Lathmar Holi 2022: कब है लट्ठमार होली, जानें कैसे शुरू हुई ये होली खेलने की परंपरा

Pallawi Kumari, Last updated: Fri, 4th Mar 2022, 1:21 PM IST
  • लट्ठमार होली राधारानी और श्रीकृष्ण के प्रेम का प्रतीक मानी जाती है. बरसाना की लट्ठमार होली तो विश्वभर में मशहूर है. हर साल इस होली का आयोजन किया जाता है. इस बार लट्ठमार होली 11 मार्च को खेली जाएगी. आइये जानते हैं कैसे शुरू हुई लट्ठमार होली की परंपरा.
लट्ठमार होली (फोटो-लाइव हिन्दुस्तान)

रंग और उल्लास का त्योहार होली देशभर में मनाई जाती है. लेकिन कृष्ण नगरी मथुरा और वृंदावन की होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है. मथुरा, वृंदावन बरसाना, नंदगांव जैसे जगहों पर तो 15 दिन पहले से ही होली से जुड़े कई त्योहार शुरू हो जाते हैं, जिसमें लट्ठमार होली एक है. फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को होलिकाष्टक लगने के अगले दिन यानी नवमी को लट्ठमार होली खेली जाती है. इस बार लठमार होली शुक्रवार 11 मार्च को है. 

कई जगहों पर लट्ठमार होली के दिन विशेष आयोजन किए जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली से हफ्ते भर पहले क्यों खेली जाती है लट्ठमार होली और कैसे शुरू हुई इस परंपरा की शुरुआत.

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श्रीकृष्ण और राधारानी से शुरू हुई ये परंपरा-

होली से पहले लट्ठमार होली खेलने की परंपरा की शुरुआत भगवान श्री कृष्ण और राधारनी से मानी जाती है. कहा जाता है कि एक बार श्रीकृष्ण अपने मित्रों के साथ राधा और गोपियों संह होली खेलने के लिए बरसाना पहुंचे थे. कृष्ण अपने मित्रों के साथ राधा और गोपियों को सताने लगे, जिससे सभी परेशान हो गई. तब रंगों से बचने के लिए राधा और गोपियों ने उनपर लाठियां बरसानी शुरू कर दी. 

गोपियों और राधा की लाठियों से बचने के लिए कृष्ण और उनके मित्रों ने ढालों का इस्तेमाल किया. लेकिन धीरे-धीरे उनके ये होली खेलने का तरीका परंपरा में बदल गया. तब से लेकर आज कल इसी परंपरा के अनुसार लट्ठमार होली खेली जाती है और बड़े पैमाने पर इसका आयोजन किया जाता है. दूर-दूर से यहां तक कि देश-विदेश से लोग इस होली का आनंद लेने मथुरा पहुंचते हैं.

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