कोरोना काल में पैसे-पैसे को मोहताज आगरा के जूता कारीगर, हफ्ते की कमाई 150 रुपये

Smart News Team, Last updated: 17/07/2020 09:00 PM IST
  • कोरोना लॉकडाउन की वजह से आगरा के जूता कारीगर सड़कों पर आने की कगार पर हैं।
पैसे-पैसे को मोहताज आगरा के जूता कारीगर

आगरा. ताजनगरी आगरा में कोरोना लॉकडाउन की वजह से जूतों का कारोबार पूरी तरह बंद है जिसका सीधा असर छोटे कारीगरों पर पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि अब उनके लिए दूध खरीदना भी महंगा हो गया है। जिले में अनलॉक 2 की प्रक्रिया चल रही है लेकिन इसके बावजूद सप्ताह में सिर्फ दो दिन कारखाने खुल रहे हैं। इस हिसाब से जूता मजदूर खर्चे लायक भी नहीं कमा पा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यही हालत दीवाली तक हो सकती है।

गौरतलब है कि ताजनगरी में जूते का काफी बड़ा कारोबार है। दूसरे प्रदेशों से भी मजदूर आगरा के जूते कारखानों में काम करने आते हैं। काफी संख्या में मजदूर कोरोना काल में लौट गए लेकिन जो स्थानीय हैं या रह गए उन्हें अब संकटों से जूझना पड़ रहा है। कारखानों में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर किराए के मकानों में रहते हैं।

शादी का झांसा देकर महिला अधिकारी का यौन शोषण कर रहा था दारोगा, निलंबित

आगरा के एक जूता कारीगर का कहना है कि सप्ताह में मात्र दो दिन के लिए काम करने बुलाया जाता है। उसमें सिर्फ डेढ़ सौ से दो सौ रुपए ही कमा पा रहे हैं। पहले चार से पांच हजार तक सप्ताह में कमा लेते थे। अब हालात खराब हैं। इतने कम रुपयों में कुछ भी नहीं हो पाता।घर में राशन तो दूर दूध तक के रुपए पूरे नहीं पड़ पाते। अगर यही हालात रहे तो कारीगर सड़क पर आ जाएंगे।

आगरा: जब साइंस की ऑनलाइन क्लास में चलने लगी ब्लू फिल्म, मच गया हड़कंप

आखिर गरीब मजदूर कब तक घर का किराया नहीं देंगे। अब ब्याज पर रुपया लेने को मजबूर हैं। सभी को इंतजार है कि कारखाने पूरी तरह खुलें तो अपना कर्जा उतारने की कोशिश करें। माना जा रहा है कि मंदी का यह दौर दीवाली तक चल सकता है। जुलाई अगस्त में हर साल ही मंदी का दौर रहता है। इस बार कोरोना का भी मजबूत असर है।

अन्य खबरें