टमाटर की खेती से कमाएं लाखों रुपये, इस तकनीक का करें इस्तेमाल

Indrajeet kumar, Last updated: Mon, 13th Dec 2021, 5:13 PM IST
  • मध्य प्रदेश का जबलपुर इन दिनों सब्जी की खेती का हब बनता जा रहा है. पंजाब और हरियाणा के किसानों के अनुभवों का लाभ यहां के स्थानीय किसान भी उठा रहे हैं. पंजाब के रहने वाले रिटायर DSP आरएस कालरा भी इन दिनों जबलपुर में उन्नत तकनीक से टमाटर की खेती कर रहे हैं. उन्होंने इस तकनीक को अन्य किसानों को भी अपनाने को कहा है.
टमाटर का पौधा

भोपाल. जबलपुर का इलाका पंजाब और हरियाणा के किसानों के आने के बाद सब्जी की खेती का हब बनता जा रहा है. पंजाब और हरियाणा के किसानों के अनुभवों का लाभ यहां के स्थानीय किसान उठा रहे हैं. इसी कड़ी में एक नाम है आरएस कालरा. आरएस कालरा भारतीय पुलिस सेवा से DSP पद से रिटायर हो चुके हैं. अपने पांच एकड़ के जमीन में से वो इन दिनों करीब ढाई एकड़ में टमाटर की उन्नत खेती कर रहे हैं. कालरा ने खेती के तौर तरीकों के बारे में बताते हुए कहा कि मॉडर्न टेक्नोलॉजी से टमाटर कि खेती कर किसान अच्छा आमदनी कर सकते हैं.

झुलसा रोग के लिए करें ये उपाय

आरएस कालरा ने बताया कि ना तो ज्यादा नमी वाली जमीन होनी चाहिए और ना ही ज्यादा सुखी हुई जमीन. टमाटर के पौधे में फल और फूल आने के समय ही झुलसाकी बीमारी लगती है. बारिश के बाद ये रोग तेजी से पौधों में फैलता है. इस बीमारी से बचाव के लिए किसानों को टमाटर में फल और फूल आने के बाद कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए. किसान बारिश के बाद भी कीटनाशक का इस्तेमाल करें. टमाटर के पौधों में एक बीमारी इल्ली भी पकड़ती है. इस बीमारी से फल टेढ़े मेढ़े हो जाते हैं. इस से बचने के लिए कीटनाशक और विटामिन वाली दयावान का छिड़काव करना चाहिए. किसान शुरुआती दौर में महंगे दवाइयों के इस्तेमाल से बचें. किसान शुरू में ही अधिक ताकत वाले हैवी डोज कीटनाशक का इस्तेमाल कर देते हैं जिससे बाद में कीटनाशकों का का असर होना बंद हो जाता है.

इन तकनीक का करें इस्तेमाल

टमाटर आम तौर पर छह महीने की फसल है. टमाटर का उत्पादन चार महीने तक चलता है. ढाई एकड़ में लगभग 1200 कैरेट टमाटर का उत्पादन हो जाता है. आधे एकड़ में लगभग 10 मजदूरों को छह महीने तक रोजगार मिल सकता है. टमाटर की खेती के लिए ऐसी जगह का चुनाव करें जहां पानी नहीं लगती हो. पानी लगने से टमाटर के पौधे गल जाते हैं. किसान इसके लिए कड़ी के एक सिरे को ऊंचा और एक सिरे को नीच कर के मेढ़ बना लें. इसके बाद इन क्यारियों को ड्रिप इरीगेशन पाइप से लैस कर पॉलीथिन से ढंक दें. इसके बाद उन्हीं जगहों पर ड्रिप को खोलें जहां पौधों को रोपना हो. इस तकनीक का फायदा ये है कि फालतू के खरपतवार नहीं होंगे साथ ही ड्रिप इरीगेशन के जरिए हरेक पौधे तक पानी पहुंच जाता है. इस तकनीक को अपनाने से काफी कम पानी लगता है और खाद भी सीधे पौधे तक पहुंच जाता है. टमाटर के पौधे में इल्ली नीचे के हिस्से से लगना शुरू होता है क्योंकि नीचे के हिस्से में धूप कम लगते हैं. पॉलीथिन लगाने के बाद पौधे में नीचे के हिस्से से भी गर्माहट बनी रहती है जिससे इल्ली का प्रकोप कम होता है.

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इन बातों का रखें ख्याल

किसान अच्छी क्वालिटी के बीज का चुनाव करें. पॉली हाउस में कोकोपीट में उगाए को लगाए तो और अच्छा होगा. टमाटर के पौधे जमीन पर ना फैले इसके लिए पौधों को रस्सी या बांस के सहारे बांध लेनी चाहिए. इससे फल भी सुरक्षित रहेंगे और फल तोड़ने में भी आसानी होगी. खेत में हर जगह केमिकल युक्त पीले व नीले ट्रिप कार्ड लगा दें जिससे टमाटर में लगने वाले कीट-पतंग के प्रकोप की सही जानकारी मिलती रहे.

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