स्थापना दिवस विशेष: ऐसे हुआ मध्य प्रदेश का निर्माण, जानें MP के अस्तित्व के ये रोचक किस्से

Uttam Kumar, Last updated: Mon, 1st Nov 2021, 8:23 AM IST
  • मध्यप्रदेश (Madhya pradesh) एक नवंबर यानी आज अपना 66वां स्थापना दिवस मना रहा है. इस अवसर पर प्रदेशभर में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. इस बार स्थापना दिवस 'आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश' के थीम पर मनाया जा रहा है.
मध्यप्रदेश एक नवंबर यानी आज अपना 66वां स्थापना दिवस मना रहा है.

भोपाल. मध्यप्रदेश (madhya pradesh) एक नवंबर यानी आज अपना 66वां स्थापना दिवस मना रहा है. प्रदेशभर में रंगारंग कार्यक्रम क आयोजन किया जाएगा. सबसे जरूरी बात यह यही कि इस बार का स्थापना दिवस 'आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश' के थीम पर मनाया जा रहा है. मध्यप्रदेश का इतिहास से पुराना नाता रहा है. मध्यप्रदेश गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जानी जाती रही है. आज इस राज्य का स्थापना दिवस के मौके पर हम आपको इस राज्य के निर्माण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बाते बताएंगे.  

आजादी के बाद 1956 में राज्यों के पुर्नगठन के दौरान एक नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश को राज्य के रूप में दर्जा  दिया गया था. उसी दिन से एक नवंबर को मध्यप्रदेश में स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है. देश के नक्शे में बीच में होने की वजह से इसे मध्य भारत के नाम से भी जाना जाता था. दरअसल मध्यप्रदेश का  गठन भाषा के आधार पर किया गया था. मध्य प्रदेश को राज्य के रूप में दर्जा मिलने के साथ ही भोपाल शहर को प्रदेश की राजधानी के रूप में चुना गया. लेकिन उस समय भोपाल को जिला नहीं बनाया गया था. 

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भोपाल सीहोर जिले में आता था. वर्ष 1972 में भोपाल को जिला घोषित किया गया. मध्य प्रदेश के गठन के समय प्रदेश में कुल 43 जिले ही बनाए गए थे. लेकिन, वर्तमान में बढ़ती आबादी के कारण व्यवस्थाओं को सुचारू ढंग से चलाने के लिए अब तक मध्य प्रदेश में कुल 52 जिले बनाए जा चुके हैं. मध्य प्रदेश को राज्य का दर्ज देते समय इसकी राजधानी को लेकर काफी चर्चा हुई. कई क्षेत्रीय विवाद भी उभरे. 

मध्यप्रदेश की राजधानी के लिए भोपाल से ज्यादा ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर के नाम पर काफी मंथन हुआ था.  जबलपुर को राजधानी बनाने के इरादे से जबलपुर में हाई कोर्ट की स्थापना भी कर दी गई थी. लेकिन क्षेत्रीय कारणों और यहां नवाबी भवनों की संख्या ज्यादा होने के चलते भोपाल को ही सरकारी कामकाज के लिए उपयुक्त जगह चुना गया. भोपाल को मध्यप्रदेश की राजधानी के रूप में चुने जाने के पीछे यहां का क्लाइमेट भी बहुत महत्व रखता है. पहाड़ी इलाके यानी ऊंचाई पर बसे इस शहर का हर मौसम अनुकूल रहता है. भोपाल में अन्य शहरों की तुलना में ना तो ज्यादा गर्मी पड़ती है, ना ही सर्दी. 

 

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