आगरा

होम क्वारंटाइन मंजूर, पर पराया शहर नहीं: जानें घर वापसी पर क्या बोले आगरा वाले

Smart News Team, Last updated: 03/06/2020 02:28 PM IST
  • मंगलवार को जयपुर में फंसे सात लोग फ्लाइट से अपने शहर वापस आ गए। अपनों से दूर रहकर बिताए गए ढाई महीने सालों की तरह लगे। अब कहते हैं होम क्वारंटाइन मंजूर है, पर पराया शहर नहीं।
आगरा एयरोपोर्ट के सहायता केंद्र पर मौजूद यात्री

‘अजनबी शहर में अपना शहर याद आया, उसकी हर गली हर एक मोड़ याद आया‌’...। ये किसी शायर ने सही ही कहा है। ये नज्म आज तब चरित्रार्थ हो रही है जब लोग अपने शहर से दूसरे शहरों में लॉकडाउन के कारण फंस गए थे। अनलॉक होते ही अपने शहर में आने लगे हैं। मंगलवार को जयपुर में फंसे सात लोग फ्लाइट से अपने शहर वापस आ गए। अपनों से दूर रहकर बिताए गए ढाई महीने सालों की तरह लगे। अब कहते हैं होम क्वारंटाइन मंजूर है, पर पराया शहर नहीं।

मार्च के शुरू में ही कोई पढ़ाई के लिए जयपुर में रह रहा था तो कोई नौकरी कर रहा था। कोई ‌घूमने की दृष्टि से गुलाबी शहर पहुंच गया था। ये शहर लोगों को हमेशा खूब भाता रहा है। पर्यटन के लिहाज से भी आगरा से इसका नाता रहा है। दिल्ली, आगरा, जयपुर पर्यटन त्रिकोण में शामिल है, लेकिन कोरोना संकट काल में गुलाबी नगरी में गए लोग भी परेशान हो गए। सौंख (मथुरा) के रहने वाले अतुल चतुर्वेदी जयपुर में जिम इंस्ट्रक्टर का जॉब करते हैं। वह बताते हैं कि वहां पर कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन सौंख में रह रहे उनके पापा का दो दिन पहले पैर में फ्रैक्चर हो गया था। उन्हें देखने के लिए आए हैं।

मम्मी की हाथ की मैगी खाते ही भूल गए परेशानी

नगला भवानी देवरी रोड निवासी देवेश सोहन सिंह मुंबई के माउंट मैरी स्कूल में 12वीं कक्षा के छात्र हैं। वहां अपने नाना-नानी के घर रहते हैं। होली से पहले अपने घर आगरा आने से पहले मुंबई से एक दोस्त के साथ घूमने के लिए पुष्कर आए। कोरोना के प्रकोप ने डरा दिया। जयपुर में अपने दोस्त के यहां आ गए वहीं फंस गए। मंगलवार को फ्लाइट से आगरा पहुंचे। उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’को बताया कि घर पहुंचते ही पहले स्नान किया, फिर क्वारंटाइन हो गए। वह बताते हैं कि जयपुर में घर में ही रहे। बाहर निकल नहीं सकते थे। घर आकर सबसे पहले मम्मी की हाथ से बनी मैगी खाई। उसके बाद तो सारी परेशानी ही भूल गए।

घर जैसी बात कहीं नहीं हो सकती है

सेक्टर सात आवास विकास कॉलोनी निवासी ओम कुमार जयपुर कैंब्रिज अकादमी में 12वीं के छात्र हैं। अपने मामा के यहां मानसरोवर कॉलोनी में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। होली पर घर आना चाहते थे, लेकिन लॉ‌कडाउन में वहीं फंस गए। वह बताते हैं कि मामा का घर होने के कारण कोई परेशानी तो नहीं हुई,लेकिन मम्मी और पापा की बहुत याद आती थी। मार्च में परीक्षाएं चल रहीं थीं। तीन पेपर की परीक्षाएं रुक गईं। मंगलवार को घर पहुंचते ही मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। घर वालों के साथ खुश हूं। बाहर से तो होम क्वारंटाइन ही अच्छा है।

सात लोग आए, चार यात्री गए

मंगलवार को एलांयस एयर की फ्लाइट से सात लोग आगरा उतरे और यहां से जयुपर के लिए चार लोग गए। एयर इंडिया के स्टेशन प्रबंधक सुनील पाराशन ने बताया कि दो दिन में जयपुर से 11 लोग आए और 12 लोग जयपुर गए। एयरपोर्ट निदेशक कुसुम दास ने बताया कि यात्रियों से सारी औपचारिकताएं पूरी कराकर ही उन्हें आने और जाने दिया जा रहा है।

ये लिखकर देना होता है

- कंटेनमेंट जोन के निवासी हैं या नहीं।

- बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत है कि नहीं।

- हवाई यात्रा से पहले क्वारंटाइन थे कि नहीं।

- किसी तरह की परेशानी होने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवगत कराएंगे।

- नाम, पता और आधार नंबर।

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