आगरा

कोरोना साइड इफेक्ट: लॉकडाउन में ब्रज में 119 ने की खुदकुशी, आगरा में 23 सुसाइड

Smart News Team, Last updated: 04/06/2020 12:52 PM IST
  • कोरोना लॉकडाउन में अवसाद ने लोगों को ऐसे घेरा कि पूरे बज्र में कुल 119 लोगों ने खुदकुशी कर ली। पिछले 70 दिनों में आगरा में अब तक 23 लोगों ने लॉकडाउन के दौरान मौत को गले लगाया है। इनमें प्रेमी जोड़े, पति और पत्नी, किशोर-किशोरी और कारोबारी शामिल हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर

कोरोना वायरस महामारी को लेकर देश और दुनिया में लॉकडाउन करना पड़ा है। कहीं लॉकडाउन से छुटकारा मिल गया है तो कहीं अब भी कोरोना के खतरे को देखते हुए लॉकडाउन जारी है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। लॉकडाउन में सभी दफ्तार, कारोबारी, दुकानें बंद करनी पड़ीं। लाखों करोड़ों लोगों के सामने रोजगार और आजीविका की समस्या खड़ी हुई। इस संघर्ष के दौर में कुछ लोग अवसाद में आ गए। इतना ही नहीं, अवसाद का आलमय यह रहा कि कोई सहारा या सही सलाह न मिलने के कारण उन्होंने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। कोरोना लॉकडाउन में अवसाद ने लोगों को ऐसे घेरा कि पूरे बज्र में कुल 119 लोगों ने खुदकुशी कर ली। पिछले 70 दिनों में आगरा में अब तक 23 लोगों ने लॉकडाउन के दौरान मौत को गले लगाया है। इनमें प्रेमी जोड़े, पति और पत्नी, किशोर-किशोरी और कारोबारी शामिल हैं।

दरअसल, आगरा में करीब 70 दिनों का लॉकडाउन चला। शुरुआत में जब लॉकडाउन लगा तो लोगों को पता नहीं था कि यह कब खिंचेगा। इसके क्या नतीजे होंगे। धीरे-धीरे लॉकडाउन बढ़ता चला गया। इससे कई लोग अवसाद की गिरफ्त में आ गए। जिले में ऐसे भी मामले हुए हैं कि बुजुर्ग घर में अकेले थे और लॉकडाउन से घबरा कर हृदयघात के शिकार हो गए। इसके अलावा शहर में कई युवाओं ने भी मौत का रास्ता चुन लिया।

मथुरा के मनो चिकित्सक डॉ. रंजीत चौधरी के अनुसार, लॉकडाउन में अवसाद बढ़ा है। घर में रहने और दूसरों से मुलाकात ना होना भी इसका कारण है। दिनचर्या प्रभावित हुई है। स्कूली छात्रों को पढ़ाई की और प्राइवेट नौकरी-पेशा वालों को नौकरी की चिंता सता रही है। इस दौरान परिवार के साथ अधिक से अधिक समय बताएं। बातचीत करते रहें जिससे मन लगा रहे।

लॉकडाउन से घबराकर भी मौत: जगदीशपुरा में एक रिटायर्ड प्रोफेसर की लॉकडाउन से घबराकर जान चली गई। बुजुर्ग का एक बेटा बिचपुरी तो दूसरा बेटा गुजरात में रहता है। रोजाना बात होती थी। एक दिन फोन नहीं उठा। बुजुर्ग के बेटों ने बताया कि वह बढ़ते लॉकडाउन से घबराए थे। इसी कारण उनकी हृदयाघात से मौत हो गई।

अवसाद से बचने को क्या करें: नियमित रूप से 20 से 30 मिनट शारीरिक व्यायाम करें, इससे दिमाग को सोचने का वक्त मिलेगा। मेडिटेशन करने के साथ राहत भरा संगीत सुनिए। 10 से 20 मिनट तक आंखें बंद करके शांति का अनुभव करें। दिमाग को शांत रखें, और तनाव भरी बातें दिमाग से निकाल दें।

बज्र इलाके में खुदकुशी के मामले

केस 1: थाना शाहगंज क्षेत्र में एक सराफा कारोबारी की फरवरी में शादी हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद ही परिवार ने उन्हें अलग कर दिया। इसके बाद लॉकडाउन शुरू हो गया। पुलिस की जांच में सामने आया था कि पति और पत्नी दोनों काफी परेशान थे। नतीजा पति और पत्नी ने एक दिन सुबह अपने कमरे में ही फांसी लगा ली। छेटी बहन जब खाना देने के लिए कमरे में गई तो भाई और भाभी फंदे पर लटके मिले। पुलिस ने मामले में सास और ससुर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

