कोरोना क्या मारता.. लॉकडाउन से ही हार गया गरीब, कचौड़ी नहीं बिकी तो लगा ली फांसी

Smart News Team, Last updated: 11/06/2020 07:51 PM IST
  • पिता की मौत के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी भोला के सिर पर थी। कोरोना लॉकडाउन में भोला ने अहमदाबाद से आगरा में अपने गांव वापस लौटकर कचौड़ी बेचनी शुरू की लेकिन काम नहीं चल पाया। मानसिक तनाव में आकर भोला ने फांसी लगाकर जान दे दी।
लॉकडाउन में नहीं बिक रहीं थी कचौड़ी, गरीबी से तंग आकर कर लिया सुसाइड। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आगरा. ताजनगरी आगरा जिले के पिढौरा थाना क्षेत्र में कोविड-19 लॉकडाउन एक गरीब युवक की मौत की वजह बन गया। दरअसल मृतक भोला उर्फ जय प्रकाश पहले गुजरात के अहमदाबाद में हलवाई का कारिगर था जो लॉकडाउन में अपने गांव वापस लौट आया। यहां पैसा कमाने के लिए उसने कचौड़ी बेचनी शुरू की लेकिन कोरोना काल में ज्यादा बिक्री नहीं हो पाई जिस वजह से भोला तनाव में आ गया और अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

मिली जानकारी के अनुसार, जिले के पिढौरा गांव निवासी भोला उर्फ जयप्रकाश (32) पुत्र सत्येंद्र सिंह लॉकडाउन से पहले अहमदाबाद में एक हलवाई का कारीगर था। कोरोना के प्रकोप के बाद जब लॉकडाउन लगाया गया तो भोला भी मार्च के अंतिम सप्ताह में अहमदाबाद से वह गांव आ गया। हालांकि, गांव आकर भोला ने काफी दिनों कोई काम मिलने के प्रयास किए लेकिन कोई काम नहीं मिला। इस वजह से उसका परिवार आर्थिक तंगी से घिर गया।

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साइकिल पर फेरी लगाकर बेचनी शुरू की थीं कचौड़़ी

लॉकडाउन में कुछ ढील हुई तो पेशे से हलवाई कारीगर भोला ने कचौड़ी बेचने की योजना बनाई. भोला ने कचौड़़ियों को साइकिल पर फेरी लगाकर बेचना शुरू कर दिया। भोला का काम तो शुरू हो गया लेकिन अच्छी बिक्री नहीं हुई जिस वजह से रोजाना काफी संख्या में कचौड़ी बचकर खराब होने लगी। इस सबसे तंग होकर भोला तनाव में आ गया और मंगलवार रात फांसी लगा ली।

भोला की खबर लगते ही उसके परिवार वाले आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिनाहट लेकर पहुंचे। वहां से उसे आगरा रैफर किया गया। इलाज के दौरान एसएन मेडिकल कॉलेज में बुधवार सुबह भोला जिंदगी से जंग हार गया।

पिता की मौत के बाद भोला पर थी पूरे परिवार की जिम्मेदारी

करीब करीब दस साल पहले एक हादसे में भोला के पिता की मौत हो गई थी। मां मल्ला देवी, पत्नी गीता देवी और तीन बच्चों का भार उसके कंधे पर था। गांव में उसके पास सिर्फ दो बीघा खेत है। अकेले कमाने वाले की मौत से परिवार के भरण-पोषण को लेकर सवाल खड़ा हो गया है।

 

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