आगरा: स्मार्ट सिटी योजना पर फिरा पानी, बंदरों ने तोड़ डाले 20 लाख के CCTV कैमरे

Smart News Team, Last updated: Sun, 27th Sep 2020, 12:10 AM IST
आगरा में बंदरों के आतंक ने सरकार की स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट योजना पर पानी फेर दिया है. बंदरों ने खंभों और आधुनिक महंगे कैमरा को काफी नुकसान पहुंचाया है. अभी तक करीब 20 लाख रुपए से अधिक के कैमरों को बंदरों ने नुकसान पहुंचा है.
बंदरों ने तोड़ा चौराहे पर लगा सीसीटीवी कैमरा.

आगरा. केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में क्राइम को कंट्रोल करने और ट्रैफिक संचालन के लिए सीसीटीवी कैमरा का जाल बिछाया जा रहा है. लेकिन शहर के अंदरूनी इलाकों में बंदर इन कैमरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. बंदरों ने अभी तक खंभे और अत्याधुनिक महंगे कैमरों को तोड़ डाला है. इन कैमरों की कीमत एक- एक लाख से भी अधिक है.

आपको बता दें कि आगरा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में करीबन 282 करोड़ रुपए की लागत से कमांड एंड कंट्रोल रूम का निर्माण किया गया. इसके बाद पूरे शहर के प्रमुख चौराहों सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में 1226 कैमरे लगाए जा रहे हैं. शहर में अभी तक महात्मा गांधी मार्ग और वीआईपी मार्ग (खेरिया एयरपोर्ट से ताजमहल तक) कैमरे लगाए जा चुके हैं. इसके बाद शहर के अंदरूनी इलाकों में कैमरे लगाने का काम शुरू किया गया है. जिनमें करीब 50 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं.

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लेकिन बंदरों ने लगाए गए इन कैमरों को तोड़ डाला है. पीपल मंडी, गुदड़ी मसूर खां, रावत पाड़ा, दरेसी समेत कई चौराहों पर लगे कैमरों को नुकसान पहुंचाया है.इसके अलावा रावत पाड़ा, कचहरी घाट, नामनेर क्षेत्र में बंदरों के झुंड ने कई खंभों को भी तोड़ डाला है.

इन इलाकों में बंदरों का आतंक ऐसा है कि बंदर कहीं कैमरों का डायरेक्शन बदल देते हैं तो कहीं इनको तोड़ कर चले जाते हैं. 360 डिग्री पर चारों दिशाओं में घूमने वाले कैमरों को भी बंदरों ने काफी नुकसान पहुंचाया है. गौरतलब है कि अभी तक बंदर तकरीबन 20 लाख से अधिक के खंभों और कैमरों को नुकसान पहुंचा चुके हैं.नगर आयुक्त ने खेल टीकाराम फुंडे ने स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारियों को कैमरे की सुरक्षा के उपाय करने के निर्देश दिए हैं.

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शहर में बंदरों के उत्पात से निजात दिलाने के लिए प्रशासन नहीं बीते सालों में कई योजनाएं चलाई हैं लेकिन फिर भी बंदरों की संख्या शहर में कम नहीं हुई है 2005- 06 में बंदरों की गिनती करवा कर उन्हें पीट के जंगलों में भेजा जाना क्या हुआ लेकिन यह कोशिश भी सफल नहीं हुई. इसके बाद बंदरों को पीलीभीत के जंगल में भेजने की योजना बनी लेकिन इसमें वाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट के प्रावधानों के कारण इस योजना पर भी बात नहीं बनी. 2014- 15 मई बंदरों के नसबंदी की स्कीम तैयार की गई. इसके लिए विकास प्राधिकरण की ओर से एक संस्था को 2.50 करोड़ रुपये भी दिलाये गए लेकिन उसमें भी 500 बंदरों की ही नसबंदी हो सकी.

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