RTO बूथ के साथ मिल थाने में हो रही थी काली कमाई, विजिलेंस के छापे से उड़ गए होश

Smart News Team, Last updated: 18/09/2020 11:29 PM IST
  • सैंया थाने में खनन की गाड़ियों के फर्जी बिलों से हो रही कमाई का भांडा फूट गया है. हर गाड़ी का रेट फिक्स था. विजिलेंस की जांच में कई पुलिस अधिकारी फंस सकते हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर

आगरा: जिले के सैंया थाने की अवैध कमाई के सोर्स की जानकारी लखनऊ तक पहुंच गई है. आरटीओ के बूथ में फर्जी बिल, रॉयल्टी, कम वजन आदि के कागजात तैयार होते थे.थाने में चल रहे इस फर्जीवाड़े को पकड़ने के लिए विजिलेंस की टीम पिछले तीन दिनों से सैंया में जांच के लिए रुकी थी. जिसके बाद छानबीन में जो जानकारियां मिली वह हैरान कर देने वाली हैं.

जानकारी के मुताबिक विजिलेंस टीम को पता चला कि फर्जी बिल बनाने वालों को थाना पुलिस का संरक्षण प्राप्त था. वहां क्या काम होता है यह थाने पर हर किसी को पता था. जिसके बाद भी  वहां पुलिस कर्मी कार्रवाई नहीं करते थे. इस के कारण वहां से महीने की कमाई तो पुलिस को होती ही थी. मध्य प्रदेश से प्रतिदिन 300 से 500 के बीच में गाड़ियां खनन का सामान लेकर आती हैं. विजिलेंस को जानकारी मिली है कि प्रत्येक गाड़ी से दो हजार रुपये महीना तय था. यह रकम कुछ खास लोगों के माध्यम से थाने तक पहुंची थी. यही नही महीनेदारी के अलावा गिट्टी की प्रत्येक गाड़ी से पांच सौ रुपये प्रति चक्कर वसूले जाते थे.

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इस पूरे मामले की जांच विजिलेंस को करनी है. विजिलेंस अगर सभी तथ्यों को अपनी जांच में ले आई तो कई पुलिस कर्मी बुरी तरह फंस सकते हैं. ऐसा नहीं है कि आगरा में पुलिस अधिकारी यह नहीं मान रहे हैं कि थाना पुलिस इस खेल में मिली हुई है. इसके बावजूद किसी के हिसाब से अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि पुलिस को कहां से क्या मिलता था.

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