Shanidev Puja Vidhi: भाद्रपद का पहला शनिवार आज, इस तरह करेंगे पूजा तो बनी रहेगी शनिदेव की कृपा

Pallawi Kumari, Last updated: Sat, 28th Aug 2021, 7:00 AM IST
  • 28 अगस्त यानी आज भाद्रपद मास का पहला शविलार है. शनिवार को भगवान शनि देव की विशेष पूजा का विधान होता है. वहीं मान्यता है कि भाद्रपद मास में शनि देव की विधि विधान से की गई पूजा का विशेष फल मिलता है.
भाद्रपद का पहला शनिवार आज, फोटो साभार-लाइव हिन्दुस्तान

शनिदेव को सूर्य पुत्र और कर्मफलदाता भी कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय और दंड का देवता कहा जाता है. अच्छे कर्मों के लिए शनिदेव खुश होकर जीवन में खुशहाली भर देते हैं . लेकिन बुरे कर्मों के लिए वह दंड भी देते हैं. इसलिए उन्हें प्रकृति में संतुलन रखने वाला देवता भी कहा जाता है. क्यों कि वह हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए उनकी खास पूजा की जाती है.

शनिदेव की पूजा विधि- शनिवार को सुबह उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ कपड़ें पहनें, फिर पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाए. लोहे से बनी शनि देव की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं. अब चावलों के चौबीस दल बनाएं और इसमें मूर्ति स्थापित करें. काले तिल, फूल, धूप, काला वस्त्र, सरसों या तिल का तेल आदि से शनिदेव की अराधना करें. 

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शनिदेन के दस नामों का उच्चारण- शनिवार को शनिदेव की पूजा के दौरान उनके 10 नामों  कोणस्थ, कृष्ण, पिप्पला, सौरि, यम, पिंगलो, रोद्रोतको, बभ्रु, मंद, शनैश्चर का उच्चारण करना शुभ माना जाता है.  नामों के उच्चारण के बाद पीपल पेड़ के तने पर सूत के धागे से 7 बार परिक्रमा करें. आखिर में शनिदेव के मंत्र 'शनैश्चर नमस्तुभ्यं नमस्ते त्वथ राहवे। केतवेअथ नमस्तुभ्यं सर्वशांतिप्रदो भव' का जाप करें.

शनिवार को शनि देव के सथ करें हनुमान की पूजा- धार्मिक ग्रंथों के मुतबिक, शनिवार के दिन सूर्यास्त के बाद हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए. पूजा मे सिंदूर जरूर चढ़ाएं. सिंदूर हनुमान जी को प्रिय हैं. काले तिल के तेल से दीपक जलाकर हनुमान जी की आरती करें. पूजा में नीले रंग के पुष्प का उपयोग शुभ माना जाता है.

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