फिर कोरोना के खतरनाक मुहाने पर जा पहुंचा आगरा, कंटेनमेंट जोन ने कैसे उड़ाई नींद

Smart News Team, Last updated: 12/07/2020 08:52 AM IST
  • ताजनगरी में कोरोना वायरस और भी तेजी से पांव पसारने लगा है। यही वजह है कि आगरा फिर से कोरोना वायरस के खतरनाक मुहाने पर आ पहुंचा है।
आगरा में कंटेनमेंट जोन की संख्या लगातार बढ़ रही है।

ताजनगरी में कोरोना वायरस और भी तेजी से पांव पसारने लगा है। यही वजह है कि आगरा फिर से कोरोना वायरस के खतरनाक मुहाने पर आ पहुंचा है। आगरा में हर दिन 24 घंटे में 30 से ज्यादा कोविड-19 के मरीज मिल रहे हैं। कोरोना वायरस केसों की संख्या में इजाफा के चलते कंटेनमेंट जोन की भी संख्या बढ़ती जा रही है। इससे अधिकारियों की परेशानी भी बढ़ रही है। इस तरह से शहर में 52 कंटेनमेंट जोन हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लगातार इनकी संख्या बढ़ती जा रही है।

वाहन सीज, केस, 500 जुर्माना.. आगरा में लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों की खैर नहीं

दरअसल, मार्च महीने में ताजनगरी में सिर्प पांच हॉटस्पॉट जोन थे, मगर अप्रैल में ये आंकड़ा 67 तक जा पहुंचा। वहीं, मई महीने में संख्या बढ़कर 89 तक जा पहुंची। जून के पहले सप्ताह में शहर में 41 और ग्रामीण क्षेत्र में 16 मिलाकर कुल 57 कंटेनमेंट जोन रह गए। दूसरे सप्ताह में शहर में 38 और ग्रामीण क्षेत्र में 24 यानी कुल 62 जोन हो गए। जून के तीसरे सप्ताह में शहर में ये संख्या 47 और ग्रामीण क्षेत्र में 20 सहित कुल 67 हो गई। जून के अंत में ये संख्या पूरे जिले में मात्र 54 ही रह गई। जुलाई में ये संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिले में 83 कंटेनमेंट जोन हो गए हैं।

मई में जिस तरह से पूरा शहर ही कंटेनमेंट जोन की चपेट में था, उसी तरह से जुलाई में भी लगातार बढ़ रहे कंटेनमेंट जोन ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। इससे पूरे शहर में हर तरह की व्यवस्थाएं भी करनी पड़ रहीं हैं। कंटेनमेंट जोन ज्यादा होने की स्थिति में शहर के खुलने की संभावना भी कम हो जाती है।

कानपुर से आगरा आया सिपाही पति, घर में दारोगा संग मिली सिपाही पत्नी और फिर…

जुलाई में में कोरोना का खतरा और भी ज्यादा बढ़ गया है। यही वजह है कि एक जुलाई को आगरा में जहां कंटेनमेंट जोन की संख्या 52 थी, वह दस जुलाई तक 83 हो गई। 

कंटेनमेंट जोन की वजह से नहीं हो सका ताज का दीदार

कांद्रीय पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने छह जुलाई को ताजमहल, फतेहपुरसीकरी और आगरा किला को खोले जाने के निर्देश दिए थे, मगर अंतिम फैसला जिले की परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी के ऊपर छोड़ा गया था। उस दौरान भी ताजमहल को खोले जाने को लेकर काफी मंथन हुआ था, मगगर ताजमहल का इलाका कंटेनमेंट और बफर जोन से प्रभावित होने के कारण ये खुलते-खुलते रह गया था।

अन्य खबरें