आगरा में जूता निर्यातकों पर पड़ी दोहरी मार, कच्चे चमड़े पर लगाया 10 फीसदी कर

Smart News Team, Last updated: 03/02/2021 10:01 PM IST
  • सरकार ने कच्चे चमड़े के आयात पर 10 फीसदी कर और बढ़ा दिया है. वहीं, दूसरी और काउंसिल फोर लेदर एक्सपोर्ट की इंपोर्ट लाइसेंस स्कीम भी रद्द कर दी गई है, जिससे जूता निर्यातकों पर दोहरी मार पड़ी है.
आगरा में जूता निर्यातकों पर पड़ी दोहरी मार (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना काल में बाजार बंद होने के कारण आगरा के जूता कारिगरों को मुश्किलें झेलनी पड़ ही रही थीं, साथ ही केंद्रीय बजट पेश होने के बाद जूता कारिगरों की परेशानियां बढ़ा दी हैं. दरअसल, सरकार ने कच्चे चमड़े के आयात पर 10 फीसदी कर और बढ़ा दिया है. वहीं, दूसरी और काउंसिल फोर लेदर एक्सपोर्ट की इंपोर्ट लाइसेंस स्कीम भी रद्द कर दी गई है, जिससे जूता निर्यातकों पर दोहरी मार पड़ी है. बता दें कि कोरोना वायरस के कारण जूता कारिगरों को निर्यात के लिए केवल 40 से 50 फीसदी ऑर्डर ही 2020 बीते साल मिल पाए थे.

युरोपीय देशों में कोरोना वायरस के केसों की संख्या अभी भी काफी है. ऐसे में 2021 में भी जूता कारिगरों को ऑर्डर कम ही मिलने की उम्मीद है. ऐसे में जूता कारिगरों ने बजट में सरकार के स्तर से राहत मिलने की उम्मीद लगाई हुई थी, लेकिन बजट के कारण निर्यातकों की यह उम्मीदें भी टूट गईं. बता दें कि इससे पहले जूता निर्यातक विदेशों से कच्चा माल मंगवाकर केवल टैनिंग कराते थे और उससे पहले चमड़े के आयात पर कोई शुल्क भी नहीं था.

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बताया जा रहा है कि जूते की गुणवत्ता बढ़ाने और निर्यात की संख्या में बढ़ावा देने के लिए जूता कारीगर कई चीजों का उपयोग करते थे और ये भी आयात की जाती थीं. इन चीजों के आयाों पर सीएलई के माध्यम से इंपोर्ट लाइसेंस की स्कीम के जरिए पांच फीसदी की छूट मिल जाती थी. लेकिन जहां एक तरफ इस स्कीम को रद्द किया गया है तो वहीं दूसरी और कच्चे चमड़े के आयात पर भी 10 फीसदी कर लगा दिया गया है. ऐसे में चमड़ा महंगा हो जाएगा और जूते की लागत भी बढ़ जाएगी.

 

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