कोरोना तीसरी लहर से बचाव को सभी कोरोना पॉजीटिव नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग

Smart News Team, Last updated: Sat, 21st Aug 2021, 1:55 PM IST
  • तीसरी लहर से बचने के लिए कोरोना के नए वैरिएंट का तत्काल पता लगाना बहुत जरूरी है. कोरोना की तीसरी लहर का कारण सिर्फ कोरोना का नया वैरिएंट बन सकता है. इसलिए अब हर पाजीटिव मरीज का सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जा रहा है.
कोविड का खतरा कम है. अभी पाँच जिलों की प्रतिदिन आठ हजार नमूनों की जांच की जा रही है.. (Photo by Arun SANKAR / AFP)

आगरा: आगरा में इस दिनों न के बराबर कोरोना केस आ रहे है. फिलहाल कोविड का खतरा कम है. अभी पाँच जिलों की प्रतिदिन आठ हजार नमूनों की जांच की जा रही है. इसमे मात्र एक से दो सैम्पल ही संक्रमित निकल रहा है. खतरा सिर्फ बाहर से आने वालों से है. लिहाजा अब हर संक्रमित की जीनोम सीक्वेंसिंग कराई जा रही है.

डा. आरती अग्रवाल, (प्रभारी कोविड लैब एसएनएमसी) बताती है की कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए कोरोना के नए वैरिएंट का तत्काल पता लगाना बहुत जरूरी है. कोरोना की तीसरी लहर का कारण सिर्फ कोरोना का नया वैरिएंट बन सकता है. इसलिए अब हर पाजीटिव मरीज का सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जा रहा है. सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) की माइक्रो बायोलाजी लैब में प्रतिदिन पाँच जिलों की लगभग आठ हजार नमूनों की जांच की जा रही है. जिसमे आगरा के 2500 से लेकर 2800 नमूने, मथुरा के करीब 1500, मैनपुरी के 1500, कासगंज के 1500 और हाथरस जिले के करीब 1200 नमूने जांचे जा रहे हैं. इन जांच में अभी तक प्रतिदिन मात्र एक से दो लोग संक्रमित निकाल रहे है हैं. 

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यानि साफ है कि आगरा सहित इन पांच जिलों में फिलहाल कोरोना वायरस की नई वैरिएंट की दस्तक नहीं है. अगर कोरोना की तीसरी लहर आएगी तो इसका मुख्य कारण बाहर से आए लोग हो सकते हैं. हो सकता है बाहर से आने वालों के साथ कोरोना के नए वैरिएंट भी प्रदेश में आ जाय. जिससे संक्रमण फैल सकता है. इसीलिए स्वास्थ्य विभाग संक्रमित पाए जाने हर व्यक्ति की जीनोम सीक्वेंसिंग करा रहा है. ताकि जल्द से जल्द नए वैरिएंट का पता चल सके और संक्रमण फैलने से पहले रोक जा सके. साथ ही संबंधित मरीज का तत्काल इलाज शुरू कर प्रभावी दवाइयों की भी जानकारी मिल सके .

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अभी तक जांच किए गए 100 नमूनों में कोरोना का नया वैरिएंट नहीं मिल है. इनमें दूसरी लहर में तबाही मचाने वाले सिर्फ डेल्टा वैरिएंट पाया गया है. 50 के आसपास नमूने की जांच दिल्ली, लखनऊ और अलीगढ़ मुस्लिम विवि के मेडिकल कालेज में भी चल रहा हैं. अभी तक इनके नतीजे नहीं आए हैं.

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