आगरा

जानें कैसे आगरा में बाईपेप मशीनों ने बचाई कई कोरोना मरीजों की जान

Smart News Team, Last updated: 26/06/2020 05:42 PM IST
  • आगरा में कोरोना वायरस का कहर जारी है। इस बीच एक अच्छी खबर यह भी है कि एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती गंभीर मरीजों की बाईपेप मशीनों ने जान बचा ली।
प्रतीकात्मक तस्वीर

आगरा में कोरोना वायरस का कहर जारी है। इस बीच एक अच्छी खबर यह भी है कि एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती गंभीर मरीजों की बाईपेप मशीनों ने जान बचा ली। इन मशीनों के कारण कोरोना के कई मरीज वेंटिलेटर पर जाने से बच गए। 40 फीसदी ऑक्सीजन रहने से डॉक्टरों के हाथ पांव तो फूले, मगर इन मशीनों की मदद से मरीजों को 99 फीसदी ऑक्सीजन देकर उन्हें बचा लिया गया। एसएनएमसी में अभी चार मशीनों से इलाज चल रहा है। कुछ मशीनें और मंगाई जा रहीं हैं।

हिन्दुस्तान ने उठाया था मुद्दा

आपके अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने इन मशीनों की जरूरत पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया था। एसएनएमसी के पास मात्र दो मशीनें ही थीं। बाद में समाजसेवियों ने दो मशीन मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध कराईं। इससे मरीजों के इलाज में कुछ आसानी हो गई। एसएनएमसी के कोविड-19 अस्पताल में आए मरीजों में 75 फीसदी को सांस की बीमारी थी। उनमें ऑक्सीजन की मात्रा 40 फीसदी तक ही रह गई। जो खतरनाक स्थिति मानी जाती है।

ऑक्सीजन की मात्रा कम होने पर मरीज तेज-तेज सांस लेता है। ऐसे में उनके फेफड़े फटने का डर रहता है। तब मरीज को वेंटिलेटर पर ले जाने का विकल्प बचता है। एसएनएमसी के डॉक्टरों ने मरीजों को वेंटिलेटर पर रखने के स्थान पर बाईपेप मशीनों की सहायता ली। इससे मरीजों को जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन भी मिल गई और वह स्वस्थ भी हो गए।

पहले होती है जांच

बाईपेप मशीन पर रखने से पहले मरीज की गहनता से जांच होती है। कोविड-19 अधीक्षक डॉ. प्रशांत गुप्ता, डॉ. अनामिका मिश्रा, डॉ. अपूर्व मित्तल ने बताया कि वेंटिलेटर और अन्य जीवन रक्षक उपकरण चलाने में एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की खासी भूमिका होती है। सभी चिकित्सक इसी काम में लगे हुए हैं।

एसएनएमसी के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कहा कि क्लिनिकल कमेटी की रोज मीटिंग लेता हूं। सभी चिकित्सकों के साथ गंभीर मरीजों को लेकर चर्चा होती है। उनके इलाज के संबंध में विस्तार से मंथन किया जाता है। उसके बाद उसी के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

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