तीन दिन जिंदगी से लड़कर हार गईं डॉ दीप्ति अग्रवाल, सबकुछ किया बेटी के नाम

Smart News Team, Last updated: 06/08/2020 12:44 PM IST
  • आगरा के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एससी अग्रवाल की बहू डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल की मृत्यु हो गई है. उन्होंने 3 अगस्त को आत्महत्या की कोशिश की थी. तीन दिन से उनका इलाज चल रहा था. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
तीन दिन जिंदगी से लड़ती रही डॉ दीप्ति अग्रवाल ने तोड़ा दम, बेटी ने नाम किया सब

आगरा के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एससी अग्रवाल की बहु डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल की गुरुवार को मौत हो गई. तीन दिन से दीप्ति का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि उनका दिल तो धड़क रहा था मगर दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था. वह कोमा में थीं. गुरुवार की सुबह फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पीटल में उन्होंने दम तोड़ दिया. इससे पहले उनका इलाज अपने ही अस्पताल में किया जा रहा था जहां से उन्हें फरीदाबाद रेफर किया गया था. ताजगंज पुलिस ने उनकी मौत की पुष्टि की है. शव का पोस्टमार्टम फरीदाबाद में ही होगा. 

बता दें कि तीन अगस्त की शाम विभव नगर स्थित विभव वैली व्यू अपार्टमेंट में डॉक्टर सुमित अग्रवाल की पत्नी डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल फंदे पर लटकी मिली थीं. उनके पति ने दरवाजा तोड़कर कमरे में जाने पर उन्हें पंखे से लटके पाया था. उन्हें फंदे से उतारकर वो अपने अस्पताल ले गए थे. शुरुआत से ही उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी. पुलिस को भी मामले की जानकारी दी गई थी. 

डॉ दीप्ति की हालत गंभीर, पुलिस के हाथ लगे सुसाइड नोट में बेटी का जिक्र

पुलिस ने 4 अगस्त को फ्लैट से एक सुसाइड नोट बरामद किया था. हालांकि उसमें ये साफ नहीं था कि ऐसा कदम दीप्ति ने क्यों उठाया था. उसमें उन्होंने अपनी बेटी के लिए चिंता जताई थी और पति से उसका ध्यान रखने के लिए कहा था. ये उनकी गोद ली हुई बेटी है. साथ ही उन्होंने कहा था कि वो अपना सब बेटी को दे रही हैं. पुलिस ने बताया कि मामले में फिलहाल कोई तहरीर नहीं मिली है. डॉक्टर दीप्ति की शादी को सात साल नहीं हुए थे. इसलिए मायका पक्ष जो तहरीर देगा उस पर मुकदमा कायम करके विवेचना की जाएगी. 

आगरा: महिला डॉक्टर ने की आत्महत्या की कोशिश, फंदे पर मिली लटकी, हालात गंभीर

सुसाइड नोट को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा. वहां से हैंड राइडिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट ली जाएगी. बताया गया था कि आत्महत्या से कुछ घंटे पहले तक वह बिल्कुल ठीक थीं. वो बेहोशी की डॉक्टर थीं और आत्महत्या से पहले वो हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर डीवी शर्मा के नर्सिंग होम में ऑपरेशन के दौरान एक मरीज को एनेस्थीसिया देकर आईं थीं. 

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