आगरा

अच्छी खबर: जानें कैसे योद्धाओं के हौसले से हार रहा खतरनाक कोरोना

Smart News Team, Last updated: 30/06/2020 07:20 PM IST
  • कोरोना काल में दिन रात सैंपल टेस्ट करने वाले और संक्रमितों को घरों से लेकर आने वाले कोरोना वॉरियर्स से कोरोना भी हार गया है।
योद्धाओं के हौंसले से हार रहा खतरनाक कोरोना

कोरोना काल में दिन रात सैंपल टेस्ट करने वाले और संक्रमितों को घरों से लेकर आने वाले कोरोना वॉरियर्स से कोरोना भी हार गया है। लंबे समय तक संक्रमितों के बीच काम करने, अलग तरह का खानपान और घर से दूर क्वारंटाइन रहने के बाद उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ गई है। इन लोगों को पहनने के लिए रोज नए सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं।

फरवरी माह के अंतिम सप्ताह से एसएनएमसी की माइक्रोबायोलॉजी लैब में कोरोना का टेस्ट करने वाले योद्धाओं ने अपने काम से साबित कर दिखाया है कि वह मानव सेवा के लिए ही बने हैं। इस काम को पूरी ईमानदारी के साथ करने में उन्हें कतई संकोच नहीं है। उनके पास सैंपल आता है तो उन्हें यह नहीं मालूम होता है कि ये संक्रमित है अथवा नहीं। इसी तरह से सैंपल लेने वालों को भी इस बारे में जानकारी नहीं होती है। रेस्क्यू टीम का काम भी आसान नहीं है। उन्हें तो सीधे संक्रमित केस को घर से लेकर आना होता है।

संक्रमितों के बीच लगातार संपर्क में रहने के कारण अब उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ गई है। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा इन सभी का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उन्हें रोज एन-95, थ्रीलेयर के मास्क, गल्ब्स, फेस शील्ड, पीपीई किट, सेनेटाइजर, हैंडवाश सैल्यूशन दिया जाता है। इन लोगों को सात दिन बाद साप्ताहिक अवकाश भी दिया जाता है, लेकिन ये लोग घर नहीं जा सकते हैं। इन्हें किसी गेस्ट हाउस में ही क्वारंटाइन रहना होता है। ऐसे लोगों को विटामिन सी दी जाती हैं। खाने में शाकाहारी भोजन दिया जाता है। माइक्रोबायोलॉजी लैब में आने पर टेस्ट भी होता है।

माइक्रोबायोलॉजी लैब एवं नोडल टेस्टिंग विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल का कहना है कि लैब में काम करने वाले लोगों का पूरा ध्यान रखा जाता है। उनके टेस्ट भी होते हैं। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी रहे, इसके लिए उनके खानपान और दवाइयों का विशेष ध्यान रखा जाता है। यही वजह है कि अभी तक स्टाफ में सभी लोग स्वस्थ हैं।

प्रभारी आरआरटी डॉ. अंशुल पारीक ने कहा कि मेरे स्टाफ का काम काफी खतरनाक है। उन्हें सीधे संक्रमितों के संपर्क में रहना होता है। उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाता है। उन्हें भी घर से बाहर क्वारंटाइन किया जाता है। भोजन और दवा के साथ सुरक्षा उपरकरण समय से उपलब्ध कराए जाते हैं।

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