मशीन एक, तरीका एक मगर रिपोर्ट में झोल: सरकारी और निजी अस्पतालों में अंतर क्यों?

Smart News Team, Last updated: 07/07/2020 09:19 PM IST
  • सरकारी सिस्टम दुरुस्त है या निजी लैब्रोरेट्री में किसी तरह की खामी है। निजी सिस्टम में गड़बड़ी है तो आईसीएमआर जैसी बड़ी संस्था इनमें अधिक से अधिक जांच कराने की सिफारिश क्यों करती है।
आगरा में सरकारी अस्पताल और निजी पैथोलाजी की पॉजिटिव रिपोर्ट में भारी अंतर।

आगरा। वरिष्ठ संवाददाता

एक ही मशीन है। नमूने लेने का तरीका भी वही है। जांच की प्रक्रिया भी समान है। फिर नतीजों में इतना अंतर क्यों है। सरकारी जांच रिपोर्ट में कोविड पाजीटिव मरीजों का प्रतिशत बहुत कम है। यही जांच जब निजी लैब में कराई जाती हैं तो प्रतिशत बढ़ जाता है। आखिर यह खेल क्या है। कहीं न कहीं, कुछ न कुछ गड़बड़ तो जरूर है।

शुरुआत सरकारी आंकड़ों से करते हैं। आगरा जिले में मंगलवार सुबह तक 26322 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें कुल संक्रमितों की संख्या 1306 आई है। यानी सरकारी जांच रिपोर्ट के मुताबिक जिले में अब तक इतने लोगों को कोविड-19 संक्रमण हो चुका है। अब इसका प्रतिशत लगाते हैं। यह प्रतिशत 4.96 है। यानी 100 में से लगभग पांच लोग संक्रमित पाए गए हैं। 

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अब जरा निजी पैथोलाजी लैब की बात भी कर लेते हैं। प्रदेश में एकमात्र बड़ी लैब की आगरा शाखा में अब तक 1110 नमूने लिए जा चुके हैं। इनमें से 91 लोगों की रिपोर्ट पाजीटिव आई है। इस हिसाब से निजी लैब की रिपोर्ट के मुताबिक आगरा में संक्रमितों का प्रतिशत 8.19 है। यानि पाजीटिव होने की दर सरकारी जांच रिपोर्ट से लगभग दोगुनी पाई गई है। इस लैबोरेट्री के अलावा दो और लैब को जांच की अनुमति दी गई है। उनका प्रतिशत भी आठ से 11 के बीच पाया गया है। 

यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सरकारी सिस्टम दुरुस्त है या निजी लैब्रोरेट्री में किसी तरह की खामी है। निजी सिस्टम में गड़बड़ी है तो आईसीएमआर जैसी बड़ी संस्था इनमें अधिक से अधिक जांच कराने की सिफारिश क्यों करती है। तमाम स्वास्थ्य एजेंसियां भी निजी लैब को जांच की छूट देने के पक्ष में हैं। शासन ने भी इसी मंशा के साथ निजी लैब्रोरेट्री को जांच की अनुमति दी हैं। लेकिन रिपोर्ट में भारी अंतर सवाल खड़े करता है।

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आर्टी पीसीआर से होती है जांच

सरकारी अस्पतालों की लैब हो या निजी, दोनों में आर्टी पीसीआर मशीन से ही जांच होती हैं। नमूना लेने से लेकर मशीन से जांच की रिपोर्ट आने तक की एक ही प्रक्रिया है। दोनों में ही प्रशिक्षित तकनीशियन होते हैं। कई निजी लैब सरकारी अस्पतालों से अधिक आधुनिक हैं। मंहगी मशीनें और इन्फ्रास्ट्रक्चर भी कई गुना बेहतर है। ऐसे में इन पर शक करने की भी कोई ठोस वजह नजर नहीं आती है।

ट्रायल के बाद मिलती है अनुमति

आपदा या महामारी के समय निजी लैबोरेट्री को जांच की अनुमति यूं ही नहीं मिलती। इसके लिए सरकारी एजेंसियां बाकायदा ट्रायल लेती हैं। उनका इन्फ्रास्ट्रक्चर देखा जाता है। विशेषज्ञ और लैब तकनीशियनों की जानकारी ली जाती है। भौतिक परीक्षण भी किया जाता है। इसके बाद जांच आदि की अनुमति दी जाती है। शुरूआती नमूनों का भी कई दिन तक ट्रायल होता है, क्रासचेक किए जाते हैं।

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सरकारी आंकड़े

कुल नमूने:- 26322

कुल संक्रमित:- 1306

इनका प्रतिशत:- 4.96

प्राइवेट आंकड़े

कुल नमूने:- 1110

कुल संक्रमित:- 91

इनका प्रतिशत:- 8.19

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