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खुशखबरी: आगरा में तैयार होगी कोविड-19 की वैक्सीन, 6 माह में ट्रायल होगा पूरा

Smart News Team, Last updated: 04/06/2020 08:38 AM IST
  • आगरा के दयालबाग के डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल की अगुवाई में चार डॉक्टरों की टीम कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार करेगी। भारत सरकार की संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल स्टेटिक्स की क्लीनिकल ट्रायल्स एजेंसी सीटीआरआई ने इसकी मंजूरी दी है। माना जा रहा है कि डॉक्टरों की ये टीम छह माह में वैक्सीन बनाने का काम पूरा करेगी।
प्रतीकात्मक तस्वीर

कोरोना वायरस के कहर से पूरी दुनिया तबाह है। अब तक कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं आई है, मगर दुनियाभर के वैज्ञानिक इसकी खोज में जुटे हुए हैं। इस बीच यूपी के आगरा में वैक्सीन बनाने की कवायाद तेज हो गई है। दरअसल, आगरा के दयालबाग के डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल की अगुवाई में चार डॉक्टरों की टीम कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार करेगी। भारत सरकार की संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल स्टेटिक्स की क्लीनिकल ट्रायल्स एजेंसी सीटीआरआई ने इसकी मंजूरी दी है। माना जा रहा है कि डॉक्टरों की ये टीम छह माह में वैक्सीन बनाने का काम पूरा करेगी।

100 मरीजों के इलाज को बनाया आधार

बीते ढाई महीने में सिद्धार्थ हॉस्पिटल में कोरोना वायरस संक्रमण के संभावित मरीजों का इलाज हुआ। यहां इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी की निगरानी में आइसोलेशन वार्ड संचालित रहा और उन्होंने अपनी टीम के साथ कई बार निरीक्षण भी किया। अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में मरीजों को कई तरह की दवाओं के साथ उपचार के नए तरीकों का परीक्षण करके पूरी तरह स्वस्थ किया गया। उनके स्वस्थ होने पर टेस्टिंग में कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट नेगेटिव आई। इस दौरान मरीजों पर किए गए परीक्षण और प्रयोग पर शोध पत्र भी तैयार किया गया, जिसे अमेरिका के यूनिवर्सिटी आफ येल में प्रकाशन के लिए भेजा गया। शोध पत्र तैयार करने वाले टीम के प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल के साथ इटली की प्रोफेसर डॉ. पाओला एम बुगनोली सहयोगी रहीं।

पिस्कोव ट्रायल के लिए है मंजूरी

डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल दयालबाग शिक्षण संस्थान में फेकल्टी ऑफ इंटीग्रेटेड मेडीसिन के तौर पर भी जुड़े हैं। सीटीआरआई की वैज्ञानिक डॉ. ज्योत्सना गुप्ता ने पिस्कोव ट्रायल के लिए दी गई मंजूरी में उल्लेख है कि सिद्धार्थ हॉस्पिटल में बीते ढाई माह के दौरान हाई रिस्क कॉन्टेक्स ऑफ कोविड-19 के प्रमाणित 100 मरीजों में नए पीएच बेस्ड इंटीग्रेटेड सार्स कोव 2 इम्युनिटी इन ह्यूमन सब्जेक्ट पर जो उपचार और परीक्षण किया गया, इसे आधार मानते हुए पिस्कोव ट्रायल ( पीएच बेस्ड इंटीग्रेटेड सार्स कोव-2 ) के लिए सिद्धार्थ हॉस्पिटल में छह माह में 23 मर्ज ट्रायल (ह्यूमन) होगा।

आगरा में पहला परीक्षण

कोविड-19 की वैक्सीन तैयार करने के लिए दुनियाभर में तकरीबन 100 ट्रायल हो रहे हैं। भारत में भी करीब 30 स्थानों पर इस वैक्सीन के लिए ट्रायल हो रहे हैं। आगरा क्षेत्र में यह पहला ट्रायल है, जिसे सीटीआरआई की एथिक्स कमेटी के मेंबर सेकेटरी सुशील कुमार की संस्तुति पर ट्रायल की मंजूरी दी गई है। इस ट्रायल के संबंध में जावेद खां और आकाश गुप्ता को संपर्क अधिकारी नियुक्त किया है।

छह माह का वक्त क्यों

सामान्य तौर किसी वैक्सीन का ट्रायल तीन स्तर पर होता है और इसमें डेढ़ वर्ष तक समय लगता है। किसी भी वैक्सीन का मनुष्य के शरीर से पहले प्राय: पशुओं पर ट्रायल होता है। चूंकि सिद्धार्थ हॉस्पिटल में 100 मरीजों पर परीक्षण हो चुका है, इसलिए इसे महज छह माह में ट्रायल पूरा करने का समय दिया गया है।

अमेरि डॉक्टर भी टीम में शामिल

कोविड-19 की इस वैक्सीन ट्रायल में चार डॉक्टरों की टीम काम कर रही है। इसमें डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल के साथ अमेरिका में टेक्सास स्थित राइस यूनिवर्सिटी की डॉ. दीप्ति यादव, पैथोलॉजिस्ट डॉ. सपना अग्रवाल और सिद्धार्थ हॉस्पिटल के चीफ डॉ. पीएन अग्रवाल शामिल हैं।

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