कोरोना काल में आसमान छू रहे सरसों के तेल के दाम, जानें रेट बढ़ने की वजह

Smart News Team, Last updated: Wed, 19th May 2021, 6:32 PM IST
  • कोरोना काल में उत्तर प्रदेश के आगरा में सरसों के तेल में रिकॉर्डतोड़ महंगाई बढ़ रही है. एक महीने में सरसों के तेल का रेट 90 रुपए से 190 रुपए तक पहुंच गया है. सरसों की जमाखोरी को इस महंगाई की वजह माना जा रहा है.
सरसों की जमाखोरी की वजह से एक महीने में 90 रुपए से सरसों के दाम 190 रुपए हो गए हैं. प्रतीकात्मक तस्वीर

आगरा. कोरोना संक्रमण के बीच ताजनगरी आगरा कें सरसों की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हैं. अप्रैल में सरसों को रेट 90 था जो मई में बढ़कर 190 रुपए हो गया है. माना जा रहा है कि सरसों की जमाखोरी की वजह से दाम बढ़ रहे हैं. वहीं आगरा के व्यपारियों का कहना है कि इंटरनेशनल मार्केट में खाद्य तेल के रेट बढ़ रहे हैं. अऔर पेट्रोल-डीजल के रेट के बढ़ने से सरसों का तेल महंगा हो रहा है.

मिली जानकारी के अनुसार, आगरा की मंडियो में सोमवार को 6 हजार 800 रुपए क्विंटल तक सरसों की नीलामी लगी. एक महीने पहले ये नीलामी 3 हजार 900 रुपए थी. इस पर जीएसटी और मंडी शुल्क अलग से लगता है. किसानों से व्यापारियों ने सीधे सरसों खरीदना शुरू कर दिया है. जिससे मंडी में आवक कम हो रही है. फसल की जमाखोरी करने की वजह से सरसों का तेल महंगा बिक रहा है.

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आगरा आयल मिल के प्रबंध निदेशक के के गोयल ने कहा कि खाद्य तेल के मामले में भारत अपनी आधी से लेकर तीन-चौथाई तक जरूरत विदेश से आने वाले कच्चे तेल से पूरी करता है. भारत में खाद्य तेल की मांग का बहुत कम हिस्सा घरेलू आपूर्ति से पूरा हो पाता है. रिफाइंड तेल में मिलाए जाने वाले कई जरूरी रसायनों की सप्लाई प्रभावित होने से भी दामों में इजाफा हुआ है.

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वहीं किरावली के थोक व्यापारी दिनेश चंद ने कहा कि कोरोना के चलते आयात बंद हो गया है, जिस कारण खाद्य तेल की कीमतें बढ़ी हैं. वहीं मोहन गोयल ने कहा कि भारत समेत कई देशों में सोयाबीन उत्पादन में कमी हुई है. मांग-आपूर्ति का गणित बिगड़ने से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है.

 

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