पक्षी स्टार्क फैमिली की चार प्रजाति से गुलजार हुआ फतहपुर सीकरी का जोधपुर झाल

Smart News Team, Last updated: 08/08/2020 01:37 PM IST
  • आगरा के फतेहपुर सीकरी में स्थित जोधपुर झाल में अक्टूबर से फरवरी तक हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी आते हैं. हर समय हजारों की संख्या में देशी पक्षी दिख जाएंगे.
पक्षी स्टार्क फैमिली की चार प्रजाति से गुलजार हुआ फतहपुर सीकरी का जोधपुर झाल

आगरा. अनुज परमार

स्वच्छ व कम गहरे पानी की झील, घास का मैदान, छह से आठ नहरों का जाल, आसपास कृषि भूमि और जंगल के बड़े-बड़े पेड़ों ने स्टार्क फैमिली की चार प्रजातियों का मन मोह लिया है. चार प्रजातियों से झाल गुलज़ार है. इन पक्षियों के प्रजजन के लिए ये स्थान अनकूल है. पक्षी विशेषज्ञों का दावा है कि झील का संरक्षण किया जाए तो पक्षियों की संख्या में इजाफा हो जाएगा.

जोधपुर झाल से आगरा में नहरों की निकासी हो रही है. यहां अक्तूबर से फरवरी तक हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी आते हैं. देशी हर समय हजारों की संख्या में दिख जाएंगे. मगर, वर्तमान में स्टार्क फैमिली की चार प्रजातियों को यहां का हेविटाट भा गया है. पेन्टेड स्टार्क, ब्लैक नेक्ड स्टार्क, बूली नेक्ड स्टार्क और ओपन बिल स्टार्क जैसे रंग बिरंगे पक्षियों की मौजूदगी से जोधपुर झाल भी इनके रंग में रंग गया है. भरतपुर और कीठम के अलावा ये प्रजाति पहली बार यहां दिख रही हैं.

देश में पाई जाती है स्टार्क फैमिली की आठ प्रजातियां

पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह के मुताबिक पूरे विश्व में स्टार्क फैमिली की 20 प्रजातियां पाई जाती है. इसमें से देश में आठ प्रजातियां मौजूद हैं. स्टार्क की ये आठ प्रजातियां ग्रेटर एडजुटेंट, लेसर एडजुटेंट, एशियन ओपनबिल, बूली नेक्ड स्टार्क, ब्लैक नेक्ड स्टार्क, पेन्टेड स्टार्क, व्हाइट स्टार्क एवं ब्लैक स्टार्क प्रजातियां भारतीय उपमहाद्वीप एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाती है. इन्हीं आठ प्रजातियों में से चार प्रजातियां जोधपुर झाल में देखी जा रही हैं.

जोधपुर झाल का संरक्षण हो तो बढ जाएगी स्टार्क की जनसंख्या

बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी के पक्षी विशेषज्ञों का दावा है कि जोधपुर झाल का हेविटाट स्टार्क फैमिली की इन चार प्रजातियों के अनुकूल है. यह चारों प्रजातियां पूरे साल यहां दिखती हैं. उन्होंने बताया कि यदि झील के बीच में कुछ आइलैंड बनाकर देशी बबूल के पेड़ लगा दिये जाएं तो पेन्टेड स्टार्क की संख्या में वृद्धि हो सकती है और इनके प्रजनन स्थलों में भी वृद्धि हो जाएगी .

इन चार प्रजाति की ये है खूबी

1. पेन्टेड स्टार्क: इसे हिंदी में चित्रित सारस (माइक्टेरिया ल्यूकोसेफला) कहते हैं. ये समूह बनाकर रहते हैं. सदैव अधिक संख्या में दिखाई देते हैं. भरतपुर के घना में इनकी काॅलोनी आकर्षण का केंद्र है. ये बड़े आकार, लंबी नुकीली और पीले रंग की चोंच, एडल्ट पक्षी के पंखों के पिछले भाग का रंग गुलाबी जैसे ब्रुश से रंग कर दिया हो इसकी प्रमुख पहचान है. 

पेन्टेड स्टार्क की जनसंख्या घटती हुई और संकट के निकट है . इसका आकार 36-40 इंच व बजन 2-3 किलो ग्राम होता है. यह स्थानीय माइग्रेशन करता है. नर आकार में मादा से बडा होता है. इसका भोजन मुख्यतः मछली, मेंढक और घोंघा सहित अन्य जलीय जीव होते हैं. इनका प्रजनन काल अगस्त से मार्च तक रहता है. मादा दो से चार अंडे देती है.

