Chandra Darshan 2022: अमावस्या के बाद जरूर करें चंद्रदर्शन, जानें तिथि, समय और महत्व

Pallawi Kumari, Last updated: Tue, 1st Mar 2022, 5:43 PM IST
  • हिंदू धर्म में अमावस्या के बाद चंद्रदर्शन का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि अमावस्या के दिन व्रत रखना चाहिए और इसके बाद अगले दिन चांद देखने के बाद व्रत खोलना चाहिए. ऐसा करने से मानसिक परेशानी, तनाव, दरिद्रता खत्म हो जाती है.
चंद्रदर्शन (फोटो-सोशल मीडिया)

चंद्रदर्शन भारतीय प्राचीन परपंरा में विशेष महत्व माना जाता है. लेकिन अमावस्या के बाद चंद्र दर्शन के पहले दिन को चंद्र दर्शन के रूप में जाना जाता है. अमावस्या के अगले दिन को चंद्रमा भगवान के सम्मान में चंद्र दर्शन के रूप में मनाया जाता है. इस दिन चांद देखना काफी शुभ माना जाता है. इससे कई धार्मिक महत्व जुड़े हुए हैं.इस बार फाल्गुन अमावस्या बुधवार 2 मार्च के दिन पड़ रही है. इसके अगले दिन गुरुवार 3 मार्च को चंद्रदर्शन किया जाएगा. 

चंद्रमा वैसे भी ऐश्वर्य का प्रतीक माना गया है मान्यता है कि इस दिन व्रथ करने और चंद्रमा देव का अनुष्ठान करने वालों को अंतहीन भाग्य और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस दिन दान पुण्य भी किया जाता है. 

Mahashivratri 2022: 6 राजयोग में मनेगी महाशिवरात्रि, इन मुहूर्त में करें भोले की पूजा

चन्द्र दर्शन का महत्व

हिन्दू धर्म में सभी नौ ग्रहों में चन्द्रमा को विशेष स्थान दिया गया है. चन्द्रमा का हमारे जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है. अमावस्या के अगले दिन चंद्रमा दर्शन करने वाले लोगों को धन ऐश्वर्य और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है. साथ ही इस दिन चंद्रदर्शन करने से पूर्वजों का आशीर्वाद भी मिलता है.

चंद्र दर्शन की पूजा विधि

शाम में चंद्रमा निकलने के बाद पहले चंद्रमा की विधिवत पूजा करें. फिर चंद्र देव को रोली, फल और फूल आदि चढ़ाएं. चंद्रमा को अर्घ्य देकर प्रणाम करें और इसके बाद अपना व्रत खोलें.

चंद्र दर्शन मार्च 2022 दिनांक: 3 मार्च, गुरुवार.

प्रतिपदा तिथि का समय: मार्च 02, 11:04 अपराह्न - मार्च 03, 9:37 अपराह्न

चंद्र दर्शन का पूजा मंत्र

ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि, तन्नो चन्द्र: प्रचोदयात ।।

चंद्र देव की उपासना के वैदिक मंत्र

ॐ इमं देवा असपत्नं ग्वं सुवध्यं।

महते क्षत्राय महते ज्यैश्ठाय महते जानराज्यायेन्दस्येन्द्रियाय इमममुध्य पुत्रममुध्यै

पुत्रमस्यै विश वोsमी राज: सोमोsस्माकं ब्राह्माणाना ग्वं राजा।

चंद्र देव की उपासना का पौराणिक मंत्र

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम ।

नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।।

Amavasya 2022: हिंदू वर्ष के अंतिम अमावस्या पर बन रहे दो खास योग, जानें महत्व और उपाय

 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें