आगरा: महीनों से नकली इंजन ऑयल हो रहे थे तैयार, 2 गिरफ्तार, 6 फरार

Smart News Team, Last updated: 02/10/2020 09:09 AM IST
आगरा में नकली इंजन ऑयल  तैयार हो रहे हैं. बुधवार को एत्मादुहौला थाना क्षेत्र में नकली इंजन बनाने वाली एक फैक्टरी और गोदाम पर पुलिस ने छापा मारा. इन दोनों जगह से पुलिस ने लाखों रुपयों का माल बरामद किया है. गुरुवार को 2 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और 6 फरार लोगों की तलाश जारी है.
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आगरा. आगरा में नकली इंजन ऑयल तैयार हो रहे हैं.  बुधवार को एत्मादुहौला थाना क्षेत्र में नकली इंजन बनाने वाली एक फैक्टरी और गोदाम पर पुलिस ने छापा मारा. इन दोनों जगह से पुलिस ने लाखों रुपयों का माल बरामद किया है. 

इसको लेकर दो मुकदमे दर्ज किए गए थे जिसमें किआठ लोगों का नाम है.  इनमें से दो को गिरफ्तार कर गुरुवार को जेल भेज दिया गया और बाकि के छह की तलाश जारी है. सीओ छता विकास जायसवाल ने कहा कि हनुमान नगर के पास कटरा वजीर खां में नकली इंजन ऑयल बनाने के लिए फैक्टरी चार महीने पहले खुली थी. गोदाम जो कि शाहदरा में था वो वह तीन माह पहले खुला था. यह समय-समय पर अपने नकली इंजन ऑयल तैयार करने के ठिकाने बदलते रहते थे. 

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पुलिस को बुधवार को जब पता लगा जब गोदाम से ऑयल ले जाते हुए जीनखाना के रहने वाले जावेद को पकड़ा गया. गोदाम जावेद ने 14 हजार रुपये किराए पर लिया था और लेने से पहले कोई एग्रीमेंट नहीं कराया गया था.  इसका मालिक राहुल जो कि फिरोजाबाद का निवासी है. वह गोदाम के सामने ही ढाबा चलाता है. एग्रीमेंट नहीं कराने के कारण और नकली इंजन ऑयल बनाने की जानकारी पर भी पुलिस को नहीं बताने की वजह से गोदाम मालिक राहुल को भी पुलिस ने आरोपित बनाया है. इसके साथ नु‌निहाई चौकी के प्रभारी एसआई  राहुल कुमार ने गोदाम चलाने वाले जावेद, उसके भाई शानू, नासिर को मुकदमे भी में नामजद किया है.  जिसमें से कि राहुल और जावेद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

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वहीं हनुमान नगर में नकली इंजन ऑयल के कारखाने के मामले में एसआई आदित्य खोखर ने मुकदमा दर्ज कराया है. जिसमें कि नदीम उर्फ नदीमुद्दीन, मेनाज, उसके बेटे शानू और निक्की का नाम है. यह चारों फरार हैं. जिनकी तलाश जारी है. यह फैक्टरी कटरा वजीर खां में रहने वाले हिमांशु दौनेरिया के नाम पर है और पूछताछ के दौरान इन्होने किरायानामा दिखाया. जिसके अनुसार एक ‌जुलाई को किराये पर लिया गया था और इसके लिए 12 हजार रुपये हर महीने देना होता था.  इसी कारण कारखाने के मालिक का मुकदमे में नाम नहीं है.

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