कीपेड फोन चलाने वाले सावधान, बिना एंड्रॉयड फोन के हो रही है WhatsApp से ठगी

Smart News Team, Last updated: Thu, 25th Nov 2021, 12:22 PM IST
  • स्मार्टफोन चलाने वालों के साथ हम आए दिन ठगी का मामला सुनते हैं, लेकिन अब साइबर क्राइम बेसिक कीपेड फोन चलाने वाले उपभोक्ताओं को भी अपने ठग का शिकार बना रहे हैं. इससे जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें से एक मामला इंदौर का है.
साइबर क्राइम बेसिक कीपेड फोन चलाने वाले उपभोक्ताओं को भी ठगी का शिकार बना रहे हैं

भोपाल. डिजिटल दुनिया के दौर में साइबर क्राइम दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है. तकनीकी के इस दौर में हर इंसान की जरूरत इंटरनेट पर ही टिकी हैं. इसके चलते साइबर अपराधियों का काम आसान हो गया है. स्मार्टफोन चलाने वालों के साथ हम आए दिन ठगी का मामला सुनते हैं, लेकिन अब साइबर क्राइम बेसिक कीपेड फोन चलाने वाले उपभोक्ताओं को भी अपना शिकार बना रहे हैं. इससे जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं.

कीपेड मोबाइल उपभोगता सें मांगते है OTP

साइबर ठग बैंक कर्मचारी या कॉल सेंटर कर्मचारी बनकर कीपेड मोबाइल फोन उपभोगता से वाट्सऐप या टेलीग्राम की आईडी बनाने के लिए उसपर आने वाला ओटीपी मांगते है. इसके बाद स्मार्टफोन या कम्प्यूटर पर इन प्लेटफार्म को पीडि़त के नम्बर से एक्टिव कर लिया जाता है जिसकी उन्हें भनक तक नहीं होती. फिर ठग वाट्सऐप या अन्य सोशल मीडिया की साइट्स की मदद से आम लोगों से ठगी करते हैं.

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पीड़ित के नम्बर से केवल करते हैं चैटिंग

वे इन नम्बरों से केवल चैटिंग ही करते हैं, जिससे असल नम्बर धारक के पास कभी फोन नहीं आता लेकिन उसके नम्बर से चैटिंग होती रहती है. ठगी का शिकार होने के बाद लोग एफआईआर कराते हैं. तब वे वही नम्बर डलवाते हैं जो चैटिंग में दिखा था। ऐसे में उस असल धारक के खिलाफ ठगी की एफआईआर दर्ज हो जाती है.

पहले आ चुका है ऐसा मामला सामने

इंदौर में कुछ समय पहले ऐसी ही ठगी की वारदात सामने आई थी. जिसमें महिला एंड्रॉयड फोन का इस्तेमाल ही नहीं कर रही थी, लेकिन इसके बावजूद उसके वॉट्सएप से कई लोगों के साथ ठगी हो गई थी. आरोपियों ने इसी तरीके से महिला के मोबाइल नंबर से WhatsApp इंस्टॉल किया और लोगों को लोन दिलाने के नाम पर इसका इस्तेमाल किया था.

कुछ लोगों ने लोन लेने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस तक जमा कर दी थी. प्रोसेसिंग फीस लेने के बाद हैकर और रकम वसूलता था, या फिर नंबर ब्लॉक कर देता था.

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