2 ब्लैक नेक्ड स्टार्क: काली गर्दन वाले सारस (एफिफ़ोरहाइन्चस एशियाटिकस) यह भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है. काली नुकीली चोंच, लंबी काले रंग की गर्दन, सफेद रंग का उदर और पंख नीचे के छोर पर काले रंग के, आंखो पर पीले रंग का घेरा इसकी प्रमुख पहचान है. 

आकार मे यह 51 से 59 इंच और वजन 3 से 4 किलोग्राम होता है. प्रजनन काल मानसून के सितंबर से नवंबर तक होता है. अंडों की संख्या एक से पांच तक होती है. यह कूट , लिटिल ग्रीव, शोवलर, जेकाना के साथ मछली, घोंघा, मेंढक आदि जलीय जीवो का भोजन करता है .

3. बूली नेक्ड स्टार्क: ऊनी गर्दन वाले सारस (सिसोनिया एपिस्कोपस) यह भारत से इंडोनेशिया तक पाया जाता है. इसकी जनसंख्या संकटग्रस्त है . इसकी चोंच और पंखों का रंग क्रिम्सन रेड या रेड वाइन जैसा होता है. गर्दन का रंग सफेद और रुई की तरह दिखने वाली होती है. सर पर मेहरून रंग की क्रस्ट होती है. आकार में यह 75 से 92 सेंटीमीटर तक होता है. जलीय जीवों के साथ सरीसृपों व कीड़े मकोड़े इसका भोजन होते हैं. मादा दो से पांच अंडे देती है.

4. एशियाई ओपनबिल स्टॉर्क: (एनास्टोमस ऑसिटिटंस) इसे घोंघिल भी कहते हैं. इनकी चोंच के मध्य खाली स्थान होने के कारण इन्हें ओपनबिल कहा जाता है. घोंघिल एक बड़े आकार का पक्षी है जो पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है. यह पक्षी, थाइलैंड, चीन, वियतनाम, रूस आदि देशों में भी मौजूद हैं. लम्बी गर्दन व टांगे तथा चोंच के मध्य खाली स्थान इसकी मुख्य पहचान हैं. इसके पंख काले-सफ़ेद रंग के होते हैं जो प्रजनन के समय अत्यधिक चमकीले हो जाते है और टांगें गुलाबी रंग की हो जाती है. 

प्रजनन के उपरान्त इनका रंग हल्का पड़ जाता है और गन्दा सिलेटी रंग हो जाता है. किन्तु प्रजनन काल के बाद फिर से चमकीला हो जाता है. इनके पंख सफेद व काले रंग के और पैर लाल रंग के होते हैं. यह संकटग्रस्त पक्षियों की श्रेणी में रखा गया है. ओपनबिल स्टार्क का मुख्य भोजन घोंघा, मछली, केंचुऐ व अन्य छोटे जलीय जन्तु हैं. ये घोसले मुख्यतः इमली, बरगद, पीपल, बबूल, बांस व यूकेलिप्टस के पेड़ों पर बनाते हैं.

किसान मित्र है एवं परजीवी संक्रमण को रोकता है ओपनबिल स्टार्क

ओपनबिल स्टार्क प्लेटीहेल्मिन्थस संघ के परजीवियों से होने वाली बीमारियों को नियन्त्रित करता है इन परजीवियों का वाहक घोंघा (मोलस्क) होता है जिसके द्वारा खेतों में काम करने वाले मनुष्यों और जलाशयों व चरागाहों में चरने व पानी पीने वाले पशुओं को यह परजीवी संक्रमित कर देता है. इससे मनुष्य व पालतू जानवरों में बुखार, यकृत की बीमारी पित्ताशय की पथरी, स्नोफीलियां, डायरिया, डिसेन्ट्री आदि पेट से जुड़ी बीमारी हो जाती हैं. इनका भोजन घोंघा होता है अतः परजीवी अपना जीवनचक्र पूरा नहीं कर पाते और इनसे फैलने वाला संक्रमण रूक जाता है. इनके मल में खेती के लिए लाभकारी तत्व होते हैं. जैसे फास्फोरस, नाइट्रोजन व कार्बनिक तत्व.

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