सावन के महीने में अगर नहीं रख पाए व्रत तो इन 4 कामों से शिव जी को करें प्रसन्न

Smart News Team, Last updated: Mon, 16th Aug 2021, 11:29 AM IST
  • सावन का महीना 25 जुलाई से शुरू होकर अब 22 अगस्त को खत्म होने के कागार पर है. ये महीना भोलेनाथ को समर्पित माना जाता है. ऐसे में अगर कोई भी विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा अर्चना करता है तो उस पर भगवान शिव की कृपा बरसती रहेगी.
सावन में शिव की पूजा

सावन का महीना धार्मिक अनुष्ठान और पूजा पाठ के नजरिए से काफी शुभ होता है. हालांकि इस महीने में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. चातुर्मास के पहले महीने को सावन कहा जाता है. सावन का महीना पूरी तरह से भगवान शिवो को समर्पित होता है. इस साल सावन की शुरूआत 25 जुलाई रविवार से हुई, और 22 अगस्त यानी रक्षाबंधन को खत्म होने वाला है. चारों तरफ का वातावरण सावन के महीने में लगता है शिवमय हो गया है. शिव जी की कृपा बनी रहे इसके लिए भक्त शिव मंदिर जाकर उनका अभिषेक करते हैं हर रोज. कुछ शिव के भक्त ऐसे भी हैं जो पूरे सावन व्रत रखते हैं. तो कुछ लोग सावन के सोमवार को व्रत रखना अति उत्तम मानते हैं. हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो किसी कारणवश सावन के महीने में व्रत नहीं रख पाते हैं. उनके लिए ज्योतिषाचार्य डॉ अरविंद मिश्र का कहना है कि निराश ना हों. बस कुछ बातों का ध्यान रखें इससे शिव की कृपा आप पर बनी रहेगी.

  1. शिव परिवार की पूजा करें

सावन के महीने में अगर आप किसी कारण से व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो नियमित रूप से शिव परिवार की पूजा करना ना भूलें. ऐसी मान्यता है कि जो लोग शिव जी के पूरे परिवार की पूजा करते हैं इन पर मां पार्वती और भोलेनाथ दोनों का आशीर्वाद बना रहता है. इतना ही नहीं बल्कि उनके वैवाहिक जीवन में जो भी संकट आ रहे हैं वो सब दूर हो जाता है, और परिवार में खुशियां बनी रहती हैं.

 2. शिवलिंग का करें अभिषेक

शिवलिंग को शास्त्रों में काफी शक्तिशाली माना गया है. अगर आप शिवलिंग पर सावन के महीने में हर दिल जलाभिषेक करते हैं तो इससे भोलेनाथ प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सारे कष्ट दूर कर देते हैं. 

3. करें शिवमंत्र का जाप

जितना ज्यादा से ज्याद संभव हो पाए सावन के महीने में शिव जी के मंत्रों का जाप करें. इससे भगवान शिव और पार्वती की कृपा आप पर बरसती रहती हैं. ऐसे में आप ऊं नम: शिवाय जो शिव जी का पंचाक्षर मंत्र है उसकी जाप कर सकते हैं. ये मंत्र बहुत ही ज्यादा श्रेष्ठ होता है. अगर इस मंत्र में से ऊं हटा दें तो सिर्फ पांच अक्षर का होगा. इसलिए इसे पंचाक्षर मंत्र कहते हैं. इसके अलावा अगर आप चाहें तो रुद्रष्टक, लिंगाष्टत, पंचाक्षर स्तोत्र या फइर शिव सहस्त्रनाम का पाठ करें. क्योंकि ये मान्यता है कि शिव मंत्रों का जाप सावन में करने से अभीष्ठ फल की प्राप्ति होती है. 

4. भजन और कीर्तन- महादेव को समर्पित भजन और कीर्तन भी आप चाहें तो इस महीने में कर सकते हैं. जो लोग श्रद्धापूर्वक भजन कीर्तिन करते हैं उनसे भोलेनाथ बेहद ही खुश होते हैं. 

 

 

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