दीपावली: श्री गणेश एवं माता लक्ष्मी जी का इस प्रकार करें पूजन, धन व संतान की होगी प्राप्ति

Sumit Rajak, Last updated: Thu, 4th Nov 2021, 4:25 PM IST
  • दिवाली या दीपावली हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है. इस दिन मुख्य तौर पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, देवी सरस्वती, महाकाली की पूजा होती है. दिवाली हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है. दिवाली पूजन प्रदोष काल में किया जाता है. जो व्यक्ति सच्चे मन से दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं.शुभ मुहूर्त पर दिवाली के दिन पूरे विधि विधान से पूजा करने पर परिवार में सुख-समृद्धि आती है. और घर पर माता लक्ष्मी का वास होता है. आइये जानते हैं आज दीपावली पर माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किस मुहूर्त पर कैसे करें पूजा.
Diwali 2021

आगरा. आज घर में एक दम शान्ति पूर्ण वातावरण बनाए गृह क्लेश से बचें. शास्त्रों में लिखा है - जहाँ सुमति ( सद्बुद्धि ) वहाँ संपत नाना.जहाँ कुमति ( दुर्बुद्धि ) विपत निधाना. पूरे घर को साफ कर नमक मिलें पानी से पोछा लगाये तत्पश्चात गंगाजल छिड़कें.मुख्य द्वारा पर आम अथवा अशोक के पत्तों का बन्दनबार लगाएं और रंगोली , सतिया , कलश , ॐ आदि शुभ चिन्हों से सजाएं. मुख्य द्वारा गंदा न रहे , वहाँ जूते चप्पल आदि न रखें.

घर के उत्तरपूर्व , पूर्व मध्य , उत्तर मध्य स्थान पर आटे से चौक पूरें ( बनाए ) वहाँ चौकी रखें. उस पर लाल कपड़ा ( धन संपत्ति प्राप्ति के लिए ) पीला रंग कपड़ा ( आध्यात्मिक उन्नति एवं चित्त और परिवार में शान्ति के लिए ) बिछाएं , हल्दी से पीले चावल कर सतिया बनाएं , नवग्रह बनाएं , एक जल कलश रखें. गेहूँ अथवा जौ , खील आदि रख कर मन में ॐ श्री गणेशाय नमः 5 बार बोल कर श्री गणेश जी की मूर्ति को रखें तत्पश्चात माता श्री लक्ष्मी जी को आदर पूर्वक उनका मन ही मन स्मरण कर बिठाएँ. गायत्री मंत्र बोलते हुए मूर्तियों पर जल छिड़कें.

Diwali 2021: दिवाली के शुभ मुहूर्त पर करें लक्ष्मी-गणेश पूजा, ये है चौघड़िया और प्रदोष काल से लेकर पूजन विधि

उसके बाद पुराने श्री गणेश जी व माता श्री लक्ष्मी जी जिनकी वर्ष भर पूर्ण श्रद्धा भाव पूर्वक आपने पूजा की है ( प्रतिदिन पूजा करने से मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है ). उन मूर्तियों की ओर मुखातिब होकर बड़े विनम्र भाव एवं श्रद्धा पूर्वक प्रार्थना करें कि हे श्री गणेश जी आपने पूरे वर्ष आप कृपा मुझ पर एवं मेरे परिवार पर की है. इसलिए मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ / करती हूँ कि आप इस नवीन मूर्ति में अपना स्थान ग्रहण करें. इसी प्रकार माता श्री लक्ष्मी जी , श्री विष्णु जी एवं अन्य देवी देवताओं का आवाहन कर स्थान दें.पुराने श्री गणेश जी एवं माता श्री लक्ष्मी जी को यथास्थान पर ही विराजमान रहने दें. फिर श्री गणेश जी एवं माता श्री लक्ष्मी जी को रोली से टीका लगाए , श्री गणेश जी को डंडी वाले पान के पत्ते पर घर का बना हलुआ एवं बूदी के लड्डू , दूब घास , साबुत सुपाड़ी , पीले गेंदे के फूल , एक ऋतु फल आदि श्रद्धा पूर्वक अर्पित करें. इसी प्रकार माता श्री लक्ष्मी जी को घर की बनी खीर , खोये की बर्फी खील बतासे , कमल पुष्प , गुलाब पुष्प डंडी वाले पान के पत्ते पर रख कर अर्पित करें उसके पुराने श्री गणेश जी , एवं माता श्री लक्ष्मी जी की मूर्ति पर भी रोली तिलक कर पुष्प , मिष्ठान , खील बतासे अर्पित कर फिर श्री गणेश जी एवं माता श्री लक्ष्मी जी की विभिन्न प्रकार से स्तुति कर आरती करें. 6 नवम्बर दौज को पुराने श्री गणेश जी एवं माता श्री लक्ष्मी जी को श्रद्धा पूर्वक प्रणाम कर उनके स्थान पर नए श्री गणेश जी एवं माता श्री लक्ष्मी जी को बैठाएं और पुराने श्री गणेश जी व माता श्री लक्ष्मी जी को पुराने अखबार अथवा पेपर में लपेट कर सुरक्षित रख दें और जब आपको मौका मिले गंगा जी , यमुना जी , शुद्ध जल स्थान पर विसर्जित कर दें .

Diwali Puja Muhurat: लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ आगरा वाराणसी दिवाली लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त

आप भूल से भी पुराने श्री गणेश जी व माता श्री लक्ष्मी जी को इधर उधर न रखें अथवा गंदे पानी अथवा स्थान पर न फेकें यदि आप ऐसा करते तो आपकी वर्षभर की गई पूजा तो निष्फल होगी ही आपको पाप भी लगेगा. जिससे घर में विभिन्न प्रकार की परेशानियाँ आएगी एवं दरिद्रता का वास आपके घर में हो जायेगा. गृह क्लेश हर वक्त बना रहेगा.

शुभ मुहूर्त -

रात्रि 8 बज कर 10 मिनट से रात्रि 10 बज कर 20 मिनट तक अति शुभ मुहूर्त है.

रात्रि 12 बजकर 37 से 2 बज कर 55 मिनट तक सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सिंह लग्न में होता है.

विशेष - सायं 6 बज कर 12 मिनट से रात्रि 8 बज कर 10 मिनट तक स्थित लग्न वृष में इस वर्ष राहु चल रहा है केतु उसे देख रहा है और मंगल राहु को अष्टम दृष्टि से देख रहा है . इस लिए पूजन में कुछ बाधा आ सकती , परिवार में अकारण आपस में झगड़ा हो सकता है अथवा अग्नि विषयक दुर्घटना हो सकती है. इस लिए इस समय में पूजन करने से बचें. यदि करना ही बहुत जरूरी है तो दीपावली पूजन से पूर्व राहु, केतु, मंगल का यथाशक्ति मंत्र जप , दान , पूजा करने के तत्पश्चात दीपावली पूजन करें.

 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें