आगरा

कोरोना कहर के बीच अच्छी खबर: प्लाज्मा थैरेपी से जल्द शुरू होगा कोविड-19 का इलाज

Smart News Team, Last updated: 02/07/2020 09:52 AM IST
  • आगरा में जारी कोरोना कहर के बीच एक अच्छी खबर आई है। एसएन मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी से जल्द ही कोविड का इलाज शुरू किया जाएगा।
प्लाज्मा थैरेपी से जल्द शुरू होगा कोविड का इलाज

आगरा में जारी कोरोना कहर के बीच एक अच्छी खबर आई है। एसएन मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी से जल्द ही कोविड का इलाज शुरू किया जाएगा। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से इसकी अनुमति मिल गई है। अब एसएनएमसी में भी मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा।

एसएन मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी से इलाज नोएडा के एसएसपीएच और पीजीटीआई के सहयोग से किया जाएगा। नोएडा में डा. आरके सिंह ने इसके लिए प्लाज्मा दान किया था। बता दें कि डा. आरके सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंया में तैनात हैं। उन्होंने कोरोना से जंग जीती है। एसएन मेडिकल कॉलेज ने लगभग 30 लोगों से प्लाज्मा दान करने के लिए संपर्क किया था। जिसमें से तीन लोगों ने हामी भरी थी। किसी एक और ने प्लाज्मा दान किया है। डा. आरके सिंह ने बताया कि हर डॉक्टर का फर्ज अपने मरीज को बचाना होता है। एसएनएमसी से फोन आया, मैंने प्लाज्मा दान कर दिया। प्लाज्मा तकनीक कोविड-19 संक्रमण के इलाज में उम्मीद की एक किरण हो सकती है।

क्या है कान्वलेसन्ट प्लाज्मा थेरेपी

कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के रक्त प्लाज्मा से इस रोग से पीड़ित अन्य मरीजों का उपचार किया जाएगा। कोरोना से ठीक हो चुके एक व्यक्ति के खून से 4 कोरोना पीड़ितों का इलाज किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार वे मरीज जो किसी संक्रमण से उबर जाते हैं उनके शरीर में संक्रमण को बेअसर करने वाले प्रतिरोधी एंटीबॉडीज विकसित हो जाते हैं। इन एंटीबॉडीज के जरिए नए मरीज के शरीर में मौजूद वायरस को खत्म किया जाता है।

जब कोई वायरस व्यक्ति पर हमला करता है तो उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज कहे जाने वाले प्रोटीन को विकसित करती है। अगर कोई संक्रमित व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज विकसित करता है तो वह वायरस से होने वाली बीमारियों से उबर सकता है।

14 दिन बाद ही लिया जा सकता है प्लाज्मा

किसी मरीज के शरीर से प्लाज्मा (एंटीबॉडीज) उसके ठीक होने के 14 दिन बाद ही लिया जा सकता है और उस रोगी का कोरोना टेस्ट एक बार नहीं, बल्कि दो बार किया जाएगा। इतना ही नहीं ठीक हो चुके मरीज का एलिजा टेस्ट भी किया जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि उसके शरीर में एंटीबॉडीज की मात्रा कितनी है। इसके अलावा प्लाज्मा देने वाले व्यक्ति की पूरी जांच की जाती है कि कहीं उसे कोई और बीमारी तो नहीं है। कोरोना से ठीक हुए मरीज से चार लोगों को इलाज संभव है।

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