हरियाली अमावस्या 2020: 19 साल बाद सोमवार को का बना यह खास संयोग

Smart News Team, Last updated: 19/07/2020 08:12 PM IST
  • कई सालों बाद इस बार सावन के पावन महीने में दो सोमवार अमावस्या और पूर्णिमा पर पड़ रहे हैं। सोमवती अमावस्या 20 जुलाई को जबकि 3 अगस्त को सोमवती पूर्णिमा का यह संयोग 47 साल पहले बना था।
भोलेनाथ मंदिर में पूजा करते शिव भगवान के भक्त।

कई सालों बाद इस बार सावन के पावन महीने में दो सोमवार अमावस्या और पूर्णिमा पर पड़ रहे हैं। सोमवती अमावस्या 20 जुलाई को जबकि 3 अगस्त को सोमवती पूर्णिमा का यह संयोग 47 साल पहले बना था। 20 जुलाई को अमावस्या, 27 को सप्तमी व 3 अगस्त को पूर्णिमा पर विशेष योग बन रहे हैं। पं. सुभाष शास्त्री ने कहा कि सावन में पांच सोमवार का योग इससे पहले वर्ष 1973, 1990, 1997 व 2017 में बना था। वर्ष 2024 में भी यह अद्भुत संयोग बनेगा। इस योग में पौधरोपण करने से सभी दोष समाप्त हो जाते हैं।

सावन के तीसरे सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग

सावन के तीसरे सोमवार को कई शुभ योग भी रहेंगे। इस दिन हर कार्य को सिद्धि करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहा है। साथ ही इस दिन अमावस्या भी है, तो यह सोमवार सोमवती अमावस्या के रूप में भी पूजा जाएगा। सावन मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता हैं, जबकि सावन के अंतिम सोमवार को रवि योग रहेगा। ज्योतिष में रवि योग को भी श्रेष्ठ मनोकामना पूरी करने के लिए खास माना जाता है।

बिहार का वह मशहूर मंदिर, जहां शिवलिंग रूप में हैं भगवान शिव के साथ मां पार्वती

पौधरोपण से शांत होते ग्रह के दोष

ज्योतिषाचार्य डॉ. शोनू मेल्होत्रा ने बताया कि इस महीने की अमावस्या पर प्रकृति के करीब आने के लिए पौधरोपण किया जाता है। इस दिन पौधरोपण से ग्रह दोष शांत होते हैं। अमावस्या तिथि का संबंध पितरों से भी माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में भी कहा है कि वह स्वयं पितरों में प्रधान अर्यमा हैं। हरियाली अमावस्या के दिन पौधरोपण से पितर भी तृप्त होते हैं, यानी इस दिन पौधे लगाने से प्रकृति और पितर दोनों ही संतुष्ट होकर मनुष्य को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसलिए इस दिन एक पौधा लगाना शुभ माना जाता है।

भोलेनाथ और पार्वती की पूजा कर मांगेगी पति की लंबी उम्र

इस बार 23 जुलाई को महिलाएं हरियाली तीज का व्रत रखेंगी। व्रत रखकर वह अपने पति की लंबी आयु का वरदान भोलेनाथ से मांगेंगी। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिवजी की पूजा करती हैं। दूसरे दिन सुबह स्नान और पूजा के बाद व्रत पूरा करके पारण करती हैं। मान्यता है कि भोलेनाथ के लिए माता पार्वती ने भी इस व्रत को रखा था।

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