भ्रष्टाचार के आरोपों में आगरा यूनिवर्सिटी VC हटाए गए, राज्यपाल के जांच के आदेश

Smart News Team, Last updated: Mon, 5th Jul 2021, 9:38 PM IST
  • आगरा की डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप के चलते उन्हें पद से हटायागया है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुलपति के खिलाफ जांच कमेटी बनाकर जांच बैठा दी है.
डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा

आगरा. डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर अशोक मित्तल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप के चलते उनको हटा दिया गया है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रो. मित्तल को हटाते हुए उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं. प्रफेसर अशोक मित्तल के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं.आरोपों की जांच के लिए रिटायर जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया है. अपर मुख्य सचिव महेश कुमा गुप्ता के मुताबिक प्रो. अशोक कुमार मित्तल के खिलाफ भ्रष्टाचार, प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितताओं समेत अन्य गम्भीर शिकायतें प्राप्त हुईं थी. जिसके बाद उनके खिलाफ कार्यवाही की गई है.

दो जून को कुलाधिपति की अध्यक्षता में राज्य विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक हुई थी जिसमे राजभवन से संदर्भित बिंदुआ पर कोई भी संतोषजनक जवाब न दे सके. कुलाधिपति ने अशोक मित्तल की जगह लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर अलोक कुमार राय को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है. साथ ही राज्यपाल ने रिटायर जज रंजना पंडया की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जाँच कमेटी का गठन किया है. कमेटी में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय,कानपूर के कुलपति प्रोफ़ेसर विनय कुमार पाठक, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर सुरेंद्र दुबे को शामिल किया गया है. कमेटी एक महीने के भीतर कुलधपति को जांच रिपोर्ट सौंपेगी.

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डॉ भीमराव आंबेडकर विवि के पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर अशोक मित्तल पर एक छात्र ने समय से डिग्री ना देने का आरोप भी लगाया है. प्रो. अशोक मित्तल खुद खुले मंच से कई बार बोल चुके थे कि विवि से डिग्री दिला पाना उनके लिए भी आसान नहीं हैं. उनके कहने के बाद भी विवि से डिग्री मिलने में लंबा समय लग जाता है. बता दें कि विवि में डिग्री की समस्या नासूर बन चुकी है. छात्रों को डिग्री दिलाने के लिए सालों से विश्वविद्यालय पैसा फूंक रहा है, लेकिन छात्रों को डिग्री निर्धारित समय पर देने में फेल हो रहा है. सिस्टम ऑफलाइन से ऑनलाइन तक हो गया, लेकिन छात्रों की डिग्री के लिए लाइन खत्म नहीं हो रही हैं. विवि छात्रों से लाखों रुपए शुल्क लेने के सालों बाद भी डिग्री नहीं दे पाया है. सबसे खास बात यह है कि विश्वविद्यालय ने छात्रों के डिग्री आवेदन और डिग्री तक कूड़े के ढेर में डाल दी. अभी भी विश्वविद्यालय में लगभग 12 लाख डिग्रियां तैयार हैं, लेकिन छात्रों तक पहुंचाने के बजाए। सालों से विश्वविद्यालय छात्रों से फीस लेने के बाद उन्हें चक्कर कटवा रहा है.

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य संभालने के 17 महीनों बाद कार्य विरत कर दिए गए. अलीगढ़ मुस्लिम विवि के शिक्षक प्रो. अशोक मित्तल को फरवरी 2020 में विवि का कुलपति नियुक्त किया गया था. नियुक्ति के कई दिन बाद प्रो. मित्तल ने कार्यभार ग्रहण किया और जुलाई 2021 में उन्हें विभिन्न आरोपों के आधार पर कार्यविरत करते हुए राजभवन ने जांच तक शुरू करा दी.

राजभवन ने प्रो. अशोक कुमार मित्तल के खिलाफ कार्रवाई नियम विरुद्ध नियुक्तियों, ऑडिट आपत्तियों का अनुपालन न करने, उच्च नयायालय व अन्य लंबित प्रकरणों पर विश्वविद्यालय पर आवश्यक पैरवी-कार्रवाई न करने, छात्रों को नियमित रूप से उनकी डिग्री न प्रदान करना, कर्मचारियों को अनावश्यक ओवरटाइम भत्ता दिया जाना, नियुक्तियों के सम्बंध में आवश्यक रोस्टर तैयार न किए जाने जैसी शिकायतों के आधार पर की है. कुलाधिपति के अपर मुख्य सचिव महेश कुमार गुप्ता के अनुसार प्रो. अशोक कुमार मित्तल के विरूद्ध राजभवन को भ्रष्टाचार, प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं सहित अन्य गंभी शिकायतें प्राप्त हुईं थी.

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