Dhanteras 2021: धनतेरस पर कुबेर देव के इस सिद्ध मंत्र का करें जाप, लॉकर कभी नहीं होगा खाली

Pallawi Kumari, Last updated: Sun, 31st Oct 2021, 11:06 AM IST
  • पंचदिवसीय दीपोत्सव त्योहार की शुरुआत धनतरेस के दिन से ही हो जाती है. इस बार धनतेरस 2 नवंबर 2021 को है. इस दिन भगवान धनवंतरि, गणेश-लक्ष्मी और कुबेर देव की भी पूजा की जाती है. कुबेर देव की पूजा से धनवैभव की प्राप्ति होती है. पूजा करते समय कुबेर देव का अमोघ मंत्र का जाप जरूर करें.
 धनतरेस पर कुबेर देव मंत्र का जाप जरूरी.

दिवाली को दीपोत्सव और धनवैभव का त्योहार कहा जाता है. इस घर पूजा पाठ कर माता लक्ष्मी को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाने के लिए पूजा पाछ की जाती है. वहीं धन के देवता भगवान कुबेर की भी पूजा इसी दिन होती है. धनतेरस के दिन से ही दीवाली की शुरुआत हो जाती है और धनतरेस के दिन से ही घर की सुख समृद्धि और वैभव के लिए पूजा पाठ, विधि और नियम शुरू हो जाते हैं. धनतरेस से लेकर दिवाली ऐसा समय होता है जब घर पर लक्ष्मी का वास होता है माना जाता है कि उचित ढंग से की गई पूजा पाठ और उपाय से माता लक्ष्मी प्रसन्न हो गई तो वह सालभर घर पर वास करती है. 

वहीं धनतरेस के दिन धन के स्वामी कुबेर की पूजा करने का भी विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि अगर मां लक्ष्मी की कृपा से धन की वर्षा होती है तो भगवान कुबेर आपके धन संपत्ति की रक्षा करते हैं. इसलिए धनतेरस के दिन सुख, संपत्ति और वैभव प्राप्ति के लिए कुबरे देव की पूजा की जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कुबरे देव भगवान शिव के प्रिय सेवक हैं. कुबरे देव को भगवान शिव से धन का देव होने का सौभाग्य प्राप्त है.

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कुबेर मंत्र का जाप- कुबेर देव का मंत्र 'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।' इसे देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव का अमोघ मंत्र कहा जाता है. ध्यान रखें मंत्र जप करते समय इसका उच्चारण सही और विधिपूर्वक होना चाहिए. पूजा के बाद जाने-अंजाने हुई भूलचूक के लिए भी क्षमा याचना जरूर करनी चाहिए.

कुबेर देव पूजा विधि- नहा धोकर स्वस्छ कपड़े पहन लें. फिर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं. भगवान कुबेर की प्रतिमा को तिलक करें और तिजोरी में चावल हल्दी और रोली का तिलक लगाएं. हाथ में फूल रखकर भगवान कुबेर का ध्यान करते हुए मंत्र का जाप करें. इसके बाद कुबेर भगवान को प्रसाद चढ़ाएं.

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