डेढ़ दशक बाद एक बार फिर डॉक्टर के अपहरण से आगरा के लोगों में दहशत

Smart News Team, Last updated: Thu, 15th Jul 2021, 9:32 AM IST
  • आगरा से मंगलवार की रात से लापता डॉक्टर उमाकांत गुप्ता लापता हैं. उनकी गुमशुदगी ने ताजनगरी के लोगों में दहशत पैदा कर दी है. ऐसा डर डेढ़ दशक पहले आगरा में भूरा यादव के कारण हुआ करता था. भूरा यादव लोगों को किडनैप करके फिरौती की मोटी रकम वसूलता था. 
डेढ़ दशक पहले भूरा यादव के नाम से आगरा के लोगों में था खौफ जो डॉक्टर उमाकांत की किडनैपिंग से एक बार फिर जाग गया है.

आगरा. ताजनगरी में बुधवार को डॉक्टर उमाकांत गुप्ता की किडनैपिंग की खबर ने एक बार फिर लोगों के दिल में आतंक बैठा दिया है. ऐसा आंतक डेढ़ दशक पहले आगरा में पौरी, फरह(मथुरा) के भूरा यादव का हुआ करता था. भूरा यादव के डर से डॉक्टरों और कारोबारियों ने सुबह की सैर पर जाना छोड़ दिया था. अपनी दिनचर्या तक बदल डाली थी. वह पहले लोगों को किडनैप करता था फिर उनके परिवार से मोटी रकम वसूलता था. 

कुख्यात भूरा यादव ने सबसे पहले खंदारी के रहने वाले एक डेंटिस्ट के वयोवृद्ध पिता को किडनैप किया था. चार दिन अपनी कैद में रखने के बाद उसने चालीस लाख रुपए की फिरौती वसूली थी. उस दौरान आगरा के एसएसपी डॉक्टर राजकुमार विश्वकर्मा थे. उन्होनें पूरी आगरा पुलिस भूरा के पीछे लगा दी थी. जिसके बाद भूरा यादव ने बुर्का पहनकर कोर्ट में समर्पण किया था. इसके बाद भूरा यादव कुछ महीने बाद ही जेल में सिपाहियों को नशीला हलवा खिलाकर फरार हो गया था. 

जेल से फरार होने के बाद भूरा यादव ने केंद्रीय हिंदी संस्थान के प्रकाशक मैनेजर को मॉर्निग वॉक के दौरान किडनैप किया था. उस दौरान राजीव कृष्ण आगरा के एसएसपी थे. उन्होनें भी भूरा को पकड़ लिया लेकिन जेल से बाहर आते ही उसने एक और अपहरण किया. ऑटोमोबाइल कारोबारी को भी मॉर्निंग वॉक के दौरान किडनैप किया और फिरौती की मोटी रकम वसूल की. यही नहीं इसके बाद दो कारोबारियों को बल्केश्वर से उठा लिया था.  

किडनैपिंग की इतनी घटनाएं होने के बाद ताजनगरी में अचानक मॉर्निंग वॉक करने वालों की संख्या कम हो गई. भूरा के डर से डॉक्टरों ने भी अपना जीवन जीने का ढंग बदल दिया था. घरों के बाहर सुरक्षा के इंतजाम किए गए. सीसीटीवी लगवाए गए. क्लीनिक में आने वालों के मोबाइल नंबर और पता नोट किया जाने लगा था.

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ट्रांसयमुना कॉलोनी के रहने वाले डॉक्टर उमाकांत की किडनैपिंग ने भी लोगों में एक बार फिर डर पैदा कर दिया है. भूरा यादव तो अब जिंदा नहीं है लेकिन बदमाशों के नाम बदलते हैं अंदाज नहीं बदलते. डॉक्टर उमाकांत के अपहरण को लेकर अभी साफ नहीं है कि बदमाशों ने डॉक्टर को कैसे चिन्हित किया है. साथ ही किस तरह से फोन करके उन्हें बुलाया गया था.

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