आगरा

आगरा का हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव…पुलिस के लिए सिर्फ नाम ही काफी, ऐसा था उसका रौब

Smart News Team, Last updated: 18/07/2020 07:57 PM IST
  • कानपुर का विकास दुबे चौबेपुर थाने को अपनी जेब में रखता था। आगरा में भी ऐसे बदमाशों की कमी नहीं है। समर्पण करके जेल गया मोनू यादव भी एत्मादुद्दौला थाने को सेट रखता था।
Gangster Monu Yadav

कानपुर का विकास दुबे चौबेपुर थाने को अपनी जेब में रखता था। आगरा में भी ऐसे बदमाशों की कमी नहीं है। समर्पण करके जेल गया मोनू यादव भी एत्मादुद्दौला थाने को सेट रखता था। जांच की जाए तो कई पुलिस कर्मी बेनकाब हो जाएंगे। तमाम मुकदमे होने के बावजूद वह खुलेआम पुलिस कर्मियों से मिलता था। थाना पुलिस ही नहीं जेल के बंदी रक्षक भी उसके घर आया करते थे। वह उन्हें भी पैसा दिया करता था। जिस अंदाज में वह सपा सरकार में अपना नेटवर्क चला रहा था उसी अंदाज में भाजपा सरकार में भी उसका काम चल रहा था। भाजपा नेता भी उसने सेट कर लिए थे।

कानपुर कांड असर: SP सरकार में बोला करती थी तूती,थाने पर पीता था चाय, किया सरेंडर

नगला रामबल के आस-पास के इलाके में मोनू यादव का आतंक है। इकहरे बदन के मोनू का हाथ खुला हुआ है। वह छूटते ही फायर करता है। इसलिए उससे हर कोई घबराता है। इतनी बार जेल जा चुका है कि पेशेवर बदमाशों से भी उसके संबंध हैं। अवैध काम बिना किसी विवाद के कैसे करने हैं यह वह अच्छे से सीख चुका है। जमीन पर कब्जा हो या नाल का जुआ। वह बिना पुलिस की मर्जी के कुछ नहीं करता। पुलिस कहती है तभी अपना काम करता है। पुलिस जब इशारा कर दिया करती थी काम बंद कर देता था। सूत्रों की मानें तो पुलिस से दोस्ती के कारण की उसका खौफ बना हुआ था। हर कोई यह जान चुका था कि पुलिस उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं करेगी। ऐसा नहीं कि इससे पहले कभी उसके खिलाफ किसी ने मुकदमा नहीं लिखाया। जिसने भी मुकदमा लिखाया मोनू और उसके साथियों ने मुकदमे के बाद उसे फिर से पीटा। पुलिस ने कुछ नहीं किया।

एत्मादुद्दौला समेत कई थानों में हैं मोनू के खबरी

सिर्फ एत्मादुद्दौला थाने में ही नहीं शहर के कई थानों में उसके खबरी हैं। उसकी दोस्ती सिपाहियों से ज्यादा है। सिपाही ही अपने ऊपर वालों से उसकी पहचान कराया करते हैं। नगला रामबल का जुए का अड्डा तभी बंद होता था जब एसएसपी की नजर टेढ़ी हो जाती थी। पुलिस खुद फोन करके उससे कहा करती थी कि अब जुआ नहीं कराए। एसएसपी अपनी टीम भेज सकते हैं। जुआ का अड्डा नहीं चलने पर भी वह पुलिस को महीनेदारी दिया करता था। ताकि मित्रता कायम रहे।

हत्या में गया था पहली बार जेल

मोनू यादव वर्ष 2005 में हाईस्कूल में पढ़ता था। तब हत्या के मुकदमे वह जेल गया था। उस समय भी पुलिस ने उसे नहीं पकड़ा था। वह समर्पण करके जेल गया था। इसके बाद लंगड़े की चौकी पर सराफ की हत्या और लूट के मुकदमे में उसका नाम आया था। इस मुकदमे में भी उसने समर्पण किया था।

मास्क पहनकर गिरफ्तारी से बच गया हत्यारोपी, कोर्ट के बाहर इंतजार करती रही पुलिस

पुलिस कैसे करती थी उसकी मदद

-जमीन पर कब्जा करने जाए तो सूचना पर नहीं पहुंचा करती थी। थाने से चलने से पहले उसे सूचना हो जाती थी।

-थाने वाले अधिकारियों को यह बता दिया करते थे कि सूचना फर्जी थी। अधिकारी कभी मौके पर नहीं जाते थे।

-थाने में कोई भी प्रार्थना पत्र आते ही उसे खबर दे दी जाती थी।

-कोर्ट में किसी भी मुकदमे में कभी उसकी जमानत का विरोध नहीं करती थी।

-जब भी उसके खिलाफ माहौल बनता था उसे शहर से भगा दिया करती थी।

एसएसपी ने लगाई थी क्राइम ब्रांच, वो भी हो गई फेल

थाना पुलिस मोनू यादव के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी। मोनू यादव के कई परिचित पुलिस कर्मी थाने में तैनात है। वह पीछे के रास्ते से थाने में आता जाता है। यह जानकारी एसएसपी बबलू कुमार को हो गई थी। मोनू यादव पर शिकंजा कसने के लिए उन्होंने क्राइम ब्रांच की टीम को लगाया था। क्राइम ब्रांच भी मोनू तक पहुंचती इससे पहले उसने कोर्ट में समर्पण कर दिया।

अन्य खबरें