आगरा

कोरोना से मजबूत निकली मां की कोख की दीवार, 22 संक्रमितों के सभी बच्चे स्वस्थ

Smart News Team, Last updated: 03/06/2020 04:36 PM IST
  • जिस कोरोना वायरस ने लाखों लोगों को मौत की नींद सुला दी, पूरी दुनिया जिसके आगे नतमस्तक है, अमेरिका जैसा सुपरपावर देश भी उसके सामने बेबस और लाचार नजर आ रहा, दुनिया की एक तिहाई आबादी इससे बचने को घरों में छुपी बैठी है। वह खतरनाक कोरोना वायरस एक मां की कोख के सामने हार गया।
प्रतीकात्मक तस्वीर

जिस कोरोना वायरस ने लाखों लोगों को मौत की नींद सुला दी, पूरी दुनिया जिसके आगे नतमस्तक है, अमेरिका जैसा सुपरपावर देश भी उसके सामने बेबस और लाचार नजर आ रहा, दुनिया की एक तिहाई आबादी इससे बचने को घरों में छुपी बैठी है। वह खतरनाक कोरोना वायरस एक मां की कोख के सामने हार गया। कोविड-19 ने एक मां को संक्रमित तो कर दिया, मगर कोख में पल रहे नौनिहाल को छू भी नहीं पाया। एक-दो नहीं, ऐसे 22 बच्चे नई दुनियां में आए हैं। इनकी किलकारियां अब अपने परिवारों में गूंज रही हैं।

संक्रमण के इस काल में कई गर्भवती माएं भी कोरोना की चपेट में आ गईं। इस दशा में मां के दिल का हाल शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। नौ माह तक गर्भ में पालने के बाद नन्हें मेहमान का क्या होगा, यह सवाल बार-बार खाए जा रहा था। लेकिन मां की कोख बहुत मजबूत निकली। मां को संक्रमित करने वाला वायरस कोख में पल रहे बच्चे का बाल भी बाका नहीं कर पाया।

एसएन मे़डिकल कॉलेज के कोविड-19 अस्पताल में अभी तक ऐसी 22 प्रसूताएं आईं। विशेषज्ञों के साथ जूनियर डाक्टरों की टीम ने सभी बच्चों की स्वस्थ और सुरक्षित डिलीवरी को बखूबी अंजाम दिया। इन बच्चों को एक या दो दिन एनआईसीयू में रखा गया। फिर परिवार को सौंप दिया। 48 घंटे के बाद सभी के कोविड टेस्ट कराए गए। सभी नवजात स्वस्थ हैं। अधिकतर की माएं भी कोरोना से लड़कर स्वस्थ होकर घर लौट आई हैं। नन्हें मेहमान अब माताओं की गोद में खेल रहे हैं। परिवार में किलकारियां गूंज रही हैं।

बड़ों का निर्देशन, जूनियर डाक्टरों की हिम्मत

कोरोना संक्रमित महिलाओं का प्रसव कोई आसान काम नहीं है। इसे अंजाम देने वाले जान पर खेलते हैं। कई विभागों के डाक्टर इसमें शामिल होते हैं। प्रमुखत: स्त्री और प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसियासिस्ट के साथ नर्स, वार्ड ब्वाय, सफाई कर्मचारियों की टीम काम करती है। एसएन की यह टीम 15 से 20 मिनट में तैयार हो जाती है। आपरेशन थियेटर में युवा डाक्टरों को ही भेजा जाता है। कारण कि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। जबकि कंट्रोल रूम से वरिष्ठ डाक्टर स्क्रीन पर देखकर निर्देशित करते रहते हैं।

बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. रामक्षितिज शर्मा ने कहा कि हम लोग सुरक्षा इंतजामों के साथ ओटी में जाते हैं। मोबाइल समेत घड़ी आदि सभी एक्सेसरीज बाहर निकाल देते हैं। आपरेशन के बाद एक-दो दिन बच्चे को अपनी निगरानी में रखते हैं। इसके बाद परिवारीजनों को सौंप देते हैं। हर आपरेशन के बाद थियेटर को सेनेटाइज कर बंद कर दिया जाता है। अगला आपरेशन दूसरी ओटी में होता है।

वहीं, स्त्री रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रचना अग्रवाल ने कहा कि डिलीवरी की प्रक्रिया तो समान है। लेकिन इन मामलों में हमें संक्रमित से खुद को बचाना है। शिशु को बाहर निकालते समय उसे भी बचाना है। इसीलिए पीपीई किट के अलावा अतिरिक्त गाउन भी पहनते हैं। प्रसूता को भी मास्क और दूसरे सुरक्षा के साधन पहनाए जाते हैं। अच्छी बात है कि हमारे यहां सभी मामलों में बच्चे सुरक्षित पाए गए हैं।

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