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EMI राहत मामले में RBI को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, आगरा के हैं याचिकाकर्ता

Smart News Team, Last updated: 03/06/2020 02:59 PM IST
  • किश्त अदायगी (ईएमआई) में लोनधारकों को राहत दिए जाने की रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की घोषणा पर सवाल उठाती आगरा के समाजसेवी व्यवसायी गजेन्द्र शर्मा की याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
Supreme Court

किश्त अदायगी (ईएमआई) में लोनधारकों को राहत दिए जाने की रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की घोषणा पर सवाल उठाती आगरा के समाजसेवी व्यवसायी गजेन्द्र शर्मा की याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। वेब के माध्यम से हुई इस प्रक्रिया में देश की सर्वोच्च अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक एवं केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है। आरबीआई से इस मामले में एक हफ्ते के अंदर लिखित में जवाब मांगा है कि किस तरह से लॉक डाउन से परेशान लोन धारक को राहत दी जा रही है। हाल में तीन महीने की अवधि की यह घोषणा बढ़ा कर छह महीने की जा चुकी है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, एसके कौल एवं एमआर शाह की पीठ ने केन्द्र एवं आरबीआई से 27 मार्च के उस आदेश की व्याख्या करने को कहा है जिसमें कहा गया था कि लोन धारकों को तीन महीने की अवधि के लिए ईएमआई भरने की जरूरत नहीं होगी। याचिका में आरबीआई की तरफ से घोषित इस राहत में ब्याज देयता कायम रहने की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस घोषणा ने करोड़ों लोन धारकों के साथ मजाक किया है। घोषणा तो इस तरह की गई कि मोरेटोरियम अवधि में राहत दी जा रही है, लेकिन ईएमआई न भरने वाले को इस अवधि की ब्याज तो देनी ही पड़ेगी, उलटा देय ब्याज पर भी ब्याज देनी होगी।

याचिका कर्ता गजेन्द्र शर्मा की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव दत्ता ने मामले को रखते हुए कहा कि मोरेटोरियम की अवधि को बढ़ा कर छह महीने किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनके मुवक्किल को अपने लोन पर जो ब्याज देनी है, उसका निर्धारण कोर्ट में मामले का निर्णय आने के बाद ही किया जाए। कोर्ट से अपील की गई कि ब्याज की गणना इस प्रकार से न हो कि याचिका कर्ता को ब्याज पर ब्याज देनी पड़े। यदि राहत की घोषणा है तो वाकई दी जानी चाहिए।

आरबीआई की थी यह घोषणा

लॉकडाउन घोषित होने के बाद 27 मार्च 2020 को आरबीआई ने परिस्थितियों को देखते हुए लोन धारकों को राहत देने के लिए तीन महीने तक किश्त जमा करने से मुक्त रखने का निर्णय लिया था। एक मार्च से 31 मई 2020 तक के इस निर्णय (मोरेटोरियम) को बाद में बढ़ा कर 31 अगस्त कर दिया गया।

राहत नहीं, उलटा नुकसान

याचिका कर्ता गजेन्द्र शर्मा ने 29 पृष्ठ की याचिका में सभी पहलुओं को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा। अपनी सालाना आमदनी, आईसीआईसीआई बैंक में अपने लोन को रखते हुए बताया कि उनको बैंक से क्या जवाब मिला। इसमें उनको बताया गया कि यदि वे तीन महीने की किश्त नहीं भरते हैं तो इस अवधि की ब्याज को कुल लोन में जोड़ लिया जाएगा। इसको भरने के दो विकल्प होंगे। या तो ईएमआई को बढ़ा दिया जाए। या फिर लोन की अवधि को बढ़ा दिया जाए। दोनों ही विकल्प में गजेन्द्र शर्मा को नुकसान था। इसको लेकर वे व्यथित हुए। उनका कहना था कि जब वह एक कारोबार चलाते हुए बढ़ी हुई ईएमआई नहीं झेल पा रहे फिर देश के करोड़ों लोग कैसे सहन कर पाएंगे।

ब्याज पर ब्याज क्यों

इस याचिका को तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता राहुल शर्मा ने बताया कि मसला सिर्फ मोरेटोरियम तक नहीं था। इसके दो बिंदु आपत्तिजनक हैं। प्रचारित किया गया कि सरकार ने लोन चुकाने में राहत दी है। यह कहीं से भी राहत नहीं। इसमें हरेक लोन धारक को ब्याज पर ब्याज देनी होगी। जिस अवधि में लोन नहीं चुकेगा, उस अवधि में मूल धन के साथ ब्याज की देयता नहीं होगी। बैंक के नियमों के अनुसार दोनों पर ब्याज देय होगी। मतलब साफ है, प्रचारित किया जा रहा है कि मोरेटोरियम है, जबकि लोगों को ब्याज पर ब्याज देनी होगी।

जीने का अधिकार दीजिए

याचिकाकर्ता गजेन्द्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने तो जीने का अधिकार मांगा है। लॉकडाउन में उनके आमदनी के स्रोत खत्म हो गए। लेकिन सरकार अपील करती है कि अपने कर्मियों का समय से भुगतान किया जाए। ऐसे समय जबकि उनके पास लॉकडाउन अवधि के बढ़े हुए खर्च दायित्व में शामिल हो गए, वो किस तरह से अपने लोन का प्रीमियम जमा कर पाएंगे। यदि आरबीआई की घोषणा के अनुसार बैंक ने उनसे तीन महीने प्रीमियम नहीं लिया तो उन पर लोन का बोझ और बढ़ जाएगा। बार बार बढ़ रहे लॉकडाउन की अवधि के घाटे की पूर्ति करना इतना आसान नहीं होगा। उसमें यदि लोन भी सिर पर हो, उसकी मियाद बढ़ जाए, प्रीमियम बढ़ जाए, तो आम आदमी किस तरह जी सकेगा। तनाव ही उसको खत्म कर देगा।

आगरा के लगभग पांच लाख लोग होंगे लाभान्वित

गजेन्द्र शर्मा की याचिका पर यदि उपभोक्ताओं के पक्ष में निर्णय जाता है तो इसका फायदा अकेले उनको ही नहीं मिलेगा। आगरा के कम से कम पांच लाख लोन धारक इसका लाभ उठाएंगे। पूरे देश की बात की जाए तो यह संख्या करोड़ों में हो जाएगी।

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