आगरा : दिवाली पर बढ़ा उल्लुओं की तस्करी का खतरा, वन विभाग ने बढ़ाई चौकसी

Smart News Team, Last updated: Thu, 12th Nov 2020, 7:28 PM IST
  • उल्लुओं की तस्करी को लेकर आगरा व आसपास के क्षेत्र में वन विभाग ने चौकसी बढ़ा दी है. खासकर चंबल सेंक्च्यूअरी क्षेत्र में उल्लुओं की तस्करी करने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
आगरा में दिवाली पर उल्लुओं की तस्करी का खतरा लगातार बढ़ रहा है

आगरा: दिवाली का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे ही उल्लुओं की तस्करी का खतरा बढ़ता जा रहा है. उल्लुओं की तस्करी को लेकर आगरा व आसपास के क्षेत्र में वन विभाग ने चौकसी बढ़ा दी है. खासकर चंबल सेंक्च्यूअरी क्षेत्र में उल्लुओं की तस्करी करने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है. दरअसल, अंधविश्वास के कारण बीते साल उल्लुओं की बलि चढ़ाने से जुड़े कई मामले सामे आए थे. बताया जा रहा है कि बलि चढ़ाने के लिए चंबल की कंदराओं में उल्लू की तलाश के लिए तस्कर सक्रिय हो जाते हैं और इस साल भी तस्करी के लिए उनके सक्रिय होने की आशंका है.

उल्लू की तस्करी को रोकने के लिए बीहड पट्टी के ग्रामीणों को जागरुक करने के साथ-साथ वन विभाग द्वारा तस्करों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है. तस्करों को चेतावनी दी गई है कि उल्लू पकड़ने वाले को जेल भी भेज दिया जाएगा. बता दें कि हर साल दिवाली पर तांत्रिक तंत्र मंत्र में उल्लू की बलि से सम्पन्नता का अंधविश्वास फैलाते हैं. इसके लिए वजन, आकार, रंग, नाखून पंख के आधार पर उल्लू की कीमतें भी दी जाती हैं. ऐसे में लाखों में बिकने वाले उल्लू की तस्करी के लिए चंबल क्षेत्र में हर साल तस्कर सक्रिय होते हैं. वहीं, दूसरी और वन अधिनियम के तहत उल्लू संरक्षित प्रजाति है, जिसका शिकार करना दंडनीय अपराध है.

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इस बारे में बात करते हुए रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने कहा कि चंबल के पुराने पेड़ों और कंदराओं में मौजूद उल्लू की तलाश में तस्करों के आने की संभावना होती है, जिसे लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है. वहीं, जिस क्षेत्र में उल्लू अधिक पाए जाते हैं, वहां निगरानी भी बढ़ा दी गई है. इसके साथ ही राजस्थान से सटे रेहा से लेकर इटावा से लगे उदयपुर खुर्द तक बीहड के ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है.

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