आगरा

सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है लैंगिक असमानता

Smart News Team, Last updated: 03/06/2020 02:59 PM IST
  • डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस ने मंगलवार को एक दिवसीय नेशनल सेमिनार का आयोजन किया।
Gender inequality (Representative Photo)

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस ने मंगलवार को एक दिवसीय नेशनल सेमिनार का आयोजन किया। 'जेंडर सेंसटाइजेशन : नीड ऑफ द ऑवर' विषय पर आयोजित सेमिनार में देशभर से पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। विवि के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के सहयोग से आयोजित सेमिनार में सात सौ से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि लैंगिक असमानता हमेशा से ही बड़ा मुद्दा रहा है। यह सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है। यह सभी लिंगों पर समाज द्वारा स्थापित मापदण्डों को जीने के लिए अनुचित दबाव बनाता है। लैंगिक असमानता केवल घरेलू कामों तक सीमित नहीं है। महिलाओं को घरेलू और यौन हिंसा का सामना करने के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, कार्य स्थल, कम वेतन, सामाजिक वर्चस्व, असमान अवसर झेलने पड़ते हैं। वहीं पुरुषों से अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें। वह रक्षक और आय अर्जित करने वाले हैं। इसके अतिरिक्त तीसरा लिंग जिसे हाल ही में भारत के संविधान ने कानूनी दर्जा दिया है। अभी भी जनता द्वारा स्वीकार किए जाने से बहुत दूर है। प्रो. मित्तल ने कहा कि वैश्विक प्रगति के लिए सभी लिंगों के साथ चलने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में वक्ता के रूप में उपस्थित कटक की डीसीपी (ट्रैफिक) सागरिका नाथ ने घर के साथ-साथ कार्यस्थल पर लैंगिक असमानता विषय पर उद्बोधन दिया। स्कूल ऑफ जेंडर एंड डेवलेपमेंट स्टडी, इग्नू की प्रो. हिमांद्री रॉय ने जेंडर सेंसटाइजेशन में शिक्षा की भूमिका पर व्याख्यान दिया। न्यूज क्लिक की मुख्य संपादक भाषा सिंह ने लिंग असमानता को मीडिया की नजरों से देखते हुए विचार रखे। प्रदेश के राज्यपाल के पूर्व लीगल एडवाइजर डॉ. अरविंद मिश्र ने लिंग संवेदीकरण में कानून की भूमिका को समझाया। कार्यक्रम में निदेशक प्रो. सुनंदा खन्ना, आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. अजय तनेजा, प्रो. अचला गक्खड़ और डॉ. अंकिता गुप्ता उपस्थित रहीं।

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