कोरोना के आगे धन-दौलत सब फेल, इलाज में आठ करोड़ खर्च कर दिए तब भी नहीं बची जान

Ankul Kaushik, Last updated: Thu, 13th Jan 2022, 1:00 PM IST
  • मध्य प्रदेश के एक किसान ने कोरोना के इलाज में अपनी 50 एकड़ जमीन बेच दी. इस इलाज के लिए किसान का 8 दिन इलाज चला और 8 करोड़ रुपये खर्च हुए. हालांकि इस किसान की इस सब के बाद जान नहीं बची. उनके इलाज के लंदन से भी आए डॉक्टरों ने इलाज किया लेकिन वह फेल रहे.
करोड़ों रुपये खर्च करके भी नहीं बची धर्मजय की जान

भोपाल. कोरोना महामारी ने मध्य प्रदेश के रीवा के एक किसान की जान ही नहीं उसका खेत भी निगल लिया है. रीवा के किसान धर्मजय आठ महीने पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे और इसकी चलते उन्हें शहर के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन यहां पर उनके फेंफड़े में अधिक संक्रमण था इसलिए इन्हें चेन्नई के अपोलो अस्पताल में रेफर कर दिया. इसके बाद धर्मजय का इलाज आठ महीने चला और उनके इस इलाज में 8 करोड़ खर्च हो गए. धर्मजय के इलाज के लिए परिवार वालों ने अपनी 50 एकड़ जमीन बेच दी लेकिन फिर भी धर्मजय नहीं बच सके. उनके इलाज के लिए देश के कई नामी डॉक्टरों के अलावा लंदन के डॉक्टर भी लगे थे लेकिन वह भी उनकी जान नहीं बचा सके. धर्मजय की सफल किसानों में गिनती होती थी.

बता दें कि धर्मजय जिस दिन से अस्पताल में एडमिट हुए थे उस दिन से ही हर रोज उनकी हालात लगातार बिगड़ती जा रही थी. धर्मजय के बीमरी के दौरान हुए इलाज में खर्चे को लेकर उनके बड़े भाई प्रदीप सिंह ने कहा कि धर्मजय के इलाज में करीब 8 करोड़ रुपये खर्च हो गए. धर्मजय के इलाज के लिए उन्होंने अपनी करीब 50 एकड़ जमीन भी बेच डाली. वहीं धर्मजय के इलाज के लिए सरकार की ओर से चार लाख रुपये की मदद भी मिली लेकिन अस्पताल में उनके इलाज का हर दिन का खर्च एक से तीन लाख का था.

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एमपी के रीवा के रकरी गांव में रहने वाले धर्मजय एक प्रगतिशील किसान के तौर पर जाने जाते थे. धर्मजय ने अपनी पहचना मध्य प्रदेश के विंध्य इलाके में गुलाब और स्ट्रॉबेरी की खेती कर बनाई थी. इनकी इस खेती को देख आस-पास किसान भी प्रभावित हुए थे. उनकी इस खेती को देखकर साल 2021 में 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एसएफ ग्राउंड में धर्मजय को सम्मानित भी किया था.

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