केस 2: नामनेर निवासी कपड़ा कारोबारी विक्रम कुंदलानी ने थाना ताजगंज के शाहजहां पार्क में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। विक्रम का बिजली घर क्षेत्र में कपड़ों का बड़ा कारोबार था। लॉकडाउन में वह एक शाम को अपने घर से निकला। नामनेर से पैदल-पैदल ताजगंज के शाहजहां पार्क में पहुंचा। जहां उसने पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर जान दे दी। पुलिस की जांच में सामने आया था कि कारोबारी किसी बात को लेकर अवसाद में था। परिवार में पत्नी, दो बच्चे, छोटा भाई और पिता हैं।

फिरोजाबाद में 14 ने दी जान

फिरोजाबाद में लॉकडाउन के दौरान 14 लोगों ने आत्महत्या की है। इसमें एक युवक अपनी रिश्तेदारी में मैनपुरी से एका में आया था और वह लॉकडाउन में फंस गया। इसके बाद अवसाद में आकर उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वहीं नसीरपुर थाना क्षेत्र में एक महिला का पति से विवाद होता था। लॉकडाउन के दौरान यह विवाद और ज्यादा बढ़ गया। लिहाजा महिला ने फांसी लगा ली। इसके अलावा टूंडला में एक किशोरी ने आत्महत्या कर ली। घटना के समय उसका परिवार खेतों पर गया था। सिरसागंज थाना क्षेत्र में एक प्रेमी युगल ने युवती के घर में ही आत्महत्या की थी। युवक रिश्ते में युवती का मामा लगता था।

मथुरा में 22 लोगों ने की खुदकुशी

मथुरा में कोरोना संक्रमण के चलते लगाए गए लॉकडाउन के लगभग 70 दिनों में अलग-अलग कारणों से 22 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। ये लोग मानसिक अवसाद, बेरोजगारी, बीमारी और गृहक्लेश के चलते त्रस्त बताए गए थे। मार्च में वृंदावन में एक वृद्ध ने बीमारी से त्रस्त होकर यमुना में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। अप्रैल में चार लोगों ने संदिग्ध परिस्थितयों में आत्महत्या कर ली। इनमें से एक अस्थाई जेल में विचाराधीन बंदी और हैड कांस्टेबिल भी शामिल है। मई में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में महिला-पुरुष सहित 14 लोगों ने आत्महत्या की। इसमें औरंगाबाद में एक युवक ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर तो वृंदावन में छेड़छाड़ से परेशान युवती ने आत्महत्या की थी। वृंदावन के नगला रामताल में एक प्रेमी जोड़े ने फांसी पर लटक अपनी जान दे दी। जून के तीन दिनों में ही अब तक तीन लोग आत्महत्या कर चुके हैं।

मैनपुरी में 29 की जीवन लीला समाप्त

लॉकडाउन के दौरान आत्महत्या करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। बेवर में सर्वाधिक 12 लोगों ने पिछले तीन महीने में आत्महत्या की है। किशनी में तीन, कुरावली में पांच, करहल-बरनाहल में दो-दो लोगों ने आत्महत्याएं की हैं। इसके अलावा औंछा, घिरोर में भी दो-दो लोगों ने अपनी जान दी। खास बात यह है कि आत्महत्या करने वालों में महिलाएं अधिक हैं। वहीं चार किशोरियों ने भी आत्महत्या की है। मैनपुरी शहर में भी तीन लोगों ने फांसी लगाकर जान दी। पिछले 90 दिनों में मैनपुरी में 29 लोगों ने आत्महत्या की। खास बात यह है कि इन घटनाओं में कुछ मामले ऐसे रहे जिनमें कारण ही पता नहीं चल पाए। इस अवधि में तीन प्रवासी युवक भी बाहर से आकर फांसी पर लटक गए।

एटा-काशगंज में 31 लोगों ने दी जान

कोरोना को लेकर लॉकडाउन में हर कोई त्रस्त था। एटा में भी लॉकडाउन के दुष्प्रभाव देखने को मिले। करीब 70 दिनों में जिले में 12 लोगों ने आत्महत्या कर ली। इनमें आर्थिक तंगी, परिवार में विवाद समेत अन्य कारण सामने आए। दो दिन पहले मारहरा में एक किसान ने बैंक का कर्ज होने के तनाव में खेत पर ही जान दे दी है। यह लोन उसके पिता ने लिया था। पिता की मौत के बाद वह पैसा देने की हालात में नहीं था। वहीं कासगंज में आत्महत्या की 19 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें घर में फांसी लगाकर आत्महत्या, मालगाड़ी से कटने और विशाक्त सेवन शामिल हैं। जबकि पटियाली क्षेत्र में एक युवक ने खुद को तमंचे से गोली मार ली थी। गंजडुंडवारा में चार घटनाएं, पटियाली क्षेत्र में पांच, सहावर क्षेत्र में पांच एवं सोरों क्षेत्र में भी पांच घटनाएं पिछले दिनों में हुई हैं।

 

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