आगरा

कोख के सौदागरों का खुला राज: एक बच्चे की कीमत 8 लाख, ये महिलाएं होती हैं टारगेट

Smart News Team, Last updated: 21/06/2020 12:23 PM IST
  • बीते दिनों कोख के किराए के तीन नवजात बच्चों को नेपाल बेचने जा रहे गैंग ने पुलिस पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर

बीते दिनों कोख के किराए के तीन नवजात बच्चों को नेपाल बेचने जा रहे गैंग ने पुलिस पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं। एक महीने के 3 नवजात मासूमों को नेपाल बेचने जा रहे लोगों को आगरा पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार किया था, जिन्हें शनिवार को जेल भेद दिया गया। इस गैंग में दो महिला और तीन पुरुष शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ पुलिस ने अपनी तरफ से मुकदमा दर्ज किया है और रेस्क्यू किए गए बच्चे को बाल कल्याण समिति के हवाले कर दिया है। 

पुलिस की जांच में बता चला है कि आरोपी एक बच्चे का सौदा आठ लाख रुपये में करते थे। इसका बड़ा नेटवर्क है और इसमें अभी कई और लोग फंसेंगे। पुलिस ने बताया कि हमारी जांच में बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाले दो अस्पतालों के भी नाम सामने आ गए हैं, वे दोनों फरीदाबाद के अस्पताल हैं। 

गौरतलब है कि खुफिया सूचना के आधार पर आगरा पुलिस ने शुक्रवार को फतेहाबाद टोल प्लाजा पर दो गाड़ियों को पकड़ा था, जिनमें दो चालक, दो महिलाएं, एक पुरुष और तीन नवजात बच्चे मिले थे। पुलिस को पहले तस्करी की सूचना मिली थी, मगर पूछताछ में पता चला यह पूरा मामला किराए के कोख का है। ये आरोपी निसंतान दंपति को बच्चे बेचा करते थे। 

पुलिस पूछताछ में पता चला कि गैंग के लोग पहले ऐसी महिलाओं को अपने जाल में फंसाते थे, जो गरीब और कमजोर हों। जो अपने पति से अलग रहती हैं। आरोपी उन्हें किराए के कोख (सेरोगेसी) के लिए तैयार करते थे। जिन बच्चों को रेस्क्यू किया गया है, वे भी इसी तहत पैदा हुए हैं। डिलीवरी के बाद बच्चों को नेपाल में एक महिला के सुपुर्द किया जाना था। उस महिला का नाम अस्मिता है। वह नेपाल में हॉस्पिटल चलाती है। नेपाल में लड़कियों की मांग अधिक है।

एसएसपी बबलू कुमार के मुताबिक लड़कों ने अपने अपने नाम अमित (बदरपुर, दिल्ली), राहुल (हर्ष विहार, पूर्वोत्तर दिल्ली) बताए। उनके साथ गाड़ी में धीरज नगर सेक्टर 31 फरीदाबाद निवासी प्रदीप, रूबी व नीलम सवार थे। तलाशी में आरोपियों से पास से देवी हॉस्पिटल व गेटवैल हॉस्पिटल, सेक्टर 19 फरीदाबाद (हरियाणा) के कागजात मिले। ये कागजात नवजात बच्चों के जन्म से संबंधित हैं। बच्चों का जन्म वहां हुआ या फर्जी कागजात तैयार कराए गए इसकी भी जांच होगी।

मोटी रकम व किराए की कोख...नेपाल में बिकने थे 3 नवजात बच्चे, पुलिस ने ऐसे दबोचा

पुलिस पूछताछ में आरोपी रूबी ने कहा  कि वह नीलम गैंग की सरगना है। वही लोगों को एजेंट बनाती है। ऐसी महिलाओं को अपने जाल में फंसाती है जिनकी आर्थिक स्थिति खराब है। वे अपने पतियों से अलग रहती हैं। नीलम ऐसी महिलाओं को गर्भधारण करके पैसा कमाने का लालच देती है। महिलाएं भी इसके लिए तैयार हो जाती हैं। एक डॉक्टर के माध्यम से महिला को गर्भधारण कराया जाता है। शुक्राणु उस पुरुष के लिए जाते हैं जो बच्चे की मांग करते हैं। शादी के बाद उसकी पत्नी के कोई बच्चा नहीं हो रहा होता है।

पुलिस के मुताबिक तीन नवजात बच्चों में दो जुड़वा लड़कियां हैं। इन बच्चियों को बिहार की एक महिला ने जन्म दिया था। महिला फरीदाबाद में रहती है। उसे तीन किश्तों में साढ़े तीन लाख रुपये मिले थे। एक बच्चा आठ लाख रुपये में बिकता है। पूरा खर्चा काटने के बाद नीलम को लगभग तीन लाख रुपये बच जाते हैं। गर्भधारण से लेकर महिला की देखभाल करना और उसकी डिलीवरी कराने की जिम्मेदारी नीलम की रहती है। वह महिला को गर्भधारण करते ही पहली किश्त देती है। दूसरी किश्त डिलीवरी से सात दिन पहले और तीसरी किश्त बच्चा सुपुर्द करते समय देती है।

 

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