आगरा

CM के मंच को जीप से तोड़ने वाले राजा मानसिंह की हत्या मामले में सजा का ऐलान आज

Smart News Team, Last updated: 22/07/2020 10:14 AM IST
  • भरतपुर राजघराना आन, बान, शान के लिए प्रसिद्ध रहा है। राजा मानसिंह हत्याकांड के जड़ में भी आन, बान शान ही रही। विरोधी दलों द्वारा अपने झंडों को उतारे जाने पर राजा मानसिंह कुपित हो गए और उसके बाद जोंगा जीप से मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर में टक्कर मारने, मंच ध्वस्त करने के बाद अंत यह हुआ कि पुलिस ने उन्हें घेरकर गोलियां चलाते हुए उनकी हत्या कर दी।
जब हत्या के बाद लोगों का गुस्सा देख बदलना पड़ा था राजस्थान में मुख्यमंत्री।

आगरा-मथुरा, दिलीप चतुर्वेदी

भरतपुर राजघराना आन, बान, शान के लिए प्रसिद्ध रहा है। राजा मानसिंह हत्याकांड के जड़ में भी आन, बान शान ही रही। विरोधी दलों द्वारा अपने झंडों को उतारे जाने पर राजा मानसिंह कुपित हो गए और उसके बाद जोंगा जीप से मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर में टक्कर मारने, मंच ध्वस्त करने के बाद अंत यह हुआ कि पुलिस ने उन्हें घेरकर गोलियां चलाते हुए उनकी हत्या कर दी। उस समय इस हत्याकांड से राजस्थान के लोगों में कांग्रेस की सरकार के विरोध में इतना रोष फैल गया कि कांग्रेस को राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलना पड़ गया था।

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इस हत्याकांड के कारण उस समय के राजस्थान के मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर को मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ गया था। लोगों में शिवचरण माथुर के प्रति जबरदस्त गुस्सा था। तत्काल कांग्रेस आलाकमान ने शिवचरण माथुर को इस्तीफा देने का निर्देश दिया और माथुर के इस्तीफा देने पर हीरालाल देवपुरा को मुख्यमंत्री बनाया गया।

सात बार रहे निर्दलीय विधायक

राजा मानसिंह ने 1928 से 1942 तक इंग्लैंड में शिक्षा ग्रहण की तथा इंजीनियर की डिग्री प्राप्त की थी। राजा मानसिंह सन 1952 में प्रथम बार विधानसभा में निर्दलीय विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद वह लगातार सात बार निर्दलीय रूप से चुनाव जीतकर विधायक बनते रहे। 1985 में वह आठवीं बार विधायक बनने के लिए निर्दलीय रुप से चुनाव मैदान में थे।

सीएम के हेलीकॉप्टर में मारी जोंगा से टक्कर

1985 के आठवीं विधानसभा चुनाव के दौरान राजा मानसिंह डीग विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे। उनके सामने मैदान में थे कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह। 20 फरवरी 85 को उस समय के मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर विजेंद्र सिंह के समर्थन में चुनावी सभा के लिए डीग आए थे। इसी दिन कांग्रेस समर्थकों ने राजा मानसिंह के झंडों व बैनरों को फाड़ दिया। जब यह बात राजा मान सिंह को पता लगी तो वह इतने कुपित हुए कि अपनी जोंगा जीप लेकर मुख्यमंत्री के सभास्थल पर पहुंचे और मंच में टक्कर मार दी। यही नहीं जोंगे की टक्कर मुख्यमंत्री के हैलीकॉप्टर में मार दी।

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ये मुकदमे हुए थे दर्ज

इस मामले में डीग थाने में हेलीकॉप्टर व मंच तोड़ने के अलग-अलग दो मुकदमे अपराध संख्या 34/85, 35/85 दर्ज हुए थे। जिनमें राजा मानसिंह व अन्य को आरोपी बनाया गया था। ये मुकदमे 20 फरवरी 1985 को लिखे गए थे। अपराध संख्या 37/85 पर पुलिस ने हत्या के प्रयास का मुकदमा भी दर्ज किया था।

राजा मान सिंह की हत्या

इसका खामियाजा राजा मानसिंह को दूसरे दिन जान देकर चुकाना पड़ गया। 21 फरवरी 1985 को राजा मान सिंह को अनाज मंडी के पास पुलिस ने घेर लिया और गोलियां चलाना शुरू कर दिया। इस घटना में राजा मानसिंह और उनके साथ बैठे सुमेर सिंह और हरी सिंह को गोली लगी। भरतपुर अस्पताल में तीनों को मृत घोषित कर दिया गया। राजा मानसिंह की हत्या के बाद भरतपुर में तनाव फैल गया। राजा मानसिंह की हत्या से लोग आक्रोशित थे। ऐसे में पुलिस प्रशासन ने शव का अंतिम संस्कार महल में ही करवाया था।

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भरतपुर राजघराने से मथुरा का रहा है लगाव

भरतपुर राजघराना का असर न केवल भरतपुर बल्कि मथुरा सहित समूचे ब्रज में रहा है। भरतपुर राजघराने से मथुरा का लगाव रहा है। मथुरा में भरतपुर राजघराने की तमाम संपत्ति रही हैं। भरतपुर राजघराने का मथुरा पर कितना असर रहा है इसका प्रमाण यह है कि राजघराने के बच्चू सिंह यहां से सांसद रह चुके हैं। राजघराने के विश्वेंद्र सिंह भी मथुरा से चुनाव लड़ चुके हैं।

हैलीकॉप्टर में टक्कर मारने वाली राजा की सवारी जोंगा हो गयी कबाड़

1985 के विधानसभा चुनाव में राजा मानसिंह की सवारी जिस जोंगा से राजा मानसिंह ने मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर के हैलीकॉप्टर में टक्कर मारी थी, जिस जोंगे से टक्कर मारकर उन्होंने मुख्यमंत्री के मंच को ध्वस्त कर दिया, वह जोंगा यहां कबाड़ हो गयी है। इस हत्याकांड की सुनवायी होने के बाद जोंगा को मथुरा न्यायालय परिसर में ले आया गया था। तब से जोंगा यहीं पर खड़ी रही और यहीं पर वह कबाड़ में तब्दील हो गयी है। बता दें कि आज इस हत्याकांड मामले में मथुरा कोर्ट में सजा का ऐलान होगा।

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