ऐसा अनोखा शिव मंदिर जहां शिवलिंग को छू नहीं पाते लोग, कई कथाएं हैं मशहूर

Smart News Team, Last updated: Sun, 27th Feb 2022, 5:31 PM IST
  • मध्यप्रदेश में भोले शंकर का एक ऐसा मंदिर भी है, जिसमें स्थित शिवलिंग की लंबाई इतनी ज्यादा है कि काफी कोशिश करने के बाद भी लोगों के हाथ शिवलिंग तक नहीं पहुंच पाते और आखिर में थक हारकर श्रद्धालु बाहर से ही प्रसाद चढ़ाकर पूजा करते हैं.
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भोपाल: वैसे तो पूरे भारत में भगवान शिव के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें दर्शन के लिए लाखों श्रद्धाुल आते हैं. मंदिरों में भोलेनाथ से आशीर्वाद पाने के लिए दूर-दूर से भक्तों की कतारें लगी रहती है, लेकिन मध्यप्रदेश में भोले शंकर का एक ऐसा मंदिर भी है, जिसमें स्थित शिवलिंग की लंबाई इतनी ज्यादा है कि काफी कोशिश करने के बाद भी लोगों के हाथ शिवलिंग तक नहीं पहुंच पाते और आखिर में थक हारकर श्रद्धालु बाहर से ही प्रसाद चढ़ाकर पूजा करते हैं.

देश का अधूरा मंदिर

ये शिव मंदिर राजधानी भोपाल से करीब 30 किलोमीटर दूर भोजपुर में पहाड़ी पर स्थित है, जिसे भोजपुर शिव मंदिर या भोजेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. रायसेन जिले की गौहर गंज तहसील के ओबेदुल्ला विकास खंड में बने इस मंदिर में पूरे साल श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. इस मंदिर की खासियत को देखने के लिए लोग दूर- दूर से आते हैं. भोजपुर स्थित शिव मंदिर को पूर्व का सोमनाथ कहा जाता है, जिसके बारे में मान्यता है कि यह देश का ऐसा मंदिर है जो अधूरा बना हुआ है. बताया जाता है कि इस शिव मंदिर को 11 वीं सदी में परमार वंश के राजा भोज प्रथम ने बनवाया था. इसकी सबसे खास बात यह है कि ये बेतवा नदी के किनारे प्रकृति की हरी भरी गोद में बना हुआ है.

18 फीट का विशालकाय शिवलिंग

सोमनाथ के नाम से मशहूर इस मंदिर में विशालकाय शिवलिंग विराजमान हैं ,जो विश्व के एक ही पत्थर से बना सबसे बड़ा शिवलिंग बताया जाता है. मंदिर के शिवलिंग कि लम्बाई 5.5 मीटर यानी18 फीट है और व्यास 2.3 मीटर यानी 7.5 फीट बताया जाता है. इस मंदिर में शिव की पूजा करने का ढंग भी अलग है. अंदर विशालकाय शिवलिंग के होने की वजह से इतनी जगह नहीं बचती कि किसी अन्य तरीके से इसका अभिषेक किया जा सके. इसलिए हमेशा से ही इस शिवलिंग की पूजा औऱ अभिषेक जहरीली पर चढकर पुजारी ही करते हैं. इस मंदिर के लिए और बात कही जाती है कि पांडवों ने माता कुंती की आराधना के लिए एक भव्य शिव मंदिर बनवाया, जिसे बड़े बड़े पत्थरों से स्वयं भीम ने अपने हाथों से तैयार किया था. वहीं राजा भोज के समय में इसका विकास हुआ और ये भोजेश्वर महादेव मंदिर से प्रसिद्ध हो गया.

पश्चिम दिशा में है पार्वती गुफा

इस मंदिर के आसपास साल में दो बार मेले का आयोजन किया जाता है, जो मकर संक्रांति व महाशिवरात्रि पर्व के समय लगता है. भोजपुर शिव मंदिर के बिलकुल सामने पश्चिम दिशा में एक गुफा है, जिसे पार्वती गुफा के नाम से जाना जाता है.

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