Lunar Eclipse: शुक्रवार को लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानें कितना समय रहेगा ग्रहण काल

Pallawi Kumari, Last updated: Thu, 18th Nov 2021, 8:30 PM IST
  • 19 नवंबर शुक्रवार को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लग रहा है. नासा के अनुसार यह सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण होगा. इस चंद्र ग्रहण की अवधि लगभग 6 घंटे बताई जा रही है. लोकेशन और टाइमजोन के मुताबिक ग्रहण काल निर्भर करता है. जानते हैं भारत में कितने बजे कल चंद्र ग्रहण लगने वाला है और इसकी अवधि क्या होगी.
19 नवंबर को लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानिए भारत में क्या होगा ग्रहण काल.

शुक्रवार 19 नवंबर को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है. इसके बाद अब 8 दिसंबर 2022 में चंद्र ग्रहण लगेगा. इस ग्रहण को भारत के पूर्वोत्तर इलाकों में देखा जा सकेगा. अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ हिस्सों में भी इसे देखा जा सकेगा. भारत के अलावा उत्तर और दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में देखा जा सकेगा. भारत में ग्रहण आंशिक नहीं उपथाया दिखाई देगी, जिसे नग्न आंखों ने नहीं देखा जा सकेगा. इसे देखने के लिए खास तरह के उपकरणों की जरूरत होगी है. उपछाया होने के कारण भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा.

19 नवंबर को लगने वाले ग्रहण को कहां और कितने देर के लिए देखा जा सकेगा, यह लोकेशन और टाइमजोन पर निर्भर करता है.ग्रहण की शुरुआत सुबह 11 बजकर 34 मिनट से होगी और इसकी समाप्ति शाम 5 बजकर 33 मिनट पर होगी. भारत में चंद्र ग्रहण का समय दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 17 मिनट तक है. इस आंशिक चंद्र ग्रहण की अवधि करीब 3 घंटे 29 मिनट की होगी.

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चंद्र ग्रहण का टाइम-

उपच्छाया से पहला स्पर्श – सुबह 11:34 बजे

प्रच्छाया से पहला स्पर्श – दोपहर 12:50 बजे

परमग्रास चन्द्र ग्रहण – दोपहर 02:33 बजे

प्रच्छाया से अन्तिम स्पर्श – शाम 04:17 बजे

उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श –शाम 05:33 बजे

खण्डग्रास की अवधि – 03 घण्टे 26 मिनट

उपच्छाया की अवधि – 05 घण्टे 59 मिनट

क्यों लगता है ग्रहण- धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण लगने का कारण अलग अलग है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण को खगोलीय घटना माना जाता है. वहीं धार्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण को लेकर पौराणिक कथा है कि समुद्र मंथन के दौरान स्वर्भानु नामक दैत्य ने छल से अमृत पान करने की कोशिश की, लेकिन चंद्रमा और सूर्य को इसकी भनक लग गई और दोनों ने भगवान विष्णु को दैत्य की हरकत के बारे में बता दिया. लेकिन तब तक दैत्य अमृत के कुछ घूंट पी चुका था. इसके लिए राहु और केतु ने सूर्य और चंद्रमा को जिम्मेदार ठहराया. इसलिए हर साल पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण और अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण लगता है.

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