लकड़ियों पर बनाई गई थी ताजमहल की इमारत, 15 वर्षों में तैयार हुआ था सिर्फ गुंबद

Smart News Team, Last updated: Sat, 3rd Jul 2021, 11:19 AM IST
  • ताजमहल को बनाने का काम कई चरणों में पूरा हुआ. आपको ये जानकर हैरान होगी कि ताजमहल के सिर्फ गुंबद को बनाने के लिए 15 साल का समय लगा था. बचे सात सालों में बाकी काम पूरा किया गया था. उस समय ताजमहल को बनाने में 3.2 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.
ये बात बेहद ही हैरान करने वाली है कि ताजमहल की इमारत लकड़ी पर बनाई गई है. (Credit: Taj Mahal tourism government site)

दुनिया के सात अजूबों में से एक आगरा का ताजमहल अपनी खूबसूरती और वास्तुकला को लेकर विश्वभर में प्रसिद्ध है. 'प्यार की निशानी' कहे जाने वाले ताजमहल को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. 42 एकड़ में फैले इस अद्भुत ताजमहल को बनाने के लिए करीब 20 साल से भी अधिक का समय लगा था. इसे बनाने की शुरुआत 1631 में हुई थी और यह 1653 में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ.

पूर्णिमा की रात को सुनहरा नजर आता है 'ताजमहल': गुंबदनुमा यह इमारत बनाने के लिए 28 किस्म के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था. 'ताजमहल' को बनाने के लिए पत्थर बगदाद, अफगानिस्तान, तिब्बत, मिश्र, रूस, ईरान आदि देशों के अलावा देश के कई हिस्सों से भी मंगवाए गए थे. इन पत्थरों के कारण ही ताजमहल तीन रंग बदलता है. सुबह के समय यह गुलाबी रंग का नजर आता है. दिन में सफेद तो वहीं पूर्णिमा की रात को ताजमहल सुनहरा दिखाई देता है. यह इमारत फारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला की प्रतीक है.

 

गुंबदनुमा यह इमारत बनाने के लिए 28 किस्म के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था. (Credit: Taj Mahal tourism government site)

केवल गुंबद को बनाने में लगे ते 15 साल: ताजमहल को बनाने के लिए 22,000 मजदूरों के साथ ही 1,000 हाथियों से भी काम लिया गया था. यह हाथी संगमरमर के पत्थरों को एक जगह से दूसरी जगह पर ढोने का काम करते थे. ताजमहल को बनाने का काम कई चरणों में पूरा हुआ. आपको ये जानकर हैरान होगी कि ताजमहल के सिर्फ गुंबद को बनाने के लिए 15 साल का समय लगा था. बचे सात सालों में बाकी काम पूरा किया गया था. उस समय ताजमहल को बनाने में 3.2 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.

लकड़ी पर टिकी है ताजमहल की इमारत: ये बात बेहद ही हैरान करने वाली है कि ताजमहल की इमारत लकड़ी पर बनाई गई है. ताजमहल को यमुना नदी के किनारे लकड़ी पर बनाया गया है. दरअसल, जैसे-जैसे लकड़ी को नमी मिलती है वह अधिक मजबूत होती जाती है. खास बात तो यह है कि ताजमहल कुतुब मिनार से भी पांच फीट ऊंचा है.

ताजमहल के चारों तरफ चार मीनारें बनाई गई हैं. यह मीनारें ताजमहल को संतुलन देती हैं.

प्राकृतिक आपदा आने पर गुंबद पर नहीं गिरेंगी ताजमहल की चार मिनारें: ताजमहल के चारों तरफ चार मीनारें बनाई गई हैं. यह मीनारें ताजमहल को संतुलन देती हैं. खास बात तो यह है कि कोई प्राकृतिक आपदा आने पर भी यह मकबरे पर नहीं गिरेंगी. दरअसल, इन मीनारों को हल्का-सा बाहर की तरफ झुकाव दिया गया है. इससे कोई आपदा आए तो यह मकबरे पर न गिरकर बाहर की तरफ गिरें.

 

'प्यार की निशानी' कहे जाने वाले ताजमहल को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं.(Credit: Taj Mahal tourism government site)

प्राकृतिक आपदा आने पर गुंबद पर नहीं गिरेंगी ताजमहल की चार मिनारें: ताजमहल के चारों तरफ चार मीनारें बनाई गई हैं. यह मीनारें ताजमहल को संतुलन देती हैं. खास बात तो यह है कि कोई प्राकृतिक आपदा आने पर भी यह मकबरे पर नहीं गिरेंगी. दरअसल, इन मीनारों को हल्का-सा बाहर की तरफ झुकाव दिया गया है. इससे कोई आपदा आए तो यह मकबरे पर न गिरकर बाहर की तरफ गिरें.

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