Pitru Paksha: मृत परिजन के देहांत की तिथि मालूम न हो तो पितृ पक्ष में ऐसे करें श्राद्ध

Pallawi Kumari, Last updated: Thu, 16th Sep 2021, 2:24 PM IST
  • हिंदू धर्म में श्राद्ध का खास महत्व होता है. लोग पूर्वजों का श्राद्ध कर उनका आशीर्वाद पाते हैं. लेकिन ऐसा भी होता है कि कई बार पूर्वजों के देहांत की तिथि मालूम नहीं होती है. ऐसे में ये समझ नहीं आता कि उनका श्राद्ध किस दिन और कैसे किया जाए.
पितृ पक्ष में ऐसे करें पितरों का श्राद्ध . फोटो साभार- हिन्दुस्तान लाइव

पितृ पक्ष पर पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध किया जाता है. भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू हो कर अमावस्या तक की तिथियों के अनुसार सभी अपने-अपने पितरों को याद करते है और उनका तर्पण करते है. इन 16 तिथियों पर पितरों के नाम से श्राद्ध कर्म किया जाता है. इस साल पितृ पक्ष की तिथि 20 सितंबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर तक चलेगा.

पूर्वजों का श्राद्ध करने के लिए श्राद्ध की 16 तिथियां होती हैं, पूर्णिमा, प्रतिपदा, द्वि‍तीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या. इनमें से जो भी एक तिथि पर व्यक्ति की मृत्यु होती है चाहे वह कृष्ण पक्ष की तिथि हो या शुक्ल पक्ष की. पितृ पक्ष में जब ये तिथि आती है तो जिस तिथि में व्यक्ति की मृत्यु हुई है उस तिथि में उसका श्राद्ध करने का विधान है.

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लेकिन कई बार ऐसा होता कि हमें अपने मृत पूर्वजों की देहांत की तिथि मालूम नहीं होती. ऐसे में ये सबसे बड़ी समस्या होती है कि उनका श्राद्ध कैसे और किस तिथि पर किया जाएगा. इसका भी उपाय है. मृत पितरों की तिथि मालूम नहो तो बताए गए इन तरीकों से उनका श्राद्ध किया जा सकता है. कहा जाता है कि पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद मिलता है.

तारीख ना मालूम होने पर ऐसे करें पितरों का श्राद्ध-सुहागिन माताओं का देहांत हो गया हो और उनकी तिथि मालूम न हो तो ऐसे में नवमी तिथि को उनका श्राद्ध करना चाहिए. घर में अगर किसी की अकाल मृत्यु या अचानक मृत्यु हुई हो तो ऐसे पूर्वजों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को करना चाहिए. घर में यदि पितरों की मृत्यु तिथि का मालूम न हो तो उस समय अमावस्या के दिन उन सबका श्राद्ध अवश्य करना चाहिए. श्राद्ध के बाद किसी पुरोहित या ब्राह्मण को अपनी इच्छा और शक्तिनुसार दान-पुण्य करना चाहिए. 

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