहां के शिल्पकारों ने भेंट में भी कुछ आयटम दि्ए थे। अब पिचले तीन माह से अधिक समय से राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय शिल्पकार भी बेरोजगार हो चुके हैं। सरकार द्वारा मिलने वाली सहायता भी इस बार नहीं मिली है।

आंकड़ों में जानें…

1500 करोड़ का है एंपोरियमों का टर्न ओवर

500 से अधिक हैं शहर में एंपोरियम

70 हजार लोग जुड़े हैं हैंडीक्राफ्ट कारोबार से

दो हजार से ज्यादा गाइड हैं आगरा में

200 करोड़ से ज्यादा का ट्रेवल एजेंसियों को हो चुका है नुकसान

700 करोड़ का है ट्रेवल एजेंसियों का टर्नओवर

2500 रुपये औसतन प्रतिदिन की आय है एक एप्रूव्ड गाइड की

450 फोटोग्राफर्स हैं स्मारकों में काम करने वाले

1500 रुपये प्रतिदिन की आय है फोटोग्राफरों की

गाइड हो गए बेरोजगार, फोटोग्राफरों का काम ठप

सैलानियों को स्मारकों का दीदार कराकर अपनी रोजी रोटी चलाने वाले गाइड फिलहाल बेरोजगार हो जाएंगे। ताजनगरी में लगभग दो हजार गाइड, कैमरामैन हैं। इनकी रोजी रोटी सैलानियों को स्मारकों में भ्रमण कराने के नाम पर ही चलती है। यहां के एप्रूव्ड गाइड देश के अन्य स्मारकों का भी दीदार कराने के लिए पैकेज लिया करते थे, लेकिन अब उन्हें घर पर ही बैठना पड़ रहा है। कैमरामैनों का काम भी ठप हो गया। इनमें से सैकड़ों लोग तो ऐसे हैं कि जो ताज के बाहर सैलानियों को भ्रमण कराने और उनकी फोटो खींचने के लिए इंतजार किया करते थे। अब उन्हें स्मारक खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है। तब तक उनका सारा कामकाज ठप हो जाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप और बिल क्लिंटन को घुमाने वाले गाइड बेरोजगार

इसी साल ताजमहल का दीदार करने आए अमेरिका के रेष्य्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलेनिया को ताज का दीदार कराने वाले गाइड नितिन सिंह अब बेरोजगार हैं। दिनभर कोई काम नहीं है। अपने मोहल्ले में घूमते रहते हैं। किसी के यहां जा भी नहीं सकते। उनका कहना है कि कोरोना ने सब कुछ खत्म कर दिया है। जिंदगी ठहर सी गई है।

ट्रेवल एजेंसियों का अरबों का नुकसान

दुनियाभर के पर्यटकों को ताजमहल सहित अन्य स्मारकों का दीदार कराने वाले अब घर पर बैठने को मजबूर हैं। ट्रेवल एजेंसियां का काम पूरी तरह से रुक गया है। उनके पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के लिए पैसे नहीं हैं। पिछले तीन माह से अधिक समय से ताजमहल बंद होने के कारण सैलानी आ नहीं रहा है। ऐसे में ट्रेवल एजेंसियों का सारा काम रुक गया है। किसी तरह का कहीं का कोई पैकेज नहीं मिल रहा है। इतने समय में अरबों का नुकसान हो चुका है। इन लोगों का मानना है कि अभी दो से लेकर तीन साल तक इस व्यवसाय को ुबरने में समय लग जाएगा। विदेशी सैलानी तो काफी कम आएगा। सारा व्यापार उसी के सहारे चलता है। भारतय सैलानी भी आएंगे भी तो कम आएंगे। उनके अंदर भी कोरोना की दहशत बैठ चुकी है। ट्रेवल एजेंसी संचालकों का कहना है कि हालात बहुत खराब हैं। हम चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

 

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