आगरा: मां-बेटी ने पुलिस पर लगाया हत्या का आरोप, CM से लगाएंगी इंसाफ का गुहार

Mithilesh Kumar Patel, Last updated: Thu, 3rd Feb 2022, 4:27 PM IST
  • आगरा में मंगलवार को ऑटो चालक की मौत के बाद यूपी पुलिस के रवैए पर एक बार फिर से सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं. मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि ऑटोचालक की मौत पुलिस की पिटाई के बाद हुई है. उनका कहना है कि इंसाफ के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाएंगी.
आगरा में ऑटो चालक की मौत के बाद पुलिस पर लगा हत्या का आरोप

आगरा. आगरा में मंगलवार को ऑटो चालक की मौत के बाद यूपी पुलिस के रवैए पर एक बार फिर से सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं. मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि ऑटोचालक की मौत पुलिस की पिटाई के बाद हुई है. साथ ही मृत ऑटोचालक की पत्नी अनीता और बेटी मुस्कान का कहना है कि पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर घर आने पर चेहरा तक नहीं देखने दिया. मां-बेटी चीखती रही, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी. महिला पुलिसकर्मियों ने मां-बेटी को पकड़ लिया. और इसके बाद अंतिम संस्कार कराने के लिए पुलिस घर से जबरन शव को  उठवाकर श्मशान घाट लेकर चली गई. परिजनों का आरोप है कि मृतक के शव को देखने के लिए रिश्तेदारों तक का इंतजार नहीं किया गया. ऑटो चालक की मौत के बाद से मोहल्ले के लोगों में गम और पुलिस के प्रति काफी नाराजगी है. 

मंगलवार को आगरा में एक भगवान दास राठौर नाम के ऑटो चालक की मौत संदिग्ध हाल में हो गई. 36 वर्षीय मृत ऑटो चालक जिले के मंडी सईद खां (नाला बुढ़ान सैय्यद) के पास का रहने वाला था. संदिग्ध हाल में हुई मौत को लेकर ऑटो चालक की पत्नी अनीता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसके पति को थाने ले जाकर पिटाई की जिसके चलते मौत हो गई. मौत के बाद आनन फानन में काफी हंगामा हुआ. तत्काल शव घर ले जाने के लिए काफी खींचतान हुई. मृतक के परिजन राजामंडी चौराहे तक चले गए थे. मंगलवार को तकरीबन शाम छह बजे लाठियां फटकारकर पुलिस ने ऑटो चालक के शव को थाने से पोस्टमार्टम कराने के लिए गृह ले गई थी.

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मृत ऑटो चालक की बेटी मुस्कान ने बताया कि मंगलवार की रात तकरीबन 11 बजे उसके पिता के शव का पोस्टमार्टम हो चुका था. इसके बाद बुधवार यानी घटना के अगले सुबह करीब 6 बजे मृतक के परिजन शव लेकर घर पहुंचे थे. जानकारी के अनुसार, इस समय तक मृत ऑटो चालक के परिवार और दूरदराज में रहने वाले अन्य रिश्तेदार घर पर इकट्ठा नहीं हो पाए थे. बताया जा रहा है कि घर के आसपास पहले से ही पुलिस फोर्स तैनात थी. परिजन शव लेकर घर पहुंचे ही थे कि पांच मिनट बाद पुलिस ने श्मशान घाट ले जाने की तैयारी करा दी. बेटियां अब तक अपने पिता के चेहरे को देख भी नहीं पाई थीं. मां-बेटी ने शव को रोकने का काफी प्रयास किया, लेकिन महिला पुलिसकर्मियों ने इस दौरान उन्हें पकड़ कर रखा. मां-बेटी चीखतीं रहीं, लेकिन किसी ने उनकी सुनवाई नहीं की. बेटी का आरोप है कि पुलिस ने ऑटो चालक पिता को पहले पीटकर मार दिया, इन सब के बाद सम्मान के साथ अंतिम संस्कार तक करने नहीं दिया. उनका कहना है कि कुछ रिश्तेदार और भाई को श्मशान घाट पर ले जाकर पुलिस ने खुद ही अंतिम संस्कार भी करवा दिया. परिवारजनों का कहना है कि इंसाफ पाने के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाएंगी.

एसपी सिटी व सीओ का बयान

मामले को लेकर एसपी सिटी विकास कुमार ने बताया कि मामले में जांच की गई. घटना का सीसीटीवी फुटेज है. पिटाई के आरोप गलत हैं। अगर, परिजन शव ले जाने में पुलिस पर जल्दबाजी करने का आरोप लगा रहे हैं तो जांच कराई जाएगी. अभी किसी तरह की शिकायत नहीं आई है. वहीं पुलिस के रवैये के प्रति परिवार के साथ-साथ मोहल्ले के लोगों में भी आक्रोश रहा. जिसके चलते मोहल्ले के बाहर फोर्स तैनात का गई थी. ऐसे हालात में परिजनों के सड़क से हटने के बाद ही पुलिस वहां से वापस गई. इसके आलावा सीओ हरीपर्वत एएसपी सत्य नारायन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई है. इसमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है. शरीर पर किसी तरह की चोट भी नहीं लगी है. विसरा (मौत के स्पष्ट कारणों का पता लगाने के लिए मृतक के शरीर के कुछ आंतरिक अंगों फेफड़ा, किडनी, आंत को) सुरक्षित रखा गया है. इसे जांच के लिए फारेंसिक लैब भेजा जाएगा. इसकी रिपोर्ट जल्द मंगाई जाएगी.

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पुलिस के रवैए पर बोले- मानवाधिकारों का हुआ हनन

मानवाधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस ने बताया कि अंतिम संस्कार रीति-रिवाज से करना परिजनों का अधिकार है. यह मानवाधिकार में भी आता है. अगर, अंतिम संस्कार में कोई जल्दबाजी और दखलअंदाजी करता है तो यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है. ऑटो चालक की मौत के मामले में अगर, ऐसा हुआ है तो परिजनों की शिकायत को मानवाधिकार आयोग में ले जाएंगे.

मौत के कारणों का खुलासा विसरा की जांच रिपोर्ट के बाद हो सकेगा 

परिजनों ने पुलिस पर भगवान दास की पिटाई का आरोप लगाया था. उनके हाथों पर खरोंच और सीने पर डंडा मारने के निशान भी दिखाए थे. हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका. जानकारों का कहना है कि विसरा की जांच रिपोर्ट जल्द आना आसान नहीं है. ऐसे में तब तक भगवान दास की मौत का कारण सवाल ही बना रहेगा.

ऑटो चलाक ने गिरवी रखा है मकान

बेटी मुस्कान ने बताया कि वह चार बहन और एक भाई हैं. बहनें स्कूल जाती हैं. पिता ऑटो चलाकर घर का खर्च चला रहे थे. छह साल पहले छोटी बहन डॉली बीमार हो गई थी. उसका ऑपरेशन कराना पड़ा था. तब मकान को गिरवी रख दिया था. उन पर डेढ़ लाख रुपये का कर्ज है. पिता की मौत के बाद अब कोई सहारा नहीं है. मां बेहाल हैं. उनके आंसू नहीं रुक रहे हैं. परिवार को प्रशासन की तरफ से कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई है. कोई नेता भी मदद के लिए आगे नहीं आया. घर में अब कोई कमाने वाला नहीं है.

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