मणप्पुरम गोल्ड लूट: आगरा पुलिस की गोली से 10 साल बाद मारे गए बदमाश

Smart News Team, Last updated: Sun, 18th Jul 2021, 8:55 PM IST
  • आगरा के लोगों में सुरक्षा की भावना को मजूबत करने के लिए पुलिस ने बीते दिन बड़ी कार्रवाई की थी. पुलिस ने अपनी कार्रवाई में शहर की मणप्पुरम गोल्ड बैंक की शाखा में डाका डालने पहुंचे दो बदमाशों को मार गिराया था. इस कार्रवाई के बाद जिले की जनता का मानना है कि इससे बदमाशों के दिलों में खौफ बैठेगा कि पुलिस की गोली सीधा उनके सीने में लग सकती है.
आगरा को अपराधमुक्त करने के लिए पुलिस पुरी तरह तैयार है

ताजनगरी आगरा को अपराधमुक्त बनाने के लिए जिला पुलिस की कोशिशें जारी हैं. इसी कड़ी में कल शहर की मणप्पुरम गोल्ड ब्रांच में डाका डालने के इरादे से पहुंचे दो बदमाशों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था. बता दें कि बीते 10 साल से आगरा में एनकाउंटर में कोई बदमाश नहीं मारा गया था. दिलचस्प बात यह है कि इन 10 सालों में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ भी खूब हुई, गोलियां भी तमाम चलीं पर किसी बदमाश की जान नहीं गई. हालांकि बीते दिन पुलिस की तरफ से की गई कार्रवाई से जनता के बीच एक भरोसा जगा है कि बदमाशों के मन में इस घटना के बाद खौफ बैठेगा. अभी तक जब भी मुठभेड़ होती थी तो अक्सर बदमाशों के पैर में गोली मार दी जाती थी. लेकिन इस कार्रवाई के बाद बदमाशों को भी अंदाजा हो जाएगा कि गोली पैर ही नहीं सीनें में भी लग सकती है.

बता दें कि वर्ष 2011 में आगरा में आखिरी बार पुलिस एनकाउंटर में बदमाश विष्णु परिहार को मारा गया था. विष्णु परिहार को मारने के लिए पुलिस की टीम ने बीहड़ में कई दिन तक डेरा डाले रखा था. इससे पहले ताजगंज क्षेत्र के नगला पदी निवासी विष्णुकांत गौतम और नगरा रामबल निवासी गरुआ यादव को पुलिस मुठभेड़ में जान गंवानी पड़ी थी. वर्ष 2008 में आतंक के लिए जाने जाने वाले डाकू कमल गुर्जर और फिरोजाबाद के बदमाश दुर्गेश टोंटा का पुलिस ने एनकाउंटर किया था. कमल गुर्जर ने आगरा पुलिस की नाक में दम कर रखी थी.

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पुलिस की इन कार्रवाई को देखने के बाद प्रश्न उठता है कि पुलिस वर्ष 2011 के बाद आगरा में एनकाउंटर क्यों बद कर दिए, इसके पीछे बड़ी वजह है. दरअसल वर्ष 2013 में आगरा में तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर एक मुठभेड़ में सजा हो गई. वह अभी तक जेल में है. आगरा में तैनात रहे एक सीओ को भी सीबीआई ने मुठभेड़ में सजा सुनाई. मुठभेड़ के कई मामलों की सीबीआई जांच हुई, जिससे पुलिस बैकफुट पर आ गई. जांच और कार्रवाई के डर से पुलिस ने एनकाउंटर से दूरी बना ली. वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनी. योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनते ही कहा कि प्रदेश में भयमुक्त माहौल होना चाहिए. इसके बाद पुलिस ने अपराधियों को उनकी भाषा में जवाब देना शुरू किया.

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बता दें कि एडीजी जोन राजीव कृष्ण आगरा के एसएसपी भी रह चुके हैं. दिसंबर 2004 से 2006 तक वह एसएसपी आगरा रहे हैं. उनके कार्यकाल के दौरान वर्ष 2006 में कमला नगर लाइव एनकाउंटर हुआ था. हुआ ये था कि दवा कारोबारी रवि गोगड़ के घर दिनदहाड़े बदमाश डाका डालने घुसे थे. सूचना मिलने के बाद मौंके पर पहुंची पुलिस टीम की कमान खुद राजीव कृष्ण ने संभाली थी. कई घंटों की मेहनत के बाद दो बदमाशों को मार गिराया गया था. यह पूरा एनकाउंटर लाइव चला था. राजीव कृष्ण को इस सफल ऑपरेशन के लिए गैलेंट्री अवार्ड भी मिला था. मौजूदा आईजी रेंज नवीन अरोरा वर्ष 2008 में एसएसपी आगरा के पद पर तैनात थे. उनके कार्यकाल में भी देहात क्षेत्र में तीन बदमाशों का एनकाउंटर हुआ था.

 

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