राजा मानसिंह हत्याकांड पर अंतिम फैसला आज, 35 साल, 8 बार फाइनल बहस, 1700 तारीखें

Smart News Team, Last updated: 22/07/2020 10:11 AM IST
  • बहुचर्चित भरतपुर राजा मानसिंह हत्याकांड में आज निर्णायक दिन है। भरतपुर रियासत के राजा मानसिंह हत्याकांड मामले में मथुरा जिला जज साधना रानी ठाकुर ने 11 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है।
CM के मंच को जीप से तोड़ने वाले राजा मानसिंह की हत्या मामले में सजा का ऐलान आज

आगरा मंडल, मथुरा

बहुचर्चित भरतपुर राजा मानसिंह हत्याकांड में आज निर्णायक दिन है। भरतपुर रियासत के राजा मानसिंह हत्याकांड मामले में मथुरा जिला जज साधना रानी ठाकुर ने 11 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। हालांकि, इस हत्याकांड में तीन आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है। दोषी ठहराए गए सभी अभियुक्तों को कड़ी सुरक्षा में अस्थाई जेल भेज दिया गया है और इन सभी अभियुक्तों की सजा पर आज यानी बुधवार को निर्णय सुनाया जाएगा।

दरअसल, भरतपुर के राजा मानसिंह और उनके दो साथियों ठाकुर सुम्मेर सिंह व हरी सिंह की राजस्थान पुलिस ने 21 फरवरी 1985 को मुठभेड़ में हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड के बाद राजा मानसिंह के दामाद विजय सिंह ने तत्कालीन डीग सीओ कान सिंह भाटी, थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जयपुर सेशन कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। पीड़ित पक्ष के प्रार्थना पत्र पर सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 1990 में मुकदमे की सुनवाई मथुरा जिला जज की अदालत में शुरू हुई।

CM के मंच को जीप से तोड़ने वाले राजा मानसिंह की हत्या मामले में सजा का ऐलान कल

जिला जज साधना रानी ठाकुर ने सीओ कानसिंह भाटी सहित 11 पुलिसकर्मियों को राजा मानसिंह, ठाकुर सुम्मेर सिंह व हरी सिंह की हत्या का दोषी करार देते हुए पुलिस कस्टडी में जेल भेजने के आदेश दिए। बुधवार को अदालत सभी की सजा पर फैसला सुनाएगी। पीड़ित के अधिवक्ता नारायण सिंह विप्लवी ने बताया कि अदालत ने सभी 11 लोगों को एक राय होकर हत्या करने और बलवे का दोषी ठहराया है। सजा पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस दौरान अदालत में सीबीआई की ओर से अधिवक्ता विपिन कुमार व नीलेश मलिक भी मौजूद रहे।

परिजन बोले हमें न्याय पालिका पर था भरोसा

राजा मानसिंह व उनके दो साथियों की राजस्थान पुलिस द्वारा की गई हत्या में अदालत में दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों पर परिजनों नें संतोष जाहिर किया। मानसिंह के दामाद और मुकदमे के वादी विजय सिंह सिरोही ने कहा कि हमें न्याय पालिका पर पूरा भरोसा था। हमें उम्मीद है कि अदालत दोषियों को सख्त से सख्त सजा सुनाएगी। राजा की बड़ी बेटी गिरेन्द्र कौर उर्फ बंटी, छोटी बेटी कृष्णेन्द्र कौर उर्फ दीपा कौर ने खुशी जाहिर करते हुए इसे न्याय की जीत बताया। नाती दुष्यंत सिंह ने कहा कि समय जरूर लगा मगर हमें न्याय मिला है। इस दौरान मानसिंह की पौत्री गौरी सिंह व भतीजे दीपराज सिंह भी अदालत में मौजूद थे। सभी ने अदालत के निर्णय की तारीफ की और न्याय पालिका पर भरोसा जताया।

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ये अभियुक्त ठहराए गए हैं दोषी

कानसिंह भाटी, तत्कालीन सीओ डीग, वीरेंद्र सिंह, तत्कालीन एसएचओ डीग, सुखराम, एएसआई, जीवनराम, जगमोहन, भंवर सिंह, हरी सिंह, तेर सिंह, छत्रसिंह, पदमा राम, रवि शेखर

ये पुलिसकर्मी हुए बरी

अदालत ने तीन पुलिसकर्मियों को बरी किया है। इनमें से किसी पर भी हत्या का आरोप नही था। इन्हें सीबीआई ने अपनी जांच में कागजों में हेराफेरी करने का आरोपी बनाया था। इनमें जीडी लेखक हरी किशन, कानसिंह सिरवी व गोविंद प्रसाद आरोपी थे। अदालत ने इन सभी को बरी कर दिया है।

बुजुर्ग हो चुके हैं दोषी

राजा मानसिंह हत्याकांड के दोषी बुजुर्ग हो चुके हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं जिन्हें सहारा लेकर चलना पड़ रहा था। जिस समय राजा मानसिंह हत्याकांड हुआ, उस समय कुछ आरोपी प्रौढ़ थे तो कुछ जवानी के ढलान पर थे। फैसला आने में 35 वर्ष लगने पर ये सभी बुजुर्ग की श्रेणी में आ चुके हैं। 11 आरोपियों को दोषी सिद्ध किये जाने का फैसला आने पर इन सभी 11 आरोपियों के चेहरे पर इसका दुख देखा जा सकता था। कई आरोपी ऐसे हैं, जिन्हें सहारा देकर चलाया जा रहा था। एक आरोपी को तो दिखता भी कम है। उन्हें हाथ पकड़कर सहारा देकर चलाया जा रहा था।

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न्याय पाने को जाएंगे हाईकोर्ट

बचाव पक्ष के अधिवक्ता नन्द किशोर उपमन्यु ने बताया कि अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। अदालत के निर्णय का हम सम्मान करते है। हमें विश्वास है कि हाईकोर्ट हमारे साथ न्याय करेगा। अदालत क्या निर्णय सुनाती है, उसका पहले अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।

35 वर्षों में 8 बार फाइनल बहस व 1700 से अधिक पड़ीं तारीख

बहुचर्चित राजा मानसिंह हत्याकांड की सुनवाई में कई उतार चढा़व इस दौरान आए थे। राजा के पोते दुष्यंत सिंह ने बताया कि 35 वर्ष तक चली सुनवाई में 1700 से अधिक तारीखें पड़ी थीं। आठ बार अदालत में फाइनल बहस हुई। हर बहस के बाद लगता था कि अब निर्णय आ जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 17 दिसंबर 1990 को मुकदमा ट्रांसफर हुआ था। हम सभी परिजन तब से लगातार अदालत आ रहे हैं। उन्होंने अदालत के फैसले पर संतोष जाहिर करते हुए इसे न्याय की जीत बताया।

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