विश्व तंबाकू निषेध दिवस: तंबाकू से 40 तरह के कैंसर, 25 दूसरी बीमारियों का खतरा

Shankar Pandit, Last updated: 31/05/2020 02:12 PM IST
  • बीड़ी-सिगरेट और दूसरे तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वाले जीवन से खिलवाड़ करते हैं। बाद में जमा-पूंजी को इलाज पर फूंक देते हैं। यह विश्व भर की समस्या है। इसीलिए 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है।
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बीड़ी-सिगरेट और दूसरे तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वाले जीवन से खिलवाड़ करते हैं। बाद में जमा-पूंजी को इलाज पर फूंक देते हैं। यह विश्व भर की समस्या है। इसीलिए 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिन लोगों को इसके खतरे बताए जाते हैं। इस बार जागरूकता कार्यक्रम संभव नहीं है। लिहाजा सोशल मीडिया, फेसबुक लाइव, रेडियो/वीडियो प्रसारण, विज्ञापनों के जरिए धूम्रपान के खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करेंगे।

स्टेट टोबैको कंट्रोल सेल के सदस्य और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत बताते हैं कि युवा शुरू में दिखावे के चक्कर में सिगरेट या दूसरे तंबाकू उत्पादों की गिरफ्त में आते हैं। आदत हो जाने पर इससे छुटकारा पाना कठिन हो जाता है। विज्ञापनों और फिल्मी दृश्यों को देखकर युवाओं को लगता है कि सिगरेट पीने से लड़कियां उनके प्रति आकर्षित होंगी। उनका स्टेटस प्रदर्शित होगा। उनकी यही गलत सोच उन्हें धूम्रपान के अंधेरे कुएं में धकेल देती है। उनका कहना है कि धूम्रपान करने या अन्य किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करने वालों को करीब 40 तरह के कैंसर और 25 अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आने की पूरी आशंका रहती है। इसमें मुंह और गले का कैंसर प्रमुख है। इसके अलावा इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है, जिससे संक्रामक बीमारियों का भी पूरा खतरा रहता है। धूम्रपान करने वालों के फेफड़ों तक करीब 30 फीसद ही धुआं पहुंचता है, शेष बाहर निकलने वाला करीब 70 फीसद धुआं उन लोगों को प्रभावित करता है, जो धूम्रपान नहीं करते। यह (सेकंड स्मोकिंग) सेहत के लिए और खतरनाक होती है।

धूम्रपान से आती है नपुंसकता

डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि धूम्रपान कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा लगा पाना कठिन है। युवा इसके चक्कर में नपुंसकता तक का शिकार हो रहा है। धूम्रपान शुक्राणुओं की संख्या को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके चलते नपुंसकता का शिकार बनने की सम्भावना बढ़ जाती है । इसी को ध्यान में रखते हुए इस साल की थीम भी युवाओं पर केन्द्रित है ताकि उनको इस बुराई से बचाया जा सके।

बेहद खतरनाक हैं आंकड़े

वैश्विक वयस्क तम्बाकू सर्वेक्षण-2 (गैट्स-2) 2016-17 से संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश में तम्बाकू का सेवन करने वालों का आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है। अब से 10 साल पहले यानि 2009-10 में प्रदेश में करीब 33.9 फीसद लोग गुटखा या अन्य तंबाकू सेवन कर रहे थे, जो कि 2016-17 में बढ़कर 35.5 फीसद पर पहुंच गया है। धूम्रपान करने वालों की तादाद में मामूली गिरावट जरूर देखने को मिली है। दस साल पहले जहां 14.9 फीसद आबादी धूम्रपान करती थी, वह सन 2016-17 में 13.5 फीसद पर आ गयी है। खैनी और धुआं रहित अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वालों की तादाद 2009-10 में 25.3 प्रतिशत थी , वह 2016-17 में बढ़कर 29.4 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

तंबाकू से हर साल करीब 12 लाख लोग दम तोड़ देते हैं। सार्वजनिक स्थलों और स्कूलों के आस-पास बीड़ी-सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक के लिए केंद्र सरकार सन 2003 में सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) ले आई है। इस पर सख्त अमल की जरूरत है। पान मसाला गुटखा खाकर थूकना दंडनीय अपराध है। इससे कोरोना वायरस फैलने का खतरा है। डॉ. पीके शर्मा, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम आगरा।

क्या कहता है अधिनियम

सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा)-2003 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बीड़ी-सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों से लोगों को बचाने के लिए लाया गया। पांच प्रमुख धाराएं इस पर अंकुश लगाने के लिए प्रमुख हैं।

धारा-4:- बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, रेलवे प्रतीक्षालय, न्यायालय, शैक्षणिक संस्थान, कैंटीन, कैफे, क्लब, होटल, रेस्टोरेंट आदि पर धूम्रपान पर पूरी तरह से रोक है। उल्लंघन करने पर 200 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इसके लिए सब इन्स्पेक्टर स्तर का अधिकारी अधिकृत है।

धारा-5:- सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन, प्रोत्साहित करने और प्रेरित करने पर रोक है। उल्लंघन करने पर एक हजार रुपये का जुर्माना या दो साल की सश्रम कैद या दोनों का दण्ड मिल सकता है।

धारा-6 ए:- इसके तहत सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों को 18 साल से कम उम्र के बच्चों द्वारा बेचे जाने पर पूरी तरह रोक का प्रावधान किया गया है।

धारा-6 बी:- शैक्षणिक संस्थाओं से 100 गज की दूरी में सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाई है। इस दायरे में कोई भी इस तरह के उत्पाद नहीं बेच सकता। उल्लंघन करने पर 200 रूपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

धारा-7:- सिगरेट-गुटखा व अन्य तम्बाकू उत्पादों के रैपर पर 85 फीसद हिस्से में इसके सेवन से होने वाली बीमारी की चित्रित चेतावनी और भय पैदा करने वाली तस्वीर लगाना अनिवार्य किया गया है।

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